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Pneumonia: निमोनिया संक्रमण को खत्म करने के लिए भारत ने बनाई पहली एंटीबायोटिक; वयस्कों में इस्तेमाल की सिफारिश

Wed, 20 Nov 2024 09:01 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 20 Nov 2024 09:01 AM IST
सार

निमोनिया संक्रमण को खत्म करने के लिए भारत ने पहली एंटीबायोटिक बनाई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने वयस्कों में इस्तेमाल की सिफारिश की है।

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India develops first antibiotic to cure pneumonia infection cdsco recommends use in adults
भारत में निमोनिया के इलाज से जुड़ी अच्छी खबर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लंबे समय के बाद भारत ने समुदाय-अधिग्रहित बैक्टीरियल निमोनिया (सीएबीपी) नामक संक्रमण का तोड़ खोज निकाला है। वैज्ञानिकों ने पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक दवा तैयार की है, जिसकी तीन दिन में तीन अलग-अलग खुराक से संक्रमण कम किया जा सकता है। इस दवा के क्लिनिकल परीक्षण परिणामों की समीक्षा के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने वयस्कों में इस्तेमाल की सिफारिश की है।
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इस दवा पर 15 वर्षों में कई नैदानिक परीक्षण किए गए
केंद्र के सूत्रों ने बताया कि बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आधिकारिक तौर पर भारत की इस सफलता को सार्वजनिक कर सकते हैं। इस एंटीबायोटिक दवा तैयार की है जिसे मिकनाफ (नेफिथ्रोमाइसिन) नाम दिया है। यह दवा सीएबीपी रोगियों के लिए दिन में एक बार, तीन दिन तक दी जा सकती है। यह पहला उपचार है, जिसमें मल्टी-ड्रग प्रतिरोधी (एमडीआर) संक्रमण वाले मरीज भी शामिल हैं। इस दवा पर 15 वर्षों में कई नैदानिक परीक्षण किए गए हैं। इनमें अमेरिका और यूरोप में हुए पहले व दूसरे चरण के परीक्षण भी शामिल हैं। भारत में इस दवा ने हाल ही में तीसरा चरण पूरा किया था। 
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हर वर्ष लाखों बुजुर्गों की होती है मौत
केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह यह दवा इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि सीएबीपी के कारण हर साल लाखों की संख्या में बुजुर्ग मरीजों की मौत हो रही है। अगर वैश्विक स्तर पर बात करें तो सीएबीपी से सालाना दुनियाभर में मरने वालों में 23 फीसदी हिस्सा भारत का है। इसकी मृत्यु दर 14 से 30% के बीच है।
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