फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   india china conflict in ladakh india china relations india china face off at border what is line of actual control india china lac issue line of actual control in arunachal pradesh line of actual control length

45 वर्षों बाद एलएसी पर फिर खूनी संघर्ष, भारत-चीन तनाव की क्या है वजहें, जानें सबकुछ

Thu, 15 Oct 2020 11:55 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 15 Oct 2020 11:55 AM IST
सार

  • भारत के पड़ोसी चीन का झगड़ सिर्फ भारत के साथ ही नहीं बल्कि अन्य 15 देशों के साथ भी वह सीमा विवाद में उलझा हुआ है। 
  • प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ 2013 में हुए समझौते और नेहरू के साथ 1954 के पंचशील समझौते सहित भारत और चीन के बीच सात प्रमुख समझौते हो चुके हैं। 
  • फिर भी भारत-चीन के बीच सीमा विवाद नहीं सुलझा पाया है और इस समय तनाव अपने चरम पर है। 

विज्ञापन
india china conflict in ladakh india china relations india china face off at border what is line of actual control india china lac issue line of actual control in arunachal pradesh line of actual control length
गश्त पर निकले भारतीय सेना के जवान। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

विस्तार

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बड़े नेता माओत्से तुंग ने नवंबर 1938 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की सेंट्रल कमेटी की एक बैठक में कहा था कि 'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है।' इसके बाद चीनी कम्युनिस्ट क्रांति में यह नारा मूल मंत्र बना। 

विज्ञापन


कहा जाता है कि 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया तो यह केवल हिमालय के किसी क्षेत्र पर नियंत्रण या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बदलने के लिए नहीं था बल्कि यह सभ्यता की जंग थी। 
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन



भारत और चीन के रिश्ते में एक बार फिर तनाव है। दोनों देशों के बीच यह तनाव जून के महीने में उस समय चरम पर पहुंच गया, जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई। 

लेकिन भारत और चीन के संबंध में तनाव की जड़ क्या है। माओ ने अपने देश में क्रांति और सत्ता पर काबिज होने के लिए बंदूक का सहारा लिया, क्या चीन ने इसे अपने साम्राज्यवादी विस्तारवादी नीति का आधार बना लिया है? भारत के साथ चीन के संबंध में खटास कैसे आई? 

माओ ने 1949 में कम्युनिस्टों की जीत से पहले अंतरराष्ट्रीय संधियों को एकतरफा होने का आरोप लगाते हुए इसे खारिज कर दिया। भारत चीन के साथ लगी सीमा की ऐतिहासिकता को आधार बनाते हुए सही ठहराने में लगा रहा और चीन युद्ध की तैयारी कर रहा था। माओ ने मैकमोहन रेखा को औपनिवेशिक बताते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया। चीन यहां तक कि पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करने लगा।''

45 वर्षों बाद फिर हुआ खूनी संघर्ष
चीन के सैनिकों ने घात लगाकर 20 अक्तूबर 1975 को अरुणाचल प्रदेश के कुलुंग ला में असम राइफल की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर दिया था। चीन के इस हमले में भारतीय सेना के चार सैनिक शहीद हो गए थे। चीन की इस हरकत के 45 वर्षों बाद एक बार फिर से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ है। 

झगड़ालू चीन का सबसे झगड़ा
भारत के पड़ोसी चीन का झगड़ सिर्फ भारत के साथ ही नहीं बल्कि अन्य 15 देशों के साथ भी वह सीमा विवाद में उलझा हुआ है। एक तरह जहां जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, सिंगापुर, फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम, ताइवान, मलयेशिया, ब्रुनेई के साथ जल सीमा का विवाद चर रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत, म्यामार, भूटान, नेपाल और मंगोलिया में जमीनी सीमा को लेकर विवाद जारी है। 

भारत ने दी थी पीआरसी को मान्यता
भारत की आजादी के दो साल बाद माओ ने 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) का गठन किया था। भारत ने एक अप्रैल 1950 को पीआरसी को मान्यता दी और इसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाला भारत पहला गैर-कम्युनिस्ट देश था।   

