दुनियाभर में प्रति 10 लाख आबादी पर कोरोना से सबसे कम मौतें भारत में: सरकार
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मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय औसत, जो वर्तमान में 80 है, की तुलना में प्रति 10 लाख की जनसंख्या में कम मौतें होती हैं।
उन्होंने ट्वीट किया, "कुछ राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों का प्रदर्शन बेहतर रहा है और वहां राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत कम मौतें/ मिलियन आबादी दर्ज की जा रही हैं।"
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मिजोरम में कोरोना महामारी के कारण किसी की भी मौत नहीं हुई है। प्रति 10 लाख आबादी पर सबसे कम मौत दमन और दीव और दादरा और नागर हवेली में हुई जो कि तीन है, उसके बाद इस सूची में हैं बिहार (8), नागालैंड (10) और अरुणाचल प्रदेश (18)। देश में सबसे अधिक मौत (प्रति 10 लाख जनसंख्या) त्रिपुरा (77), उत्तराखंड (71), पश्चिम बंगाल (58) और हरियाणा (57) में दर्ज की गईं।
#IndiaFightsCorona#Unite2FightCorona
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) October 16, 2020
India continues to have one of the lowest deaths per million population globally (presently pegged at 80).
Some States/UTs are performing better and reporting much lower deaths/million population than the national average. pic.twitter.com/3ejtqZwvZ6
मंत्रालय ने इन बेहतर नतीजों को हासिल करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे को श्रेय दिया। एक अन्य ट्वीट में कहा गया है, "चिकित्सा के बुनियादी ढांचे में वृद्धि, आईसीयू डॉक्टरों की क्रिटिकल केयर क्षमताओं को मजबूत करना, स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पालन करना और डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और विभिन्न कोरोना-19 योद्धाओं के अथक प्रयासों का यह सामूहिक परिणाम है।"
गुरुवार को, कोविड-19 बीमारी से मरने वालों की संख्या 1,11,266 दर्ज हुई, जिससे मृत्यु दर 1.52 फीसदी पर है। 8,12,390 सक्रिय मामलों के साथ देश में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या 73 लाख को पार कर गई है। जबकि 63 लाख से ज्यादा लोग होम आइसोलेशन या कोविड-19 अस्पतालों में भर्ती होकर संक्रमण से ठीक हो गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि कुछ महीनों में इस जानलेवा बीमारी के लिए एक वैक्सीन आ जाने की उम्मीद है और इसका वितरण अगले छह महीनों में शुरू होगा। उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने, नियमित रूप से हाथ धोने और फेस मास्क पहनने की आवश्यकता दोहराई और कहा कि यह "एक शक्तिशाली सोशल वैक्सीन इस बीमारी को रोक सकता है और यह कोविड-19 के खिलाफ जन आंदोलन की नींव भी है।"