सीमा विवाद: कथनी और करनी के मामले में चीन का दागदार इतिहास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीन की कथनी और करनी में अंतर का लंबा इतिहास रहा है। चाहे साल 1962 का युद्ध हो या फिर उसके बाद का लगभग छह दशक का लंबा समय। इस दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर चीन हमेशा अपनी भूमिका में बदलाव करता रहा है।
वर्ष 1962 में युद्ध से पहले चीन ने लगातार बातचीत के जरिये सीमा विवाद सुलझाने की बात करता रहा। मगर नवंबर मेंं अचानक बिना चेतावनी के हमला बोल दिया। इस हमले में चीन ने भारतीय भूभाग पर अपने दावे से भी ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया।
यह भी पढ़ें: रक्षा-सैन्य विशेषज्ञों की राय: तनाव और बढ़ाएगा मगर युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है चीन
उसके बाद एलएसी पर विवाद बनाए रखने के लिए लगातार अनर्गल बातें करता रहा। जहां तक इस युद्ध की बात है तो 1913 में ही भारत और तिब्बत के बीच सीमा को ले कर सहमति बनी थी। इस सहमति के आधार पर तैयार मैकमोहन लाइन पर दोनों देशों ने सहमति दी थी।
हालांकि भारत की आजादी के बाद चीन ने पहले तिब्बत पर कब्जा किया। फिर भारतीय भूभाग पर दावा जताना शुरू किया। हमले से पहले चीन ने जिन इलाकों पर अपना दावा बताया, लद्दाख क्षेत्र में उससे भी अधिक भूभाग पर कब्जा कर लिया।
हर मोड़ पर दोहरा रवैया
- दोकलम विवाद: दोकलम जो भूटान का हिस्सा है, वहां चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की। समझौते के मुताबिक चीन को इस क्षेत्र में सड़क बनाने का हक नही था। वह महज भारत पर सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए ऐसा कर रहा था। हालांकि भारत के हस्तक्षेप और कड़े रुख के बाद चीन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
- चीन दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की बात करता रहा है। मगर उसे भारत द्वारा अपने हिस्से में एलएसी तक रोड सहित अन्य निर्माण कार्यों पर आपत्ति है। जबकि चीन एलएसी की दूसरी तरह पहले ही हर तरह के निर्माण कार्य कर चुका है।
- सीमा विवाद पर चीन हमेशा अलग-अलग हिस्सोंं पर अपना दावा जताता रहा है। इस बार भारत ने विवादित हिस्सों पर उसके दावों को जब आधिकारिक तौर पर दर्ज कराने की मांग की तो चीन मुकर गया।
- गलवां घाटी में सोमवार को भी दोनों देशों में सैन्य स्तर पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत में भी यह पहल जारी रखने पर सहमति बनी थी। इसके बाद अचानक चीन ने भारतीय जवानोंं पर हमला बोला।
- चीन आधिकारिक तौर पर परमाणु अप्रसार नीति का हिमायती रहा है। मगर भारत को घेरने के लिए उसी ने पाकिस्तान को परमाणु संपन्न देश बनाया।
- चीन दूसरे देशों के मामलों में दखल न देने का दावा करता रहा है। मगर हाल के कुछ वर्षों में उसने सिर्फ भारत को घेरने के लिए पड़ोसी देशों को उकसाया। नेपाल चीन की शह पर भारतीय भूभाग पर दावा जता रहा है। मालदीव, श्रीलंका, बांग्लादेश को भी भारत के खिलाफ खड़ा करने के लिए चीन लगातार कोशिशें कर रहा है।
यह भी पढ़ें: सामरिक रिश्तों पर विश्लेषण: गलवां घाटी पर चीन के नापाक इरादों से हालात हुए बेहद खराब
यह भी पढ़ें: गलवां घाटी: भारत-चीन के बीच 14000 फीट ऊंचाई पर तनाव, जानें 10 खास बातें