फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India has covered remarkable distance in ensuring inclusive participation in polls: CEC Chandra

उपलब्धि: 17 आम चुनावों के बाद मतदान करने में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा 

Fri, 26 Nov 2021 05:35 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 26 Nov 2021 05:35 PM IST
सार

महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों की चुनावी भागीदारी बढ़ाने पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त चंद्रा ने पुराने अनुभवों को साझा किया।

विज्ञापन
India has covered remarkable distance in ensuring inclusive participation in polls: CEC Chandra
मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (file photo) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय लोकतंत्र ने पहले लोकसभा चुनावों के बाद से उल्लेखनीय विकास किया है। आज सात दशक और 17 आम चुनावों के बाद मताधिकार का प्रयोग करने में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थान तभी फलते-फूलते हैं जब लोगों के सभी समूहों का पूर्ण प्रतिनिधित्व हो। 

विज्ञापन


महिलाओं, विकलागों की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए गए विशेष प्रयास
महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों की चुनावी भागीदारी बढ़ाने पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए चंद्रा ने बताया कि कैसे चुनाव आयोग ने महिलाओं, विकलांग लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडरों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए।
विज्ञापन


चंद्रा ने कहा कि ज्यादातर देशों और क्षेत्रों में महिलाओं को टुकड़ों में वोट देने का अधिकार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान मताधिकार देने में अमेरिका को 144 साल लग गए। भारत में जिस वर्ष इस देश का जन्म हुआ उसी वर्ष महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला। कई भारतीय महिलाओं ने समान अधिकार के लिए मतदान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय मताधिकार आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ गति पकड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन


नाम का खुलासा करने से महिलाओं ने कर दिया था इनकार
उन्होंने याद किया कि असल समस्या मतदाता सूची की तैयारी में सामने आई, जब परंपराओं के कारण बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया था। कोई किसी की पत्नी तो किसी की मां के तौर पर पंजीकृत होना चाहती थी। 


तब चुनाव आयोग को निर्देश जारी करना पड़ा कि नाम पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है और महिला मतदाताओं को अपने नाम के साथ ही पंजीकृत होना होगा। इसे लेकर सार्वजनिक अपीलें जारी की गईं और महिला मतदाताओं को पंजीकरण कराने में सक्षम बनाने के लिए एक महीने का समय और दिया गया।  
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed