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Mohan Bhagwat: 'विकास और पर्यावरण का संरक्षण दोनों जरूरी', RSS प्रमुख ने गुरुग्राम में किया सम्मेलन का उद्घाटन
Fri, 15 Nov 2024 10:16 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम (हरियाणा)
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 15 Nov 2024 10:16 PM IST
सार
Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख हम भागवत ने कहा कि अगर हम 1ईस्वी से लेकर 16वीं सदी तक की बात करें, तो भारत हर क्षेत्र में अग्रणी था। हमने पहले ही कई चीजों की खोज कर ली थी। लेकिन फिर हम रुक गए और इसी वजह से हमारा पतन शुरू हो गया।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को गुरुग्राम में आयोजित एक सम्मेलन में भारत की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी माना जाता था। लेकिन बाद में पर्यावरण संबंधी समस्याएं भी देश में पैदा होने लगीं।
'हर क्षेत्र में अग्रणी था भारत'
भागवत ने कहा, अगर हम 1ईस्वी से लेकर 16वीं सदी तक की बात करें, तो भारत हर क्षेत्र में अग्रणी था। हमने पहले ही कई चीजों की खोज कर ली थी। लेकिन फिर हम रुक गए और इसी वजह से हमारा पतन शुरू हो गया। उदाहरण के तौर पर भारत में खेती 10 हजार वर्षों से हो रही है। लेकिन कभी भी मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण की समस्या नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो इन समस्याओं ने 500-600 वर्षों में सिर उठाया। इसका मतलब कही न कहीं हमारे दृष्टिकोण में कमी थी, जिसके कारण एकतरफा विकास हुआ। भारत में विकास को समग्र रूप से किया जाना चाहिए।
'विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ करना जरूरी'
भागवत ने आज गुरुग्राम के एसजीटी विश्वविद्यालय में एक सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस सम्मेलन का शीर्षक 'विकसित भारत के लिए दृष्टिकोण-2024' रखा गया था। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी बताया कि आजकल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बहस हो रही है। लेकिन दोनों को एक साथ करना जरूरी है। उन्होंने कहा, आजकल यह बहस हो रही है कि हमें विकास करना चाहिए या पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए, जैसे हमें एक चुनना हो। लेकिन यह सवाल नहीं है कि मानव जीवन में हमें एक को चुनना है। बल्कि हमें दोनों को साथ करना चाहिए।
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'80 फीसदी संसाधनों पर कब्जा चाहते हैं 4% लोग'
उन्होंने यह भी कहा कि केवल चार फीसदी लोग 80 फीसदी संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं और लाठी का इस्तेमाल कर यह विकास लोगों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। जो लोग तकनीकी विकास की वकालत करते हैं, वे केवल चार फीसदी लोग हैं। लेकिन उन्हें 80 फीसदी संसाधनों की जरूरत होती है और उन संसोधनों को पाने के लिए वे कई लोगों पर दबाव डालते हैं। विकास के लिए लोग बहुत मेहनत करते हैं और दिल से काम करते हैं। लेकिन उन प्रयासों का फल बहुत कम लोग ही पाते हैं।
संबंधित वीडियो-
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'हर क्षेत्र में अग्रणी था भारत'
भागवत ने कहा, अगर हम 1ईस्वी से लेकर 16वीं सदी तक की बात करें, तो भारत हर क्षेत्र में अग्रणी था। हमने पहले ही कई चीजों की खोज कर ली थी। लेकिन फिर हम रुक गए और इसी वजह से हमारा पतन शुरू हो गया। उदाहरण के तौर पर भारत में खेती 10 हजार वर्षों से हो रही है। लेकिन कभी भी मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण की समस्या नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो इन समस्याओं ने 500-600 वर्षों में सिर उठाया। इसका मतलब कही न कहीं हमारे दृष्टिकोण में कमी थी, जिसके कारण एकतरफा विकास हुआ। भारत में विकास को समग्र रूप से किया जाना चाहिए।
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'विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ करना जरूरी'
भागवत ने आज गुरुग्राम के एसजीटी विश्वविद्यालय में एक सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस सम्मेलन का शीर्षक 'विकसित भारत के लिए दृष्टिकोण-2024' रखा गया था। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी बताया कि आजकल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बहस हो रही है। लेकिन दोनों को एक साथ करना जरूरी है। उन्होंने कहा, आजकल यह बहस हो रही है कि हमें विकास करना चाहिए या पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए, जैसे हमें एक चुनना हो। लेकिन यह सवाल नहीं है कि मानव जीवन में हमें एक को चुनना है। बल्कि हमें दोनों को साथ करना चाहिए।
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'80 फीसदी संसाधनों पर कब्जा चाहते हैं 4% लोग'
उन्होंने यह भी कहा कि केवल चार फीसदी लोग 80 फीसदी संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं और लाठी का इस्तेमाल कर यह विकास लोगों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। जो लोग तकनीकी विकास की वकालत करते हैं, वे केवल चार फीसदी लोग हैं। लेकिन उन्हें 80 फीसदी संसाधनों की जरूरत होती है और उन संसोधनों को पाने के लिए वे कई लोगों पर दबाव डालते हैं। विकास के लिए लोग बहुत मेहनत करते हैं और दिल से काम करते हैं। लेकिन उन प्रयासों का फल बहुत कम लोग ही पाते हैं।
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