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पाकिस्तान के खिलाफ भारत का त्रिस्तरीय फार्मूला, संयुक्त राष्ट्र में ही पटखनी देने की तैयारी

Thu, 29 Aug 2019 09:32 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 29 Aug 2019 09:32 PM IST
सार

  • सीमापार से आतंकवाद की घुसपैठ पर सैन्य बलों की है पैनी निगाह
  • विदेश मंत्रालय पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद पर कर रहा है अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की तैयारी
  • पड़ोसी देश ने सीमा लांघी तो खैर नहीं

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India has prepared diplomatic pressure formula on pakistan in United nation session
नरेंद्र मोदी, एस जयशंकर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

विस्तार

कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्ति की घोषणा के बाद से नई दिल्ली लगातार उच्च स्तर पर संवेदनशीलता बरत रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस के बाद इन दिनों फ्रांस में हैं। वहां वह अपने समकक्ष के साथ सामरिक साझेदारी बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। एनएसए प्रधानमंत्री के फ्रांस के शहर बियारेत्ज से लौटने के बाद वहां पहुंचे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विजय गोखले लगातार विदेशनीति और कूटनीति के प्रयासों को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
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गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद विदेश मंत्री ने चीन की यात्रा की थी, इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री भी भूटान के दौरे पर थे। भारत की पूरी कोशिश कूटनीतिक प्रयासों से पाकिस्तान के शरारती प्रयासों की हवा निकाल देने की है।

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आतंकवाद, घुसपैठ बढ़ने की आशंका, सुरक्षा बल तैयार

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तान से घुसपैठ और आतंकवाद बढ़ने की आशंका जताई है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बाद भारतीय नौसेना ने गुजरात के कच्छ से लेकर कोच्चि के तटों और अरब सागर तक कमांडो के भेष में घुसपैठ करने वाले संभावित आतंकियों की निगरानी तेज कर दी है। सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी उच्च स्तर की सतर्कता बरती जा रही है। सैन्य सूत्रों को इस बार घुसपैठ बढ़ने की आशंका है।

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बर्फ पिघलने के बाद सीमापार से आतंकी घुसपैठ की कोशिश करते हैं और उनकी मदद करने के लिए पाकिस्तान की सेना कवर फायर, संघर्ष विराम उल्लंघन जैसे तमाम हथकंडे अपनाती है। सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलविंदर सिंह का कहना है कि इस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, मंत्री सब युद्ध की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में वह सीमापार से घुसपैठ को तेज करा दें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वैसे भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को इसमें महारत हासिल है।

क्या पाकिस्तान लड़ेगा एक और युद्ध?

सेना मुख्यालय के एक अधिकारी का कहना है कि युद्ध इस तरह बोल कर नहीं होता। पिछले कई दशकों से ऐसी धमकियां सुनते हुए कान पक चुके हैं। सैन्य सूत्रों को पाकिस्तान से युद्ध के बजाय छद्म युद्ध तेज किए जाने की ही आशंका है। इस छद्म युद्ध में सीमापार की ताकतें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बहला फुसलाकर आतंक के रास्ते पर ले जाने, सीमा पार से घुसपैठ को बढ़ावा देने, दुष्प्रचार या जम्मू-कश्मीर के जनमानस को भड़काने की कोशिशों को ही बढ़ावा दे सकती है। बताते हैं इसे लेकर उच्च स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।

पाकिस्तान के खिलाफ भारत का त्रिस्तरीय फार्मूला

पाकिस्तान के आतंकवाद से निबटने के लिए भारत त्रिस्तरीय फार्मूला अपना रहा है। पहला नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा और जम्मू-कश्मीर के भीतर सुरक्षा बलों का आपरेशन, सतर्कता तथा सैन्य प्रयास। दूसरा फार्मूला अंतरराष्ट्रीय स्तर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद तथा इस आतंकवाद को संरक्षण देने में स्टेट की भूमिका को उजागर करना। तीसरा प्रयास पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली सैन्य सहायता, आर्थिक सहायता तथा अन्य के लिए बाधा खड़ी करना। पाकिस्तान को आतंकवाद को शह देने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करना।


राजनयिक सूत्रों का कहना है कि वह लगातार जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने, लोगों को भड़काने के प्रयासों में लगा है। जबकि दुनिया के देश इसे भारत का आंतरिक मामला मान रहे हैं और भारत-पाकिस्तान के आपसी मुद्दों का समाधान शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र के जरिए करने के पक्षधर हैं। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की तैयारी 

सितंबर 2019 के तीसरे-चौथे सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र आरंभ हो रहा है। पाकिस्तान ने पहले से ही संयुक्त राष्ट्र में गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसमें भाग लेने के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों प्रतिनिधि मंडल के साथ जाएंगे। समझा जा रहा है कि भारत-पकिस्तान के आतंकवाद तथा उसके रवैये पर नकेल पहनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है।

27 सितंबर को भाषण!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित किया था। इस बार के सत्र में भी वह 27 सितंबर को अपना भाषण दे सकते हैं। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री इसमें विश्व के देशों से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए साझा अभियान चलाने और आगे आने का आह्वान कर सकते हैं। वह कश्मीर और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नापाक कोशिशों पर भी उसे आईना दिखा सकते हैं।

 

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