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एस जयशंकर ने चीन की दुखती रग पर रखा हाथ, कहा- क्षेत्रीय अखंडता का करें सम्मान

Sun, 15 Nov 2020 09:27 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 15 Nov 2020 09:27 AM IST
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india china standoff jaishankar gave clear message to beijing respect regional integrity and international laws
विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी दादागिरी दिखाता रहता है। इसे लेकर भारत ने उसे इशारों-इशारों में कड़ा संदेश दिया है। भारत ने शनिवार को दक्षिण चीन सागर में विश्वास को नष्ट करने वाले कदमों और घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। इसके अलावा भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान के महत्व पर जोर दिया।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को 15वीं पूर्वी एशिया शिखर बैठक (ईएएस) को संबोधित किया और इसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बारे में बात की। जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए हाल ही में कई देशों की ओर से घोषित नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर प्रतिबद्धता हो तो विभिन्न दृष्टिकोण का समायोजन रखना कभी चुनौतीपूर्ण नहीं होगा।
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इस डिजिटल शिखर बैठक की अध्यक्षता वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने बतौर आसियान प्रमुख की। ईएएस के सभी सदस्य देश इसमें शामिल हुए। इस समूह में आसियान के 10 देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और रूस शामिल हैं।
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यह भी पढ़ें- प्रधानमंत्री मोदी की पाकिस्तान-चीन को चेतावनी, भारत को आजमाया तो मिलेगा ‘प्रचंड जवाब’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईएएस के महत्व को दोहराया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनुपालना, क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान करने और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया।


उन्होंने चीन की दक्षिणी चीन सागर में जारी दादागिरी को लेकर टिप्पणी उस समय की है जब चीन और भारत के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सीमा पर गतिरोध चल रहा है तथा दक्षिणी चीन सागर एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी बीजिंग का विस्तारवादी रवैया देखने को मिल रहा है।

जयशंकर ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए भारत में उठाए गए कदमों के बारे में भी इस शिखर बैठक को सूचित किया। उन्होंने व्यापक पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया ताकि आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महामारी आदि से भविष्य में निपटा जा सके। इस सम्मेलन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमूमन शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री शामिल होते रहे हैं।

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