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एलएसी विवाद : भारत-चीन की चौथी बैठक में भी नहीं निकला ठोस नतीजा, गतिरोध बरकरार
Fri, 21 Aug 2020 06:23 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 21 Aug 2020 06:23 AM IST
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भारत चीन गतिरोध
- फोटो : iStock
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए भारत और चीन के सीमा विवाद पर परामर्श एवं सहयोग संबंधी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बृहस्पतिवार को बैठक हुई लेकिन इसमें भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
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गलवां में हुई हिंसक झड़प के बाद डब्ल्यूएमसीसी की चौथी बैठक में दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम रहे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत लंबित मुद्दों को ‘शीघ्र आधार’ पर निपटारे के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को हुई राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद कहा, एलएसी की मौजूदा स्थिति को लेकर दोनों पक्षों में स्पष्ट और व्यापक बातचीत हुई। दोनों पक्ष पश्चिमी सेक्टर में एलएसी से सैनिकों को पूरी तरह पीछे हटाने पर गंभीरता से काम करने के पक्ष में हैं।
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श्रीवास्तव ने कहा, यह बातचीत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के आधार पर हुई। इसके तहत दोनों सेनाओं को एलएसी पर पूरी तरह पहले की स्थिति में जाने के लिए प्रयास जारी रखने होंगे।
बैठक में व्यापारिक और अन्य द्विपक्षीय संबंधों को जारी रखने के लिए सीमा पर शांति और विश्वास बहाली पर जोर दिया गया। सहमति इस बात पर भी रही कि बातचीत के रास्ते खुले रखे जाएं। डब्ल्यूएमसीसी की बैठक में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) नवीन श्रीवास्तव और चीनी पक्ष का प्रतिनिधित्व वहां के विदेश मंत्रालय में सीमा एवं समुद्री विभाग के महानिदेशक हांग लियांग ने किया।
पैंगोंग त्सो समेत अन्य तनावग्रस्त इलाकों से नहीं हट रहा ड्रैगन
सूत्रों के मुताबिक, चीन अभी भी पैंगोंग त्सो समेत अन्य तनावग्रस्त इलाकों से सहमति के बावजूद पीछे नहीं हट रहा है। डेपसांग में भी चीनी सेना सीमा में भारी जमावड़ा कर भारतीय सेना को अपने इलाके में गश्त से रोक रही है। लिहाजा भारतीय सेना सभी जगहों पर बराबर की ताकत से डटी है।
एलएसी पर तनाव खत्म करने के लिए कोर कमांडर की पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। चौथे दौर में चीन सभी इलाकों से पीछे हटने पर राजी होने के बावजूद अचानक पैंतरा बदलते हुए पैंगोंग, हॉट स्प्रिंग और डेपसांग पर अड़ गया। कोर कमांडर की पांचवें दौर की वार्ता में भी चीन पैंगोंग पर बातचीत के लिए राजी नहीं हुआ।
जून में जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष से की थी बातचीत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 17 जून को अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ फोन पर बात की थी जिसमें दोनों पक्षों ने संपूर्ण स्थिति से जिम्मेदार ढंग से निपटने पर सहमति जताई थी।
वहीं, पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी द्वारा सीमा विवाद सुलझाने के रास्तों की तलाश के लिए करीब दो घंटे तक बातचीत हुई थी। डोभाल और वांग सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं।
दोनों देशों ने सेना हटने की प्रगति का मूल्यांकन किया : चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने अग्रिम पंक्ति के बलों के पीछे हटने को लेकर हुई प्रगति का सकारात्मक मूल्यांकन किया तथा जमीनी स्तर शेष मुद्दों की स्पष्ट एवं गहन समीक्षा की तथा आपसी समझ को बढ़ाया।
इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत चीन सीमा मुद्दे पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति को लागू करने तथा सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों से बातचीत जारी रखने एवं स्थिति को सामान्य बनाने, जमीनी स्तर पर शेष मुद्दों का ठीक ढंग से निस्तारित करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति पर सहमत हुए।