DRDO की बड़ी कामयाबी: भारत की हवाई सुरक्षा को नया कवच, आकाश-एनजी मिसाइल तैयार; जानें क्यों है खास
भारत ने आकाश-एनजी एयर डिफेंस मिसाइल के यूज़र ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इससे यह मिसाइल अब सेना और वायुसेना में शामिल होने के लिए तैयार है। साथ ही डीआरडीओ ने लड़ाकू विमान के एस्केप सिस्टम का हाई-स्पीड टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया। आइए जानते हैं कि इस मिसाइल में क्या खासियत है?
विस्तार
भारत ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। आकाश नेक्स्ट जेनरेशन यानी आकाश-एनजी एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के यूज़र ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। इन परीक्षणों के सफल रहने के बाद यह साफ हो गया है कि यह मिसाइल प्रणाली अब भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आकाश-एनजी, मौजूदा आकाश मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है। इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। यह मिसाइल दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों को बेहद सटीकता से मार गिराने में सक्षम है। इसकी रेंज, गति और प्रतिक्रिया क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बेहतर है, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी।
#WATCH | India has carried out the successful user evaluation trials of the Akash Next Generation air defence missile system.
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(Source: Defence officials) pic.twitter.com/TMxGRDRXad — ANI (@ANI) December 23, 2025
यूजर ट्रायल में क्या हुआ?
यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का मतलब है कि जिस सिस्टम को सेना इस्तेमाल करेगी, वही खुद उसकी क्षमता को परखती है। इन परीक्षणों में आकाश-एनजी ने तय सभी मानकों पर खरा उतरते हुए लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा। इन ट्रायल्स से यह साबित हुआ कि सिस्टम हर मौसम और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने में सक्षम है। इसके बाद इसे सेना और वायुसेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है।
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डीआरडीओ की एक और बड़ी उपलब्धि
इसी महीने डीआरडीओ ने एक और अहम परीक्षण सफलतापूर्वक किया। लड़ाकू विमान के पायलटों के लिए बनाए गए एस्केप सिस्टम का हाई-स्पीड रॉकेट स्लेज टेस्ट किया गया। यह परीक्षण 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चंडीगढ़ स्थित टीबीआरएल केंद्र में हुआ, जिसमें पायलट की सुरक्षित निकासी से जुड़े सभी अहम मानक पूरे हुए।
क्यों खास है यह एस्केप सिस्टम टेस्ट?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करता है, जिनके पास अत्याधुनिक एस्केप सिस्टम की स्वदेशी टेस्टिंग क्षमता है। यह डायनामिक इजेक्शन टेस्ट था, जो सामान्य स्थिर परीक्षणों से कहीं ज्यादा जटिल होता है। इसमें एलसीए विमान के अगले हिस्से के साथ ड्यूल-स्लेज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और डमी पायलट के जरिए सभी दबाव, झटके और सुरक्षा मानकों को रिकॉर्ड किया गया।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
आकाश-एनजी मिसाइल और फाइटर एयरक्राफ्ट एस्केप सिस्टम जैसे परीक्षण यह दिखाते हैं कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। विदेशी तकनीक पर निर्भरता घट रही है और स्वदेशी सिस्टम न सिर्फ विकसित हो रहे हैं, बल्कि सफलतापूर्वक सेना की जरूरतों पर खरे भी उतर रहे हैं। आने वाले समय में इससे भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।