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Hindi News ›   India News ›   India China Border tension: China is not paying attention to India appeal to reduce tension in Ladakh

लद्दाख में तनाव कम करने की भारत की अपील पर ध्यान नहीं दे रहा है चीन

Fri, 14 Aug 2020 11:13 PM IST
अनवर अंसारी शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 14 Aug 2020 11:13 PM IST
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India China Border tension: China is not paying attention to India appeal to reduce tension in Ladakh
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : पीटीआईॉ

15 अगस्त की पूर्व संध्या पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर चीन से सीमा पर शांति, सौहार्द और द्विपक्षीय रिश्ते को सहज बनाए रखने के लिए चीन से विशेष प्रतिनिधि (एनएसए, अजित डोभाल) और वांग यी के बीच बनी सहमति का पालन करने की अपील की है।

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पिछले दो महीने में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव कई बार यह अपील कर चुके हैं, लेकिन चीन की तरफ से इस पर किसी तरह की प्रगति का संकेत नहीं मिल रहा है। उल्टे चीन ढिठाई दिखा रहा है और सीमा क्षेत्र में सैन्य तैनाती को मजबूत कर रहा है।
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कूटनीतक गलियारे में चीन की इस ढिठाई को काफी जटिल स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है। सेना मुख्यालय के अधिकारी इस मामले में मौन हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि सेना लद्दाख क्षेत्र में देश की क्षेत्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
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चीन के सामानांतर भारतीय सैन्य बल हिन्द महासागर क्षेत्र से लेकर लद्दाख तक लगातार अपनी तैयारी मजबूत कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि चीन की घुसपैठ और पैदा हुई स्थिति से मुकाबले के लिए सैन्य बलों ने भारत-चीन सीमा पर अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है।


क्या है विदेश मंत्रालय को उम्मीद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों में लद्दाख क्षेत्र से सेना की वापसी और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का सम्मान करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद दोनों देशों के वर्किंग मैकेनिज्म, डिप्लोमैटिक और सैन्य अधिकारियों के बीच में कुछ दौर की वार्ता हुई है।

अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि भविष्य में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच में जल्द ही फिर बैठक होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के सहज द्विपक्षीय रिश्ते तथा सीमा पर शांति और सौहार्द की स्थापना के लिए सेना की वापसी आवश्यक प्रक्रिया है।

प्रवक्ता ने कहा कि सेना की वापसी की प्रक्रिया जितना जल्द हो सके, उतना बेहतर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पड़ोसी देश चीन इसे समझेगा और एलएसी का सम्मान करते हुए  जीमीनी स्तर पर यथा शीघ्र सैन्य वापसी को सुनिश्चित करेगा।


चीन की कम नहीं हो रही है ढिठाई

लद्दाख में एलएसी के पास आमने-सामने का तनाव भले कम होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन दोनों देशों की सैन्य तैनाती घटने की बजाय लगातार मजबूत किलेबंदी की तरफ बढ़ रही है। चीन की एलएसी पर कार्रवाई के बाबत भारत ने अपने यहां चीनी सामानों, उत्पादों, परियोजनाओं तथा डिजिटल फोरम पर कई तरह की पाबंदियों को अमल में लाना शुरू कर दिया।

इसके बाबत चीनी दूतावास के नई दिल्ली में प्रवक्ता जी रोंग ने भारत को ही नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि हम भारत से उम्मीद करते हैं कि वह सीमा पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे स्थितियां और जटिल हों। जी गोंग ने भारत से सीमा पर द्विपीक्षीय रिश्ते के अनुकूल माहौल बनाने की भी उम्मीद दताई। चीनी राजदूत सुन वेईडांग ने भी दूतावास की मासिक पत्रिका में दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण, विश्वसनीय रिश्ते की आशा व्यक्त की है।


सुन वेईडांग ने भारत और चीन से एक दूसरे के लिए विकास के बराबर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ एक दूसरे के लिए खतरा न बनने की उम्मीद जताई है, लेकिन उन मुद्दों पर कोई प्रकाश नहीं डाला, जिनकी भारत चीन से उम्मीद करता है। सेना मुख्यालय के सूत्र बताते हैं लद्दाख में पैंगांग त्सो लेक, डेपसांग समेत कुछ सामरिक, रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में हुई घुसपैठ को लेकर चीन के अफसर कोई ठोस बात नहीं कर रहे हैं।

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