इतना ही नहीं, 1954 में भारत ने तिब्बत पर चीन की दावेदारी को स्वीकार कर लिया और मान लिया कि तिब्बत चीन का हिस्सा है। इस दौर में हिन्दी-चीनी, भाई-भाई का नारा भी बहुत जोरशोर से लगा। चीन के पहले प्रधानमंत्री चाउ एन लाई ने जून 1954 से जनवरी 1957 के बीच चार बार भारत का दौरा किया। भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी अक्तूबर 1954 में चीन के दौर पर गए। तब दोनों देशों के बीच पंचशील समझौता हुआ। 

नेहरू के चीन दौरे को लेकर अमरीकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था, "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बनने के बाद किसी गैर-कम्युनिस्ट देश के किसी प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा है। एयरपोर्ट से शहर के बीच लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तक नेहरू के स्वागत में चीन के लोग ताली बजाते हुए खड़े थे।''

इसके बावजूद चीन ने 1962 में भारत पर हमला कर दिया। 

नेहरू से लेकर मोदी तक ने की कोशिश
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ 2013 में हुए समझौते और नेहरू के साथ 1954 के पंचशील समझौते सहित भारत और चीन के बीच सात प्रमुख समझौते हो चुके हैं। 

मौजूदा सरकार ने भी चीन के साथ संबंध बेहतर करने के लिए काफी प्रयास किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग पिछले छह वर्षों के दौरान 18 बार मुलाकात कर चुके हैं। इन दोनों की पहली मुलाकात 2014 में ब्राजील में हुई थी, जिसमें सीमा विवाद सुलझाने को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। 

भारत-चीन के बीच सीमा विवाद की तीन बड़ी वजहें

कितना पुराना है भारत-चीन सीमा विवाद
आखिर कितना पुराना है भारत-चीन सीमा विवाद। इतिहास के पन्ने पलटने पर पता चलता है कि चीन ने 1950 में तिब्बत पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद से ही चीन भारत का पड़ोसी कहलाने लगा। चीन के नियंत्रण के बाद 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक प्रमुख दलाई लामा ने कई अन्य शरणार्थियों सहित भारत से शरण मांगी और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गए।

इसके बाद चीन ने भारत पर तिब्बत और पूरे हिमालयी क्षेत्र में विस्तारवाद और साम्राज्यवाद के फैलाने का आरोप मढ़ दिया। कहा जाता है कि दोनों देशों के बीच विवाद की शुरुआत यहीं से हुई।

भारत और चीन की आपस से लगती सरहद की लंबाई 3,488 किलोमीटर है, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगी हुई है। इन्हीं राज्यों और उसके आस-पास के कई इलाकों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। 

क्या है एलएसी
वास्तविक नियंत्रण रेखा (लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी) एक तरह का सीमांकन है। यह भारत के अधिकार वाले इलाके और चीन के नियंत्रण वाले हिस्से को एक दूसरे से अलग करती है। भारत के मुताबिक एलएसी की लंबाई 3,488 किलोमीटर है। जबकि चीन एलएसी को सिर्फ 2,000 किलोमीटर लंबी मानता है। एलएसी पर कई ग्लेशियर, बर्फ के रेगिस्तान, पहाड़ और नदियां पड़ती हैं। 

ये हैं भारत-चीन के बीच सबसे विवादित जगहें 

गलवान घाटी
गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। यह विवादित क्षेत्र अक्साई चीन में है। यहां पर एलएसी अक्साई चीन को भारत से अलग करती है। यह घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली है। पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख की सीमा के साथ लगा हुआ है।

पैंगोंग त्सो झील
पैगोंग त्सो एक लंबी संकरी, गहरी झील है जो लद्दाख हिमालय में लगभग 14,000 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है। इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में पड़ता है जबकि 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में है। एलएसी इस झील के मध्य से गुजरती है। यह झील चुशूल घाटी के रास्ते में आती है। 1962 की लड़ाई के दौरान यही वो जगह थी जहां से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। 

