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India-China Clash: सेना की इन तीन रेजीमेंट के जवानों ने दिखाया दम, 300 चीनी सैनिकों को भागने पर कर दिया मजबूर

Tue, 13 Dec 2022 10:04 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 13 Dec 2022 10:04 PM IST
सार

नौ दिसंबर को जब दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई तब चीनी सैनिक लाठियों और अन्य उपकरणों से लैस होकर आए थे। हालांकि भारतीय सैनिक भी सतर्क थे और किसी भी संघर्ष के लिए तैयार थे क्योंकि वे चीनियों के इरादों को जानते थे। भारतीय जवानों ने भी उन्हें जवाब देते हुए भागने पर मजबूर कर दिया।  

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India-China Clash: three Indian Army units involved in Yangtse face-off thwarted Chinese army aggression
गलवां में हुई थी भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़प। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई है। इसमें भारत के छह जवान घायल बताए जा रहे हैं, जबकि चीन के 19 से ज्यादा सैनिकों को गंभीर चोटें लगी हैं। इस बीच सामने आया है कि नौ दिसंबर को तवांग सेक्टर के यांग्त्से में चीनी सेना ने यह दुस्साहस दिखाया, तब भारतीय सेना की तीन रेजीमेंट ने उन्हें खदेड़ा। भले ही चीनी सैनिक लाठी डंडों और अन्य हथियारों से लैस होकर आए थे लेकिन हमारे बहादुर सैनिकों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया।  

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क्या हुआ था नौ दिसंबर को 
रिपोर्ट्स के मुताबिक नौ दिसंबर को 300 से ज्यादा चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में तवांग के यांग्त्से में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर भारतीय सीमा में घुसपैठ करने लगे। यहां भारतीय पोस्ट को हटाने के लिए चीनी सैनिक कंटीले लाठी डंडे और इलेक्ट्रिक बैटन लेकर आए थे। भारतीय सेना भी चीनी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद थी। जैसे ही चीनी सैनिकों ने हमला किया, भारतीय जवानों ने भी जोरदार जवाब देना शुरू कर दिया। सभी ने कंटीले लाठी-डंडों से चीनी सैनिकों को जवाब दिया। इसमें चीन के 19 से ज्यादा सैनिक बुरी तरह से घायल हो गए। कुछ की हड्डियां टूटी, तो कुछ के सिर फट गए। 
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जवाबी हमले के बाद भारतीय अफसरों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और चीनी सैनिक अपनी लोकेशन पर वापस चले गए। 11 दिसंबर को दोनों देशों के लोकल कमांडर ने शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए फ्लैग मीटिंग की और घटना के बारे में चर्चा की। दोनों देशों ने सीमा पर शांति व्यवस्था कायम रखने पर सहमति दी। भारत ने कूटनीतिक तौर पर भी इस मुद्दे को चीन के सामने उठाया है। 
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इन तीन रेजीमेंट के जवानों ने चीनियों को खदेड़ा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब चीनी सैनिकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया तो जम्मू और कश्मीर राइफल्स, जाट रेजिमेंट और सिख लाइट इन्फैंट्री सहित तीन अलग-अलग बटालियनों से संबंधित सैनिकों ने उनका मुकाबला किया और उन्हें खदेड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई चीनी सैनिकों के हाथ और पैर की हड्डियां टूटी हैं। कइयों के सिर फट गए हैं। 

लाठी और अन्य हथियारों से लैस होकर आए थे चीनी सैनिक
सूत्रों ने यह भी बताया कि नौ दिसंबर को जब दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई तब चीनी सैनिक लाठियों और अन्य उपकरणों से लैस होकर आए थे। हालांकि भारतीय सैनिक भी सतर्क थे और किसी भी संघर्ष के लिए तैयार थे क्योंकि वे चीनियों के इरादों को जानते थे। यहां यह भी बता दें कि उस वक्त भारतीय सेना की एक यूनिट वहां से निकल रही थी और एक नई यूनिट से रिलीव हो रही थी। सूत्रों ने यह भी कहा कि जाहिर तौर पर झड़प के दौरान चीनी सेना ड्रोन के साथ इस पूरी झड़प को शूट करने के लिए आई थी। चीनियों को उम्मीद थी कि वे भारतीय सैनिकों को पछाड़ देंगे, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उनके इस प्रयास को विफल कर दिया। 

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर में एलएसी से लगे कुछ क्षेत्रों पर भारत और चीन दोनों अपना-अपना दावा करते हैं। ऐसे में 2006 से इस तरह के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। 


अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दी प्रतिक्रिया
वहीं, इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि भारतीय सेना देश में कहीं भी किसी को एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं करने देगी। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज संसद में कहा कि भारतीय सेना के जवानों ने 9 दिसंबर को अरुणाचल के तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में चीनी सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का उल्लंघन करने से बहादुरी से रोका। उन्होंने आगे कहा, "मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी भारतीय सैनिक नहीं मारा गया या गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। मैं सदन को यह भी विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सेना देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में सक्षम है। हमारी सेना किसी भी अतिक्रमण से निपटने के लिए तैयार है। मुझे दृढ़ विश्वास है कि हाउस हमारे सशस्त्र बलों की बहादुरी और साहस का समर्थन करेगा।"  

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