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पेंगोंग झील के पास पर्याप्त संख्या में पहुंचे थे चीनी सैनिक, लेकिन भारतीय सेना भी पूरी तरह तैयार थी: सूत्र

Tue, 01 Sep 2020 08:49 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 01 Sep 2020 08:49 AM IST
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India China News: Chinese Came In Sufficient Numbers , Indian Army Was Ready says Sources
india china border disputes - फोटो : पीटीआई

लद्दाख के पेंगोंग त्सो झील के किनारे पर हुई भारतीय और चीनी सैनिकों की झड़प को लेकर सूत्रों ने बताया है कि चीनी जवान यथास्थिति को बदलने की नीयत से इस तरफ आए थे। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे इलाके में सड़क नहीं है। इसलिए झील के दक्षिणी किनारे पर बड़ी संख्या में तैनात चीनी सैनिक पश्चिम की तरफ पैदल ही बढ़ गए। उनका इरादा एकतरफा रूप से क्षेत्र पर कब्जा जमाना था। 

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सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक पर्याप्त संख्या में इस तरफ आए थे। लेकिन भारतीय सेना चीनी जवानों के इरादों से वाकिफ थी और उसने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया। इस दौरान कोई शारीरिक झड़प नहीं हुई और वर्तमान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच आमने-सामने की स्थिति नहीं है। सूत्रों ने जानकारी दी कि भारतीय सेना इलाके में काफी अंदर तक तैनात थी और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थी। कुछ चीनी सैनिक भी इलाके में तैनात रहे। 
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सरकार ने कहा, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने 29/30 अगस्त की रात को पूर्वी लद्दाख में चल रहे गतिरोध के दौरान दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए हुई सैन्य और राजनयिक बातचीत का उल्लंघन किया और यथास्थिति को बदलने के लिए घुसपैठ की। भारतीय सेना ने पेंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर पीएलए के जवानों की इस कायराना हरकत को नाकाम कर दिया। सीमा मुद्दों को हल करने के लिए चुशुल में एक ब्रिगेड कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग चल रही है। 
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यह भी पढ़ें: एलएसी पर तनाव का दिखा असर, श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर रोकी गई लोगों की आवाजाही

लद्दाख से लगी सीमा पर यह एक नया क्षेत्र है, जहां चीन अपनी आक्रामकता दिखा रहा है। चीन की यह कायराना हरकत दोनों देशों के बीच सीमा तनाव को लेकर हुई पांच दौर की बैठकों के बाद सामने आई है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की शुरुआत अप्रैल-मई से हुई थी। 




वहीं, 15 जून को गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद भारत और चीन के बीच रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस झड़प में भारतीय सेना ने भी चीनियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि, चीन की तरफ से इस घटना में हताहत हुए जवानों की जानकारी नहीं दी गई, लेकिन एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि इस घटना में 35 के करीब चीनी जवान हताहत हुए थे। 

जुलाई में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और चीन के बीच सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि चीनी सैनिकों ने फिंगर 5 के क्षेत्र में अपने स्थिति को मजबूत करना जारी रखा। 

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