विशेषज्ञ की राय: रणनीतिक धोखेबाजी की नीति पर ड्रैगन, भारत की मजबूत पकड़ से बौखलाया है चीन
- गलवां घाटी में सड़क कुछ ऐसे प्वाइंट से गुजरती है जहां से भारत तिब्बत पर पैनी नजर रख सकता है
- पिछले वर्ष इस हवाई पट्टी को मजबूत कर इस पर वायु सेना का सबसे बड़ा मालवाहक जहाज ग्लोबमास्टर उतारा गया
विस्तार
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले 17 वर्ष में भारत ने श्योक गांव से गलवां घाटी होते हुए दौलत बेग ओल्डी हवाई अड्डे तक 215 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई है। सड़क अक्साई चिन की सीमा से सटी है। गलवां घाटी में सड़क कुछ ऐसे प्वाइंट से गुजरती है जहां से भारत तिब्बत पर नजर रख सकता है। यही बात चीन को पसंद नहीं आ रही। दरअसल 1962 के युद्ध के दौरान सियाचिन के ठीक नीचे बनाई दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी से चीन भयभीत है। यह एयर स्ट्रिप लगभग 46 साल बंद रही।
मई 2008 में तत्कालीन वाइस एयर मार्शल प्रणव कुमार बारबोरा ने एक मालवाहक हवाई जहाज को इस कच्ची हवाई पट्टी पर उतारा था। पिछले वर्ष इस हवाई पट्टी को मजबूत कर इस पर वायु सेना का सबसे बड़ा मालवाहक जहाज ग्लोबमास्टर उतारा गया। तब से चीन खतरा महसूस कर रहा है। भारत पिछले कुछ सालों में पूर्वी लद्दाख में चार हवाई पट्टी और 66 सड़कें बना रहा है। इनमें अधिकतर लगभग तैयार हैं। इन पर लड़ाकू विमान भी उतर सकते हैं। चीन इसे अपने लिए खतरा मान रहा है।
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1967 में आखिरी बार हुई थी जंग
भारत और चीन के बीच आखिरी लड़ाई 1967 सिक्किम में हुई थी। इससे पहले 1962 के बाद भारत इस इलाके में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा था। 1967 की लड़ाई में भारत के 80 जवान शहीद हुए थे जबकि चीन के करीब 400 सैनिक मारे गए थे। हालांकि एलएसी पर आखिरी बार 1975 में चीन ने घात लगाकर भारतीय सैनिकों पर हमला किया था। उसके बाद से दोनों देश की सीमा लगभग शांत ही रही।
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रणनीतिक धोखेबाजी की नीति पर ड्रैगन
चीन यह अच्छे से समझ ले कि भारत अब 1962 वाला भारत नहीं है। हम आज चीन की आंखों में आंखें डालकर देखने में सक्षम हैं। जहां तक जंग के आदेश की बात है तो यह निर्णय सरकार को लेना होगा। चीन का इतना आक्रामक रुख काफी सालों बाद देखने को मिला है। चीन की ओर से दिए गए बयानों पर भरोसा नहीं कर सकते। इस मामले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वह रणनीतिक धोखेबाजी की अपनी नीति पर ही चल रहा है। झूठ बोलना चीन के डीएनए में शामिल है। स्थिति चुनौतीपूर्ण हैं और ऐसे में कोई भी कार्रवाई बहुत सोच विचारकर की जाती है। (जनरल बिक्रम सिंह पूर्व सेनाध्यक्ष )