{"_id":"5eb0d1108ebc3e905b577232","slug":"india-is-step-closer-to-make-drug-for-covid-19-patients-iict-synthesised-key-starting-materials-for-remdesivir","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड-19 के लिए दवा बनाने के करीब पहुंचा भारत, आईआईसीटी कर रहा काम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोविड-19 के लिए दवा बनाने के करीब पहुंचा भारत, आईआईसीटी कर रहा काम
Tue, 05 May 2020 08:06 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 05 May 2020 08:06 AM IST
विज्ञापन
तापमान जांचते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैदराबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) ने रेमेडिसविर के लिए प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) को संश्लेषित किया है। यह सक्रिय दवा घटक विकसित करने की दिशा में पहला कदम है। आईआईसीटी ने सिप्ला जैसी दवा निर्माताओं के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शन भी शुरू किया है ताकि जरूरत पड़ने पर भारत में इसका विनिर्माण शुरू हो सके।
विज्ञापन
रेमेडिसविर का निर्माण गिलियड साइंसेज करती है। इसे नैदानिक डाटा के आधार पर अमेरिका में कोविड-19 के इलाज के लिए आपातकालीन अनुमति मिल चुकी है। गिलियड साइंसेज का दवा पर पेटेंट है, लेकिन पेटेंट कानून इस दवा को केवल अनुसंधान उद्देश्यों के लिए विकसित करने की अनुमति देता है न कि व्यावसायिक निर्माण के लिए।
विज्ञापन
अमेरिका के नैदानिक परीक्षण के परिणाम दिखाते हैं कि रेमेडिसविर को जब संक्रमित मरीजों को दिया गया तो इससे वह औसतन 11 दिन में ठीक हो गए जबकि अन्य दवा से ठीक होने में 15 दिन का समय लगता है। भारत कोविड-19 के इलाज के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सॉलिडैरिटी ट्रायल का हिस्सा है और परीक्षण के लिए दवा की 1000 खुराक प्राप्त हुई हैं।
विज्ञापन
हर्षवर्धन ने सोमवार को एक बयान में कहा कि आईआईसीटी द्वारा केएसएम का संश्लेषण प्राप्त किया गया है और भारतीय उद्योग के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शन हो रहे हैं। फैविपीरावीर (फ्लू की दवा) के बाद कोविड-19 के इलाज के लिए यह एक और आशाजनक दवा है। सीएसआईआर नैदानिक परीक्षण और भारत में इसे संभावित लॉन्च के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रहा है।
रेमेडिसविर के तीन केएमएस हैं- पायरोल, फुरोन और फॉस्फेट। आईआईसीटी के निदेशक डॉक्टर श्रीवरी चंद्रशेखर ने कहा कि केएसएम का संश्लेषण दवा विकास में एक महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा, 'केएसएम का संश्लेषण किसी भी दवा के लिए सक्रिय दवा घटक विकसित करने के लिए पहला कदम है। रेमेडिसविर के लिए ये प्रमुख शुरुआती सामग्री भारत में उपलब्ध हैं और रासायनिक कंपनियां इनका निर्माण कर सकती हैं। अन्य अभिकर्मकों (रीजेंट) को दूसरे देशों से लिया जा सकता है। हमने जनवरी के अंत में जब चीन में परीक्षण शुरू हुए थे, तब रेमेडीसविर के केएसएम के लिए काम करना शुरू कर दिया था।'