नेपाल से बड़ी कूटनीतिक सफलता लेकर लौट रहे हैं विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला
- पड़ोसी देश से बनेगा रिश्तों का तालमेल
- कोविड-19 के सख्त समय में भी मिला उम्मीद से अधिक सम्मान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला नेपाल से बड़ी कूटनीतिक सफलता लेकर भारत लौट रहे हैं। उम्मीद है कि कुछ महीने पहले तक भारत के साथ कड़वा संकेत देने वाले नेपाल के साथ रिश्तों की गाड़ी पटरी पर आने की शुरुआत हो जाएगी। बताते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने पिछले कुछ महीनों के दौरान इस रोडमैप को तेजी से आगे बढ़ाया। अब उसका नतीजा आ रहा है।
2020 में नेपाल के साथ पहल
इससे पहले 15 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री मोदी और पीएम केपी शर्मा ओली के बीच में सार्क देशों के शिखर नेताओं की चर्चा के दौरान बात हुई थी। 20 मार्च को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच में कोविड-19 संक्रमण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी और पीएम ओली ने फोन पर बात की थी। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ओली ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन करके 74वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना दी थी। 04-6 नवंबर को सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे नेपाल की यात्रा पर था और परंपरागत तरीके से अच्छा सम्मान लेकर लौटे थे। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख भी नेपाल की यात्रा से लौटे हैं।
मई-जून 2020 में बढ़ गई थी तल्खी
मई-जून के महीने में भारत और नेपाल के बीच में तल्खी अचानक काफी बढ़ गई थी। नेपाल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नेपाल की सीमा तक जाने वाली सड़क के उद्घाटन के सीमा विवाद को लेकर कड़ी आपत्ति जतानी शुरू कर दी थी। लिम्पियुधारा, कालापानी का मुद्दा भी उठा और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बोल ने कूटनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी थी। यहां तक नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहल उर्फ प्रचंड और प्रधानमंत्री ओली के बीच में भी स्थितियों को लेकर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी। जटिताओं को देखते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद, विदेश समेत तमाम क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे पर अच्छी पकड़ रखने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करके केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए विदेश नीति के समीक्षा का सवाल उठा दिया था। पूर्व विदेश सचिव शशांक ने भी नेपाल के साथ रिश्ते को लेकर अमर उजाला से बातचीत में गहरी चिंता व्यक्त की थी।
कोविड-19 का सख्त समय है, विदेश सचिव के दौरे मंत्रालय को नहीं थी ज्यादा उम्मीद
विदेश सचिव को 26 नवंबर को नेपाल पहुंचना था। इसके कुछ दिन पहले तक विदेश मंत्रालय को खास उम्मीद नहीं थी। सूत्रों की माने तो बहुत कुछ लाइन-अप नहीं हो सका था। ऐसे में संभावना थी कि विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला की वार्ता अपने समकक्ष और नेपाल के विदेश सचिव समेत वहां के कुछ अधिकारियों से हो सकेगी। चर्चा के केंद्र में कोविड-19 संक्रमण और इसके बाबत उपाय, सहयोग समेत कुछ मुद्दे रह सकते हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात को लेकर लोग बहुत मुतमईन नहीं थे।
कूटनीति के माहिर खिलाड़ी हैं हर्ष वर्धन श्रृंगला
57 साल के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला कूटनीति के माहिर माहिर हैं। 29 जनवरी 2020 को पूर्व विदेश सचिव विजय केशव गोखले का स्थान लेने वाले श्रृंगला इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत थे। बताते हैं कि अमेरिका में राजदूत रहते हुए श्रृंगला ने न केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से बेहतर तालमेल और रोड मैप तैयार कराने में सहायता की, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देने में सफल रहे।
विदेश सचिव बनने के बाद भी क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय तमाम चुनौतियों से तालमेल बनाकर उसे साधने में जुटे हैं। यह एक संयोग है कि 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को विदेश मंत्री के रूप में मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया है। कूटनीति के गलियारे में माना जाता है कि इसे विदेश नीति को प्रभावी बनाने में काफी बल मिला है।
सूटकेस में बड़ी सफलता लेकर लौट रहे हैं श्रृंगला
श्रृंगला ने नेपाल को भारत का सबसे अहम दोस्त और विकास का साझीदार बताया है। उन्होंने कोविड-19 की वैक्सीन आते ही नेपाल को वरीयता के आधार पर इसे उपलब्ध कराने का वादा किया है। नेपाल के विदेश सचिव भारत राज पौडियाल के निमंत्रण पर नेपाल पहुंचे श्रृंगला समकक्ष से बातचीत में सीमा पर जल्द बाड़ लगाने के कार्य पर सहमति जताई है।
उन्होंने नेपाल में सीमा से जुड़े से लेकर अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। सबसे अहम रहा कि नेपाल ने भारतीय विदेश सचिव का भरपूर सम्मान किया। वह प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की। उन्होंने नेपाल में बौद्ध मठ का उद्घाटन दिया। कुल मिलाकर कहने का अर्थ है कि भारत और नेपाल के बीच तालमेल, सामंजस्य, सद्भाव बढऩे की अच्छी खबर लेकर वह भारत लौट रहे हैं। इसे एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।