कोरोना ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता के जोखिम को उजागर किया : पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन के साथ डिजिटल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अति निर्भरता से जुड़े जोखिम को उजागर किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ काम कर रहा है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लायी जा सके। उन्होंने कहा कि इस पहल में शामिल होने के लिए समान विचारधारा वाले देशों का स्वागत है।
मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपने शुरुआती संबोधन में यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने देशों के लिए आवश्यक बना दिया कि वे मिल कर काम करने के लिए पारदर्शिता, लोकतांत्रिक मूल्य प्रणाली और नियमों पर आधारित आदेश पर भरोसा करें।
प्रधानमंत्री ने किसी भी देश या स्रोत का नाम लिए बिना कहा कि महामारी ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिम को उजागर कर दिया है। पीएम मोदी ने सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ ही कृषि, कराधान और श्रम बाजार जैसे क्षेत्रों के विभिन्न सुधार उपायों को भी रेखांकित किया।
पीएम मोदी ने कहा कि हम (आत्मनिर्भर भारत) पहल के तहत चौतरफा सुधारों पर ध्यान दे रहे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में काम करने वाली कंपनियों को विनियामक और कराधान सुधारों से लाभ होगा।
डेनमार्क उत्तरी यूरोप का एक प्रमुख देश है जिसके साथ पिछले कुछ वर्षों में भारत के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत और डेनमार्क के बीच 2016 से 2019 के बीच वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में 30.49 प्रतिशत की वृद्धि हुयी तथा व्यापार का आकार 2.82 अरब डॉलर से बढ़कर 3.68 अरब डॉलर हो गया।
डेनमार्क की करीब 200 कंपनियों ने भारत में जहाजरानी, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डेनमार्क की प्रमुख कंपनियों में करीब 5,000 भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं वहीं 20 भारतीय आईटी कंपनियां दशकों से डेनमार्क में काम कर रही हैं।
ग्रंडफोस, डैनफॉस, वेस्टास, एलएम विंड, नोवोजीम्स, रॉकवूल, हल्डोर टोपसो जैसी प्रमुख डेनिश कंपनियों ने 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत भारत में कारखानों और विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की है। डेनमार्क की पीएम को दी शादी की शुभकामनाएं
डेनमार्क की प्रधानमंत्री से बात करते समय पीएम मोदी ने उन्हें विवाह की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने कहा, 'मैं आपको आपके विवाह के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि कोविड-19 की स्थिति सामान्य होने के बाद हमें आपका और आपके परिवार का भारत में स्वागत करने का मौका मिलेगा।'
Thank you so much for the greetings to my family. My daughter will love to visit India once again and same goes for my family: Denmark PM Mette Frederiksen https://t.co/UHYaJnOkJw
— ANI (@ANI) September 28, 2020
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, 'मुझे विश्वास है कि आपकी बेटी दोबारा भारत आने के लिए उत्साहित होगी।' इसके जवाब में डेनमार्क की प्रधानमंत्री फेडरिक्सेन ने कहा, 'शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरी बेटी दोबारा भारत आना बिल्कुल पसंद करेगी और मेरा परिवार के साथ भी ऐसा ही है।'
बौद्धिक संपदा अधिकारों पर सहयोग बढ़ाएंगे डेनमार्क और भारत
इससे पहले शनिवार को भारत और डेनमार्क ने बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) शुरू किया था। इसके तहत दोनों पक्ष एमओयू को लागू करने के लिए एक द्विवार्षिक कार्य योजना तैयार करेंगे, जिसमें सहयोग गतिविधियों को पूरा करने की विस्तृत योजना शामिल होगी।
एमओयू का उद्देश्य अधिकारियों, व्यवसायों और अनुसंधान तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच आईपी जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रथाओं, अनुभवों व ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के बीच आईपी सहयोग को बढ़ाना होगा। इसके साथ ही इस एमओयू का लक्ष्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान और आउटरीच गतिविधियों में सहयोग को बढ़ाना है।
बेहतर हुए हैं भारत और डेनमार्क के द्विपक्षीय संबंध
उत्तरी यूरोप में डेनमार्क के साथ पिछले कुछ वर्षों में भारत के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का विस्तार हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत और डेनमार्क के बीच वस्तु और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार 2016 और 2019 के बीच 30.49 प्रतिशत बढ़ा और यह 2.82 अरब डॉलर से 3.68 अरब डॉलर हो गया।
डेनमार्क की करीब 200 कंपनियों ने भारत में जहाजरानी, नवीन ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि डेनमार्क में सूचना-प्रौद्योगिकी, नवीन ऊर्जा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में करीब 25 भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं।