आकाश में नारी शक्ति का कब्जा, 12 फीसदी कॉमर्शियल पायलट भारत की
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बस कुछ दिन पहले की बात है जब देश में पहली बार तीन लड़ाकू पायलट उड़ाने के लिए कॉकपिट में महिला पायलटों ने अपनी धमक दिखाई, और यह पहला मौका है जब देश में लड़ाकू विमान महिला पायलटों के हवाले खुले आसमान पर कर दिया गया। बता दें कि पूरी दुनिया की तुलना में भारत में सबसे अधिक कॉमर्शियल पायलट हैं। यह आंकड़ा 20 फीसदी को पार कर चुका है। लेकिन 20 साल पहले यह हालात नहीं थे। महिला पायलटों का बोलबाला देश में बढ़ रहा है। पिछले दिनों जब अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह पहली बार देश की तीन महिलाएं वायुसेना के लड़ाकू विमानों की पायलट बनीं तो देश में नए दौर की शुरुआत सामने आई।
महिलाओं के लिए नहीं रहा असामान्य काम
लेकिन 20 साल पहले किसी लड़की का पायलट बनना एक असामान्य प्रक्रिया थी। श्वेता सिंह जब पायलट बनना चाहती थीं तो उनका यह सफर इतना आसान नहीं था। पहले महिलाओं के लिए असामान्य मानें जाने वाले प्रोफेशन के लिए परिवार वालों को मनाना आसान नहीं था और जब वह पायलट बन गईं तो कॉकपिट में पुरुष साथियों का स्वागत करने का तरीका बहुत ही निराशाजनक था। लेकिन आज समय बदल चुका है। श्वेता कहती हैं कि यह महिलाओं के लिए असामान्य नहीं बल्कि गले लगाने वाला करियर है।
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देश की बहुत सारी ऐसी लड़कियां हैं जो पायलट बनना चाहती हैं और इस प्रोफेशन में उनकी कई सुविधाएं इंतजार कर रही हैं, एविएशन सेक्टर इन दिनों अपने उफान पर है, महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल मुहैया कराया जा रहा है, साथ ही महिलाओं के लिए बराबर वेतन अनिवार्य किया जा रहा है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में महिला व्यवसायिक पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पूरी दुनिया की तुलना में सबसे ज्यादा 12 फीसदी कॉमर्शियल पायलट भारत के ही हैं। यह हाल तब है जब भारत का समाज पूरी तरह से पितृसत्तात्मक है, जो महिलाओं को ऐसी नौकरी करने की इजाजत नहीं देता है। श्वेता अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि पहले किसी लड़की का पायलट बनना कितना मुश्किल काम था। पायलट का पूरा समाज पुरुषसत्तात्म है और इसे तोड़ना आसान नहीं है।
घरेलू उड़ानों में 22 फीसदी का इजाफा
जेट एयरवेज की सीनियर ट्रेनर और भारत एविएशन रेगुलेटर में डिप्टी चीफ फ्लाइट ऑपरेशन इंसपेक्टर श्वेता सिंह कहती हैं कि समाज बहुत तेजी से बदल रहा है।
अंतराष्ट्रीय सोसाइटी ऑफ वुमन एयरलाइन पायलट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में महिला पायलटों का आंकड़ा विश्व में महिला पायलटों की संख्या की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा है। बता दें कि विश्व की तुलना में भारत में महिला पायलटों की संख्या दुगुनी है। यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी ज्यादा है। इन देशों में महिला पायलटों की संख्या 5 फीसदी से भी कम है।
आठ लाख पायलटों की होगी जरूरत
दुनियाभर में पायलटों की मांग बढ़ रही है, आने वाले 20 वर्षों में करीब 7,90,000 नये पायलटों की जरूरत होगी। भारत में एविएशन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। घरेलू उड़ानों में महज छह महीनों में 22 फीसदी का इजाफा हुआ है। अगर इसी तेजी से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में यह मांग दुगुनी हो जाएगी। अगर पायलटों की कमी से निपटना है तो अधिक से अधिक महिला पायलटों को नौकरी देनी होगी।
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देश में बदलाव की बयार बह रही है, महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया जा रहा है। वरिष्ठता और उड़ने के घंटे पर जिस तरह से सैलरी का चयन किया जा रहा है इसमें कहीं भी महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सैलरी के मामले में भी महिलाओं को उतनी ही सैलरी दी जा रही है, जितनी पुरुष पायलटों को दी जाती है। फ्लाइंग एलाउंस के साथ स्टार्टिंग सैलरी ही पायलटों की 25000 डॉलर (17 लाख रुपए) से 47,000 (33 लाख रुपए) डॉलर प्रतिवर्ष होती है जो एयरलाइन्स और एयरक्राफ्ट पर निर्भर करती है। कुछ ऐसी ही सैलरी ही कॉरपोरेट लॉयर और आर्कीटेक्ट की भी होती है।
निजी कंपनियों में है महिला पायलटों का बोलबाला
इंडिगो जो इंटर ग्लोब एविएशन लिमेटेड के अंदर आती है इसमें 13 फीसदी पायलट महिलाएं हैं। पिछले पांच सालों में महिला पायलटों में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। बता दें कि इंडिगो में फिलहाल 330 महिला पायलट हैं। महिला पायलटों को विमानन कंपनी कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराती हैं। वहीं स्पाइसजेट में भी 12 फीसदी महिलाएं पायलट हैं। यहां तक की विभाग अध्यक्ष भी महिलाएं हैं। यही नहीं हर महीने महिला पायलट को विशेष तौर पर विमान उड़ाने का शेड्यूल दिया जाता है।