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चीन के साथ पांचवें स्तर की वार्ता में भारत की दो टूक, क्षेत्रीय अखंडता के साथ समझौता नहीं

Mon, 03 Aug 2020 10:59 PM IST
Rajeev Rai पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 03 Aug 2020 10:59 PM IST
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India cleared stand in fifth level talks with China, no compromise with territorial integrity
भारत-चीन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर पांचवे दौर की वार्ता पूरी हुई। दोनों देशों के बीच हुई कमांडर स्तर की वार्ता में भारतीय सेना ने चीनी सेना को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह देश की क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। इसके अलावा भारत ने कहा कि पैंगोंग त्सो तथा पूर्वी लद्दाख में विवाद के कुछ अन्य स्थानों से सैनिकों की वापसी जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए। 

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दोनों देशों की सेनाओं के वरिष्ठ कमांडरों ने रविवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की तरफ मोल्दो में लगभग 11 घंटे तक वार्ता की।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में चीनी पक्ष को बताया कि दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए पूर्वी लद्दाख के सभी क्षेत्रों में विवाद शुरू होने से पहले की यथास्थिति की बहाली आवश्यक है और बीजिंग को विवाद के बाकी बिन्दुओं से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि भारतीय सेना देश की क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
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रविवार की वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14 कोर के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व दक्षिणी शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर, मेजर जनरल लियू लिन ने किया। इससे पहले, कोर कमांडर स्तर की पिछली वार्ता 14 जुलाई को हुई थी, जो करीब 15 घंटे तक चली थी।
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बातचीत में, भारतीय पक्ष ने चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को बहुत स्पष्ट संदेश दिया कि पूर्वी लद्दाख में पहले की स्थिति बरकरार रखी जाई और उसे इलाके में शांति बहाल करने के लिए सीमा प्रबंधन के संबंध में उन सभी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा, जिन पर परस्पर सहमति बनी है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को उसकी सीमा (लक्ष्मण रेखा) से अवगत कराया था और कहा था कि क्षेत्र में पूरी स्थिति में सुधार लाने की जिम्मेदारी मुख्यत: चीन पर है।


वार्ता के बाद सेना ने कहा कि दोनों पक्ष सैनिकों के पूरी तरह से पीछे हटने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। साथ ही कहा था कि प्रक्रिया जटिल है और इसके लगातार प्रमाणीकरण की जरूरत होगी।
 

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