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India-Egypt: भारत-मिस्र ने विदेश कार्यालय परामर्श के 12वें दौर का किया आयोजन, द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की
Thu, 04 May 2023 03:27 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 04 May 2023 03:27 AM IST
सार
दोनों देशों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। जिसमें जलवायु परिवर्तन, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और भारत की G20 प्रेसीडेंसी के तहत ग्लोबल साउथ की भागीदारी शामिल है।
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भारत और मिस्र ने विदेश कार्यालय परामर्श के 12वें दौर का किया आयोजन
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत और मिस्र ने बुधवार को काहिरा में विदेश कार्यालय परामर्श के बारहवें दौर का आयोजन किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनीति, व्यापार और वाणिज्य को कवर करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीवी और ओआईए सचिव औसाफ सईद ने किया। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिस्र के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री अयमान कामेल ने किया। दोनों पक्षों ने भारत और मिस्र के बीच संबंधों को और मजबूत करने के अलावा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। जिसमें जलवायु परिवर्तन, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और भारत की G20 प्रेसीडेंसी के तहत ग्लोबल साउथ की भागीदारी शामिल है।
भारतीय सदस्यों से भी की चर्चा
औसाफ सईद ने राजदूत खालिद एल मंजलावी और सहायक महासचिव लीग ऑफ अरब स्टेट्स से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत और अरब ने दुनिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की। मिशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सचिव ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। दोनों पक्ष नई दिल्ली में पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि पर परामर्श के अगले दौर को आयोजित करने पर सहमत हुए।
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विश्व की दो सबसे पुरानी सभ्यताओं भारत और मिस्र का प्राचीन काल से निकट संपर्क का इतिहास रहा है। भारत ने आजादी के बाद से ही मिस्र से घनिष्ठ संबंध का आनंद लिया। क्योंकि दोनों देश 1950 के दशक में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सह-संस्थापक थे। यहां तक कि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने भारत के 74वें गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। वह मिस्र के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्हें गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया गया था। पहली बार जनवरी 2023 में भारत-मिस्र ने संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास साइक्लोन आयोजित किया।
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भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीवी और ओआईए सचिव औसाफ सईद ने किया। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिस्र के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री अयमान कामेल ने किया। दोनों पक्षों ने भारत और मिस्र के बीच संबंधों को और मजबूत करने के अलावा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। जिसमें जलवायु परिवर्तन, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और भारत की G20 प्रेसीडेंसी के तहत ग्लोबल साउथ की भागीदारी शामिल है।
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भारतीय सदस्यों से भी की चर्चा
औसाफ सईद ने राजदूत खालिद एल मंजलावी और सहायक महासचिव लीग ऑफ अरब स्टेट्स से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत और अरब ने दुनिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की। मिशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सचिव ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। दोनों पक्ष नई दिल्ली में पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि पर परामर्श के अगले दौर को आयोजित करने पर सहमत हुए।
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विश्व की दो सबसे पुरानी सभ्यताओं भारत और मिस्र का प्राचीन काल से निकट संपर्क का इतिहास रहा है। भारत ने आजादी के बाद से ही मिस्र से घनिष्ठ संबंध का आनंद लिया। क्योंकि दोनों देश 1950 के दशक में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सह-संस्थापक थे। यहां तक कि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने भारत के 74वें गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। वह मिस्र के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्हें गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया गया था। पहली बार जनवरी 2023 में भारत-मिस्र ने संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास साइक्लोन आयोजित किया।