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SC: कॉलेजियम के जस्टिस पंचोली को पदोन्नत करने की सिफारिश पर असहमति, न्यायाधीश बीवी नागरत्ना ने जताई आपत्ति

Tue, 26 Aug 2025 07:32 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 26 Aug 2025 07:32 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि न्यायमूर्ति पंचोली की पदोन्नति, उनकी कम वरिष्ठता और गुजरात उच्च न्यायालय से पटना उच्च न्यायालय में उनके पूर्व स्थानांतरण से जुड़ी परिस्थितियों के बावजूद न्यायपालिका के लिए प्रतिकूल होगी।

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Disagreement on sc Collegium recommendation about Justice Pancholi, Justice BV Nagarathna expressed objection
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को पदोन्नत करने की सिफारिश पर जस्टिस बीबी नागरत्ना ने आपत्ति जताई है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जस्टिस पंचोली की नियुक्ति न्याय के लिए प्रतिकूल होगी। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, जेके माहेश्वरी और नागरत्ना वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने सोमवार को केंद्र को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली के नामों की शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति की सिफारिश की थी।
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इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि न्यायमूर्ति पंचोली की पदोन्नति, उनकी कम वरिष्ठता और गुजरात उच्च न्यायालय से पटना उच्च न्यायालय में उनके पूर्व स्थानांतरण से जुड़ी परिस्थितियों के बावजूद न्यायपालिका के लिए प्रतिकूल होगी। सूत्रों के मुताबिक न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अपनी असहमति में कहा कि उनकी नियुक्ति को आगे बढ़ाने से कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता खत्म हो सकती है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने शीर्ष न्यायालय में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई। 
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न्यायमूर्ति नागरत्ना की आपत्तियां जस्टिस पंचोली के जुलाई 2023 में गुजरात उच्च न्यायालय से पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरण से जुड़ी हैं। बताया जा रहा है कि उनका स्थानांतरण नियमित नहीं था, बल्कि कई वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ परामर्श के बाद उठाया गया कदम था।  
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इससे पहले जब मई में न्यायमूर्ति पंचोली को पदोन्नत करने के विचार पर पहली बार विचार किया गया था, तब भी जस्टिस नागरत्ना ने आपत्ति जताई थी। बाद में न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया को न्यायमूर्ति पंचोली से पहले शीर्ष न्यायालय में पदोन्नत किया गया। जब तीन महीने बाद न्यायमूर्ति पंचोली का नाम फिर सामने आया तो न्यायमूर्ति नागरत्ना ने असहमति पत्र लिखा।

सीजेएआर ने भी जारी किया बयान
मामले में एनजीओ कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने भी बयान जारी किया है। सीजेएआर ने कहा कि सीजेएआर ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए 25 अगस्त के कॉलेजियम के हालिया बयान पर निराशा व्यक्त की है, जो न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता के मानकों के संबंध में पहले के प्रस्तावों का मजाक उड़ाता है।


बयान में कहा गया है कि कॉलेजियम ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंचोली को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने के संबंध में 4-1 से विभाजित निर्णय लिया। यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायमूर्ति पंचोली को सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त करने की सिफारिश करने में सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम को किस बात ने प्रभावित किया है, क्योंकि न्यायमूर्ति पंचोली सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाले गुजरात के न केवल तीसरे न्यायाधीश हैं, बल्कि वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 57वें स्थान पर हैं।
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