फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India likely to sign USD one billion fighter jet engine deal with American firm GE by September

वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: अमेरिकी कंपनी जीई से $1 बिलियन का फाइटर जेट इंजन सौदा, सितंबर तक डील होने की उम्मीद

Tue, 26 Aug 2025 08:00 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 26 Aug 2025 08:00 PM IST
सार

Indian Air Force: यह सौदा भारत के लिए न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले दशक में भारत न सिर्फ लड़ाकू विमान बना सकेगा, बल्कि उनकी तकनीक में भी आत्मनिर्भर हो जाएगा।

विज्ञापन
India likely to sign USD one billion fighter jet engine deal with American firm GE by September
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

भारत अपनी वायुसेना की ताकत को और मजबूत करने के लिए जल्द ही एक और बड़ा रक्षा सौदा करने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) के बीच लगभग 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का समझौता सितंबर तक हो सकता है। इस समझौते के तहत जीई, भारतीय लड़ाकू विमान एलसीए तेजस मार्क-1ए के लिए 113 नए जीई-404 इंजन उपलब्ध कराएगी।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - SC: कॉलेजियम के जस्टिस पंचोली को पदोन्नत करने की सिफारिश पर असहमति, न्यायाधीश बीवी नागरत्ना ने जताई आपत्ति
विज्ञापन


सौदे में क्या-क्या खास?
हाल ही में केंद्र सरकार ने 97 और एलसीए तेजस मार्क-1ए विमान खरीदने की मंजूरी दी थी। इससे पहले, 83 विमानों के लिए 99 जीई-404 इंजन का सौदा हो चुका है। अब जो 113 इंजन खरीदे जाएंगे, वे 97 नए विमानों में लगाए जाएंगे। इस तरह, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को कुल मिलाकर 212 इंजन लगातार सप्लाई मिल जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंजन की डिलीवरी और समय-सीमा
जानकारी के मुताबिक जीई हर महीने दो इंजन भारत को सप्लाई करेगी। एसएएल का लक्ष्य है कि पहले 83 विमान 2029-30 तक वायुसेना को सौंप दिए जाएं। उसके बाद 97 विमानों का दूसरा बैच 2033-34 तक तैयार कर दिया जाएगा।

अगली योजना: जीई-414 इंजन
एचएएल, जीई से जीई-414 इंजन खरीदने के लिए भी बातचीत कर रहा है। इस सौदे की कीमत करीब 1.5 बिलियन डॉलर(12,500 करोड़ रुपये) हो सकती है। खास बात यह है कि इस समझौते में 80 प्रतिशत तकनीक भारत को ट्रांसफर की जाएगी। भारत को कुल 200 जीई-414 इंजन चाहिए होंगे, 162 इंजन एलसीए मार्क-2 लड़ाकू विमानों के लिए। 10 इंजन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोटोटाइप्स के लिए।


यह भी पढ़ें - उपराष्ट्रपति चुनाव: समाजवादी विचारधारा का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवियों ने रेड्डी का किया समर्थन, जानें वजह

क्यों महत्वपूर्ण है सौदा?
भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 लड़ाकू विमान अब पूरी तरह से रिटायर किए जा रहे हैं। उनकी जगह भारतीय तकनीक से बने तेजस विमानों को शामिल किया जाएगा। इससे देश की रक्षा तैयारियों में मजबूती आएगी और दुश्मन देशों को स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इस परियोजना से देशभर की छोटी और मझली रक्षा कंपनियों (एसएमई) को भी बड़ा कारोबार मिलेगा।

स्वदेशी इंजन पर भारत कर रहा काम
भारत पहले से ही अपना स्वदेशी फाइटर जेट इंजन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए भारत की साझेदारी फ्रांस की कंपनी सफरान से की जा रही है। लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत को किसी विदेशी कंपनी पर निर्भर न रहना पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed