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Jaishankar: 'जम्मू-कश्मीर के हिस्से पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा सह रहा भारत', रायसीना डायलॉग में बोले जयशंकर

Tue, 18 Mar 2025 11:21 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 18 Mar 2025 11:21 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को रायसीना डायलॉग में वैश्विक व्यवस्था की खामियां बताईं। उन्होंने कहा कि भारत 1948 से जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर लंबे समय से पाकिस्तान के अवैध कब्जे को सहन कर रहा है। वैश्विक नियमों की अनदेखी ने इस आक्रमण को विवाद बना दिया है। 

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'India is tolerating Pakistan's illegal occupation of Jammu and Kashmir', Jaishankar said in Raisina Dialogue
विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : PTI

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अगर किसी क्षेत्र पर सबसे लंबे समय तक अवैध कब्जा देखने को मिला है तो वह कश्मीर है। विदेश मंत्री ने मंगलवार को रायसीना डायलॉग में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का जिक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र पर सवाल उठाए।
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जयशंकर ने कहा, हम यूएन गए और जो आक्रमण था, उसे विवाद बना दिया गया। हमलावर और पीड़ित को एक ही श्रेणी में रखा गया। कश्मीर मुद्दे को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप पर उन्होंने पश्चिमी देशों के नजरिये पर भी सवाल उठाए। जयशंकर ने कहा, यह दिखाता है कि कैसे पश्चिमी ताकतों ने कश्मीर की वास्तविकता को तोड़-मरोड़कर पेश किया। पिछले आठ दशकों से दुनिया के कामकाज का ऑडिट करना और इसके बारे में ईमानदार होना और आज यह समझना महत्वपूर्ण है कि दुनिया में संतुलन और हिस्सेदारी बदल गई है।
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उन्होंने आगे कहा, हमें एक अलग बातचीत की जरूरत है। हमें एक अलग व्यवस्था की जरूरत है। विदेश मंत्री ने कुछ मुद्दों से निपटने में ऐतिहासिक अन्याय को लेकर चिंता जाहिर करने के साथ एक मजबूत और निष्पक्ष संयुक्त राष्ट्र की हिमायत भी ंकी। उन्होंने कहा कि खासकर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित मुद्दों पर वैश्विक नियम-कायदे समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा, हमें एक मजबूत संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है लेकिन एक मजबूत संयुक्त राष्ट्र के लिए एक निष्पक्ष संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है।
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वैश्विक व्यवस्था में बुनियादी स्थिरता जरूरी
जयशंकर ने कहा कि एक मजबूत वैश्विक व्यवस्था में मानकों में कुछ बुनियादी स्थिरता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पश्चिमी देश किसी देश के बारे में बात करते हैं तो कहते हैं कि वहां लोकतंत्र खतरे में है लेकिन जब कोई दूसरा पश्चिमी देश पर अंगुली उठाता है तो उसे दुर्भावनापूर्ण हस्तक्षेप कहा जाता है। उन्होंने कहा, हमें विश्व व्यवस्था की अहमियत समझने होगी। पुरानी व्यवस्था अपने समय की उपज थी... इसकी खूबियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया क्योंकि नियम बनाने वाले और उन्हें मानने वालों के दृष्टिकोण अलग-अलग थे।

अराजकता के लिए बड़ा देश होना जरूरी नहीं
जयशंकर ने कहा, हमें एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत है, ठीक वैसे ही जैसे हमें एक घरेलू व्यवस्था की जरूरत होती है...अगर कोई व्यवस्था नहीं है तो अराजकता की स्थिति उत्पन्न करने के लिए किसी देश का बड़ा होना जरूरी नहीं है। कोई भी देश जोखिम उठाकर अव्यवस्था का इस्तेमाल अपने फायदे   के लिए कर सकता है। हमारे पड़ोस के कुछ छोटे देशों ने ऐसा कर भी दिखाया है। उनका इशारा बांग्लादेश की तरफ था।

भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का समय : गबार्ड
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने रायसीना डायलॉग के एक सत्र में कहा कि यह भारत-अमेरिका संबंधों को प्रगाढ़ करने और नई ऊंचाइयों पर ले जाने का बेहद अहम समय है। गबार्ड ने वाशिंगटन डीसी में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक को दो पुराने दोस्तों का फिर से मिलना बताया। साथ ही कहा, मुझे विश्वास है कि हमारे दोनों देशों के बीच यह साझेदारी और मित्रता लगातार बढ़ती रहेगी।

उन्होंने कहा कि ट्रंप की अमेरिका प्रथम नीति की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी भी इंडिया प्रथम दृष्टिकोण को लेकर प्रतिबद्ध हैं। किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि अमेरिका प्रथम का मतलब केवल अमेरिका है। दुनिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल पर चर्चा करते हुए गबार्ड ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। वह एक शांतिदूत और एकजुट करने वाले नेता के रूप में अपनी विरासत छोड़ना चाहते हैं। 


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जय श्रीकृष्ण के साथ किया संबोधन की शुरुआत
जय श्रीकृष्ण से शुरू किया संबोधन हिंदू धर्म को मानने वाली गबार्ड ने संबोधन की शुरुआत नमस्ते और जय श्रीकृष्ण से की। कहा, ये शब्द शाश्वत दिव्य भावना को दर्शाते हैं, जो हम सभी के दिल में हैं। यह याद दिलाता है कि हम सभी नस्ल व धर्म से परे एक-दूसरे से जुड़े हैं। खालिस्तान समर्थकों और टैरिफ पर चुप्पी  गबार्ड ने कहा, ट्रंप प्रशासन विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए नई दिल्ली के साथ संबंधों को बढ़ावा देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों या टैरिफ पर भारत की चिंताओं का उल्लेख नहीं किया।

यूक्रेन के विदेश मंत्री बोले-क्षेत्रीय अखंडता से नहीं करेंगे समझौता
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने कहा कि उनका देश रूस के साथ जंग का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, दीर्घकालिक और टिकाऊ शांति हासिल करना वैश्विक हित में होगा। सिबिहा ने कहा, हम रूस के कब्जाए क्षेत्र के किसी भी हिस्से को कभी मान्यता नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर हमला करके रूस ने कोई रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं किया है।

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