{"_id":"6a68cf6a91fecba993075566","slug":"india-china-border-trade-lipulekh-pass-restarts-from-august-1-after-six-years-2026-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह साल बाद फिर खुलेगा लिपुलेख: एक अगस्त से भारत-चीन कारोबार होगा शुरू, क्यों 20 व्यापारियों को ही मिली मंजूरी?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
छह साल बाद फिर खुलेगा लिपुलेख: एक अगस्त से भारत-चीन कारोबार होगा शुरू, क्यों 20 व्यापारियों को ही मिली मंजूरी?
Tue, 28 Jul 2026 09:19 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, पिथौरागढ़
पीटीआई, पिथौरागढ़
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 28 Jul 2026 09:19 PM IST
सार
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भारत और चीन के बीच पारंपरिक सीमा व्यापार लंबे अंतराल के बाद फिर शुरू होने जा रहा है। शुरुआती चरण में सीमित संख्या में भारतीय व्यापारी तिब्बत के पुरांग क्षेत्र जाकर वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का आकलन करेंगे और वर्षों पहले रखे गए अपने माल की स्थिति की जांच करेंगे। कोविड-19 महामारी के कारण यह व्यापार 2019 से बंद था।
विज्ञापन
भारत-चीन के बीच फिर शुरू होगा व्यापार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन सीमा व्यापार छह साल से अधिक समय बाद एक अगस्त से फिर शुरू होने जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, चीन ने पहले चरण में 20 भारतीय व्यापारियों को पुरांग (तकलाकोट) जाने की अनुमति दी है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि तिब्बत स्थित चीनी प्रशासन ने पहले चरण में केवल 20 भारतीय व्यापारियों को पुरांग (तकलाकोट) जाने की मंजूरी दी है। ये व्यापारी वहां जाकर व्यापार शुरू करने की तैयारियों का जायजा लेंगे और पहले से रखे अपने सामान की स्थिति देखेंगे।
क्यों सिर्फ 20 व्यापारियों को ही दी चीन ने इजाजत?
चीनी प्रशासन ने आवास सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए शुरुआती चरण के लिए भारत से 20 व्यापारियों के नाम मांगे हैं। इस चरण में व्यापारी बिना किसी सामान के सीमा पार करेंगे। उनका उद्देश्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना और पहले से वहां छोड़े गए माल की जांच करना होगा। धारचूला के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि सीमा व्यापार संगठन से पहले चरण के लिए 20 व्यापारियों के नाम उपलब्ध कराने को कहा गया है।
विज्ञापन
भारत-चीन सीमा व्यापार संघ ने तय किया है कि पहले दल में उन 20 व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका सामान वर्ष 2019 से तकलाकोट के किराये के गोदामों में रखा हुआ है। उसी वर्ष कोरोना महामारी के कारण सीमा व्यापार अचानक बंद कर दिया गया था।
2019 से फंसा है व्यापारियों का सामान
संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकाली ने कहा, "भारत से नया सामान ले जाने से पहले हम तकलाकोट के गोदामों में रखे पुराने और बिना बिके माल का निरीक्षण करना चाहते हैं। यह वही सामान है, जो वर्ष 2019 में व्यापारिक सत्र समाप्त होने के समय वहां रह गया था।" लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन सीमा व्यापार वर्ष 1992 में दोबारा शुरू हुआ था। इससे पहले 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह पूरी तरह बंद हो गया था। इस व्यापार में मुख्य रूप से पिथौरागढ़ जिले की व्यांस, दारमा और चौदास घाटियों के जनजातीय व्यापारी शामिल होते हैं।
एक अगस्त से शुरू होगा व्यापार
इन समुदायों के पश्चिमी तिब्बत के साथ सदियों पुराने व्यापारिक संबंध रहे हैं। वर्ष 1962 के बाद व्यापार बंद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। वर्ष 2019 में कोरोना महामारी के कारण यह व्यापार फिर से बंद हो गया था। इसे सीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके दोबारा शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती जनजातीय समुदायों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सीमा व्यापार इस वर्ष एक जून से शुरू होना था, लेकिन तिब्बती प्रशासन ने पुरांग व्यापार केंद्र में आवास और दुकानों जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा था। अब आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद एक अगस्त से इस ऐतिहासिक सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि तिब्बत स्थित चीनी प्रशासन ने पहले चरण में केवल 20 भारतीय व्यापारियों को पुरांग (तकलाकोट) जाने की मंजूरी दी है। ये व्यापारी वहां जाकर व्यापार शुरू करने की तैयारियों का जायजा लेंगे और पहले से रखे अपने सामान की स्थिति देखेंगे।
विज्ञापन
क्यों सिर्फ 20 व्यापारियों को ही दी चीन ने इजाजत?
चीनी प्रशासन ने आवास सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए शुरुआती चरण के लिए भारत से 20 व्यापारियों के नाम मांगे हैं। इस चरण में व्यापारी बिना किसी सामान के सीमा पार करेंगे। उनका उद्देश्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना और पहले से वहां छोड़े गए माल की जांच करना होगा। धारचूला के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि सीमा व्यापार संगठन से पहले चरण के लिए 20 व्यापारियों के नाम उपलब्ध कराने को कहा गया है।
विज्ञापन
भारत-चीन सीमा व्यापार संघ ने तय किया है कि पहले दल में उन 20 व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका सामान वर्ष 2019 से तकलाकोट के किराये के गोदामों में रखा हुआ है। उसी वर्ष कोरोना महामारी के कारण सीमा व्यापार अचानक बंद कर दिया गया था।
2019 से फंसा है व्यापारियों का सामान
संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकाली ने कहा, "भारत से नया सामान ले जाने से पहले हम तकलाकोट के गोदामों में रखे पुराने और बिना बिके माल का निरीक्षण करना चाहते हैं। यह वही सामान है, जो वर्ष 2019 में व्यापारिक सत्र समाप्त होने के समय वहां रह गया था।" लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन सीमा व्यापार वर्ष 1992 में दोबारा शुरू हुआ था। इससे पहले 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह पूरी तरह बंद हो गया था। इस व्यापार में मुख्य रूप से पिथौरागढ़ जिले की व्यांस, दारमा और चौदास घाटियों के जनजातीय व्यापारी शामिल होते हैं।
एक अगस्त से शुरू होगा व्यापार
इन समुदायों के पश्चिमी तिब्बत के साथ सदियों पुराने व्यापारिक संबंध रहे हैं। वर्ष 1962 के बाद व्यापार बंद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। वर्ष 2019 में कोरोना महामारी के कारण यह व्यापार फिर से बंद हो गया था। इसे सीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके दोबारा शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती जनजातीय समुदायों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सीमा व्यापार इस वर्ष एक जून से शुरू होना था, लेकिन तिब्बती प्रशासन ने पुरांग व्यापार केंद्र में आवास और दुकानों जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा था। अब आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद एक अगस्त से इस ऐतिहासिक सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।