मॉस्को में रूसी समकक्ष से मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर, चीनी विदेश मंत्री से भी मिलेंगे
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लद्दाख सीमा पर जारी तनाव के बीच बुधवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। जयशंकर ने इसे लेकर कहा, 'विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रसन्नता हुई। रणनीतिक भागीदारी को लेकर वार्ता हुई।' जयशंकर अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात करेंगे।
Pleasure to meet Foreign Minister Sergey Lavrov, this time in person. Excellent talks that reflect our special and privileged strategic partnership. Value our exchanges on the international situation: External Affairs Minister (EAM) S Jaishankar pic.twitter.com/srhPi0rAvH
— ANI (@ANI) September 9, 2020विज्ञापन
दरअसल, सीमा विवाद को सुलझाने के लिए की जा रही तमाम कोशिशों के बाद भी चीन की नापाक हरकतें इसे बेनतीजा कर रही हैं। यही कारण है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच मॉस्को में बैठक होने जा रही है। दोपहर के भोजन वाली इस बैठक में सीमा विवाद पर चर्चा हो सकती है।
बता दें कि भारत-चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को मॉस्को पहुंचे हैं। वे अपने चार दिन के दौरे के दौरान यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। उनका यह दौरा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रूस की राजधानी की यात्रा करने के महज कुछ ही दिनों बाद हो रहा है। सिंह, आठ सदस्यीय एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए यहां आए थे।
Chinese State Councilor and Foreign Minister Wang Yi (in file pic) will attend a luncheon meeting with External Affairs Minister Dr S Jaishankar and Foreign Minister of Russia in Moscow: China's Global Times pic.twitter.com/ddbY8sIGQt
— ANI (@ANI) September 9, 2020
जयशंकर मॉस्को में ठहरने के दौरान एससीओ के विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) की बैठक में शामिल होंगे। यह परिषद की तीसरी बैठक होगी जिसमें भारत पूर्ण सदस्य के तौर पर सम्मिलित होगा। बता दें कि एससीओ के सदस्य देशों में, भारत और चीन भी शामिल हैं। इससे पहले रूस में ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंगही से मुलाकात की थी लेकिन इस बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला था। बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली थी।