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सातवें दौर की वार्ता के बाद भारत-चीन ने एक-दूसरे को दिया सैनिकों की वापसी का प्रस्ताव
Fri, 16 Oct 2020 09:31 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 16 Oct 2020 09:31 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेना के कमांडर स्तर पर हुईं सात बैठकों के बाद अब दोनों देश सेना वापसी को लेकर एक गंभीर प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं, जिस पर केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी विचार-विमर्श कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो भारत व्यापक विघटन पर जोर दे सकता है।
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गुरुवार को ऑनलाइन कॉनक्लेव संबोधित करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात का इशारा दिया था। उन्होंने कहा था कि अभी दोनों देशों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है और जो कुछ भी चल रहा है वो भारत और चीन के बीच गोपनीय है।एस जयशंकर ने सीमा पर साफ स्थिति बताने वाले सवाल पर यह जवाब दिया था।
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विदेश मंत्री ने आगे कहा कि मैं अभी इस बात को सार्वजनिक मंच पर नहीं कह सकता, मैं निश्चित तौर पर इस बात का पूर्वानुमान नहीं लगा सकता। छठे दौर की बैठक में सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय के अधिकारी नवीन श्रीवास्तव को सीमा पर बातचीत करने के लिए भेजा गया था और सातवीं बैठक में चीनी विदेश मंत्री ने भी अपने प्रतिनिधि को भेजा था।
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आखिरी बैठक के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया था कि बैठक में हुई बातचीत सकारात्मक और निर्णायक रही। आगे कहा गया कि ऐसा दूसरी बार है जब दोनों देशों की ओर से एक साझा बयान जारी किया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दूसरी बार है जब दोनों देशों की ओर से एक साझा बयान जारी किया गया है।
बयान में कहा गया कि दोनों देश एक दूसरे की स्थिति को बखूबी समझते हैं। मंत्रालय ने कहा कि स्थान खाली करना एक मुश्किल प्रक्रिया है, इसमें दोनों देशों की ओर से सेना की दोबारा तैनाती की जरूरत पड़ती है ताकि अपनी ओर एलएसी पर सामान्य स्थिति स्थापित की जा सके। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि सीमा पर सेना की वापसी की प्रक्रिया कैसे की जाएगी।