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एलएसी पर तनाव कम करने के लिए भारत-चीन के बीच हो सकती है बातचीत: सूत्र

Mon, 29 Jun 2020 09:16 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 29 Jun 2020 09:16 AM IST
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India China Border tension: India and China dialogue under the WMCC on India-China border affairs
फाइल फोटो - फोटो : PTI

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच जानकारी मिली है कि दोनों देश भारत-चीन सीमा मामलों पर 'वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन' (डब्लूएमसीसी) की मदद से कूटनीतिक संवाद करना चाहते हैं, ताकि पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम किया जा सके। साथ ही वर्तमान परिस्थिति के लिए जिम्मेदार मतभेदों पर चर्चा की जा सके। सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। 

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी सहमति को लागू करने के लिए ये बातचीत नियमित आधार पर होगी। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह की शुरुआत में डब्लूएमसीसी बैठक के एक और दौर को निर्धारित करने की कोशिश की जा रही है। 
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सूत्रों ने बताया कि दोनों ही पक्षों ने माना है कि सीमा पर शांति और अमन स्थापित करने के लिए इस मैकेनिज्म का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग होना चाहिए। अभी तक इस मैकेनिज्म के जरिए दोनों पक्षों के बीच 15 बार मुलाकात हो चुकी है और सबसे नवीनतम बैठक का आयोजन पिछले सप्ताह किया गया था। 

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डब्लूएमसीसी को 2012 में भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए परामर्श और समन्वय के लिए एक संस्थागत तंत्र के रूप में स्थापित किया गया था। साथ ही इसे दोनों देशों के बीच संचार और सहयोग को मजबूती प्रदान करने के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने वाले एक तंत्र के रूप में भी तैयार किया गया। 


सूत्रों ने बताया कि पिछली मुलाकात में भारत ने गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प पर चिंता व्यक्त की और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का सम्मान करने और निरीक्षण करने की आवश्यकता है। भारत और चीन ने इस बात की भी पुष्टि की कि दोनों पक्षों को छह जून को वरिष्ठ कमांडरों द्वारा पहुंची गई सहमति को ईमानदारी से लागू करना चाहिए।

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भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय विशेष प्रतिनिधि वार्ता भी हुई, जिसमें सीमा मुद्दे का उचित, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान प्राप्त करने पर जोर दिया गया। यह वार्ता द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी गई। इस वार्ता का 22वां दौर पिछले साल एनएसए अजीत डोभाल और स्टेट काउंसलर वांग यी के बीच हुआ था।

डब्लूएमसीसी को प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसने दोनों पक्षों को सीमा क्षेत्रों में स्थिति की समीक्षा करने में मदद की है। भारत और चीन ने इसका इस्तेमाल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर नियमित आदान-प्रदान के लिए भी किया है।

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