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Jaishanker: 'भारत में वैश्विक तनाव कम करने की क्षमता'; पश्चिम एशिया में जंग के बीच जयशंकर ने की शांति की अपील

Sun, 06 Oct 2024 05:08 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 06 Oct 2024 05:08 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र को लेकर विदेश मंत्री बोले कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी पुरानी कंपनी की तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ तालमेल नहीं रखती, बल्कि जगह घेरती है।

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'India has the potential to reduce global tensions'; Jaishankar appeals for peace amid war in West Asia
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में हो रहे कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर कहा कि भारत के पास वैश्विक तनाव को कम करने की क्षमता है। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी तंज कसा।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि  भारत ने कई बार दोनों देशों के बीच संवाद और संचार की भूमिका निभाई है। इस संघर्ष को लेकर ग्लोबल साउथ देश काफी परेशान हैं। इससे वैश्विक समाज और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी तनाव में है। ग्लोबल साउथ देश चाहते हैं कि कोई इसके बारे में कुछ कहने की पहल करे और वे मानते हैं कि भारत ही ऐसा देश है जो उनकी चिंताओं के समझता है और इस तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। इसका ही परिणाम है कि हमारी बहुत सी पहल संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। हम सभी प्रमुख देशों से जुड़े हुए हैं। हमें वैश्विक राजनीति के प्रति अधिक जिम्मेदारी की भावना वाले देश के रूप में देखा जाता है और यह भारत के अपने विकास का हिस्सा है। 
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यूक्रेन संघर्ष को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीन बार मुलाकात की। वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी एक बार मिले। मैनें और एनएसए ने भी दोनों से कई बार बात की है। हम अभी भी संपर्क में हैं। हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम ऐसे देश और हमारे प्रधानमंत्री उनमें से हैं जो कीव और मॉस्को जाने और दोनों नेताओं से बात करने और देखने की क्षमता रखते हैं कि सामान्य बिंदु क्या हो सकता है? हम यह विकसित करने का प्रयास करते हैं और देखते हैं कि क्या चीजें बेहतर हो सकती हैं?
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संयुक्त राष्ट्र को लेकर विदेश मंत्री बोले कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी पुरानी कंपनी की तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ तालमेल नहीं रखती, बल्कि जगह घेरती है। यह पूरी तरह से बहुपक्षीय है, लेकिन जब यह प्रमुख मुद्दों पर कदम नहीं उठाता है, तो देश अपने तरीके ढूंढते हैं। पिछले पांच-दस सालों में सबसे बड़ी चीज जो हम सबके जीवन में हुई, वह थी कोविड। इस बारे में सोचें कि संयुक्त राष्ट्र कोविड पर क्या करता है? मुझे लगता है कि इसका कोई उत्तर नहीं है।


उन्होंने कहा कि आज दुनिया में दो संघर्ष चल रहे हैं, उसे लेकर भी यह केवल एक दर्शक की भूमिका में है। कोविड के दौरान देशों ने या तो अपना काम किया या COVAX जैसी पहल की। देशों का संयोजन तेजी से बढ़ रहा है। क्योंकि कई देश ऐसे हैं जो एक साथ आते हैं और कहते हैं सहमत हों और चलें, इसे करें। मुझे लगता है कि संयुक्त राष्ट्र जारी रहेगा, लेकिन तेजी से एक गैर-संयुक्त राष्ट्र अपना स्थान बना रहा है। 

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