डेप्सांग
डेप्सांग पूर्वी लद्दाख का मैदानी इलाका है। चीन सेना ने वर्ष 2013 में यहां घुसपैठ की थी। दोनों देशों की सेनाएं 25 दिनों तक आमने-सामने रही थीं। भारत और चीन के बीच एक बड़ा मुद्दा डेप्सांग घाटी इसलिए है क्योंकि भारतीय वायुसेना ने अप्रैल 2013 में गतिरोध के करीब चार महीने बाद वर्षों से बंद पड़ी 16,614 फीट की ऊंचाई पर अपनी हवाई पट्टी फिर से शुरू किया था। यहां से अक्साई चिन क्षेत्र लगभग 7 किमी दूर है। 

दोकलम
दोकलम एक पठार है और यह सिक्किम सीमा के नजदीक स्थित एक ट्राई-जंक्शन बिंदु है। यहां से चीन भी नजदीक है। दोकलम भूटान के हा घाटी, भारत के पूर्व सिक्किम जिला, और चीन के यदोंग काउंटी के बीच में है। दोकलम को दोनों भूटान और चीन अपना क्षेत्र मानते हैं। भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है। दोकलम भारत के लिए सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को देश से जोड़ने वाला 20 किलोमीटर चौड़ी कड़ी (चिकेंस नेक) पर चीन की पहुंच आसान हो जाएगी।

तवांग
तवांग अरुणाचल प्रदेश में एक क्षेत्र है जिसे चीन तिब्बत का हिस्सा मानता है। वर्ष 1914 में जब ब्रिटिश भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ था तब अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी हिस्से तवांग और दक्षिणी हिस्से को भारत का हिस्सा मान लिया गया था। लेकिन 1962 में भारत-चीन की लड़ाई जीतने के बाद चीन तवांग से पीछे हट गया। 

भारत-चीन के बीच ताजा विवाद
भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों पर हवाई फायरिंग का आरोप लगाया है। भारतीय ने कहा कि सात सितंबर को गलवान घाटी में चीन की सेना एलएसी पर भारत की एक मोर्च की तरफ बढ़ रही थी। जब भारतीय सेना ने उन्हें रोका तो चीनी सैनिकों ने हवा में गोलियां चलाई। वहीं चीन के मुताबिक एलएसी पर तैनात भारतीय सैनिकों ने एलएसी को पार किया और चीनी सीमा पर तैनात सैनिकों पर वार्निंग शॉट्स फायर किए।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सेना के एक प्रवक्ता के हवाले से लिखा कि हालात को स्थिर करने के लिए चीनी सैनिकों को मजबूरी में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इसके पहले भारतीय सेना ने 29 और 30 अगस्त की रात पैंगोंग लेक के साउथ बैंक क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा भड़काऊ सैन्य हरकत करने की बात कही थी। 

भारत-चीन के बीच हुए इतने समझौते
भारत और चीन के बीच 1954 के पंचशील समझौते सहित 1993 से 2013 के बीच सात समझौते हुए, जिनसे दोनों देशों के बीच शांति कायम रही। 1962 की लड़ाई से लेकर वर्ष 2013 तक भारत-चीन के बीच दो ही बड़ी घटनाएं हुई थी। 1967 में नाथुला और 1986 में समदोरांग।
  • 1988: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और चीन के बीच समझौते पर सहमति बनी। 
  • 1993: प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने चीन के प्रधानमंत्री ली पेंग के साथ सरहदी क्षेत्रों में एलओसी पर शांति और स्थिरता के लिए समझौते पर दस्तखत किए।
  • 1996: प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति जिआंग जेमिन के साथ एलएसी पर सैन्य क्षेत्र में भरोसा बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • 2003: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चीन दौरे पर सीमा विवाद हल करने के लिए विशेष प्रतिनिधिस्तर की व्यवस्था बनाई गई। 
  • 2005-13: तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकाल के दौरान भारत और चीन के बीच तीन समझौते हुए। 2013 में 'सीमा सुरक्षा सहयोग' आखिरी समझौता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed