India-China border: LAC पर ड्रैगन को सीधा चलना होगा, पहाड़ों में 9500 जवान कम करेंगे ITBP का पेट्रोलिंग फासला
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विस्तार
भारत-चीन बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात 'आईटीबीपी' पर केंद्र सरकार ने पूर्ण भरोसा जताते हुए सात नई बटालियनों के गठन को स्वीकृति देकर बता दिया है कि अब 'ड्रैगन' को सीधा चलना होगा। लगभग 9500 जवानों की भर्ती का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 'एलएसी' पर विषम परिस्थितियों के बीच बॉर्डर की सुरक्षा पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी तरीके से हो सकेगी। एक बीओपी से दूसरी बीओपी तक बर्फीली पहाड़ियों और रेन फॉरेस्ट जैसी प्राकृतिक बाधाओं को लांघते हुए पेट्रोलिंग कर रहे आईटीबीपी जवानों का रास्ता अब छोटा हो जाएगा। मौजूदा समय में पेट्रोलिंग के लिए निकले आईटीबीपी के दो दस्तों के बीच दूरी का जो अंतर होता है, वह बहुत ज्यादा है। नई बटालियन खड़ी होने के बाद पेट्रोलिंग के लिए अधिक जवान उपलब्ध होंगे। जवानों को बीच में आराम की सुविधा मिलेगी। एक तय दूरी के बाद दूसरा दस्ता पेट्रोलिंग के लिए निकल जाएगा। इससे चीन के सैनिकों को एलएसी पर किसी तरह का दुस्साहस दिखाने का मौका नहीं मिलेगा।
एलएसी पर रहेगा आईटीबीपी का आई टू आई कॉन्टैक्ट
भारत सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि चीन बॉर्डर पर जो परिस्थितियां होती हैं, वे बेहद विपरित रहती हैं। जवानों को अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पेट्रोलिंग की अवधि बहुत लंबी होती है। कई बार तो एक पेट्रोलिंग दस्ते को बीओपी तक पहुंचने में 30-40 दिन लग जाते हैं। सामरिक रणनीति के हिसाब से यह अवधि ठीक नहीं मानी जाती। अब आईटीबीपी को सात नई बटालियन मिल रही हैं। 2025-26 तक ये बटालियन अस्तित्व में आ जाएंगी। इसके बाद एलएसी पर पेट्रोलिंग के लिए निकले दो दस्तों के बीच की दूरी काफी कम होगी। इससे लंबे समय तक एलएसी पर नजर रखी जा सकेगी। सूत्रों ने बताया कि बॉर्डर सर्विलांस के लिए तकनीकी उपकरण भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन जब एलएसी पर आईटीबीपी का आई-टू-आई कॉन्टैक्ट रहेगा तो चीन को किसी तरह के दुस्साहस का अवसर ही नहीं मिलेगा। आईटीबीपी, तकनीकी उपकरणों की मदद लेगी, लेकिन भरोसा खुद की आंखों पर ही करेगी।
10 साल से हो रही थी नई बटालियनों की मांग
सूत्रों का कहना है कि एलएसी पर कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां पहाड़ पर स्थिति कुछ और है तो घाटी में हालात अलग हैं। बरसाती वनों में अगर जरा भी इधर-उधर हुए तो बीओपी तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है। लंबे रास्ते में जवानों को आराम भी चाहिए। कई जगहों पर तो लंबे समय तक बरसात होती रहती है। जंगली जानवर, सांप, जोंक व दूसरे कई खतरनाक जीवों से जवानों का आमना-सामना होता है। नई बटालियनों की जरूरत, पिछले दस वर्ष से महसूस हो रही थी। 2014 में भी 12 नई बटालियनों के सृजन का मुद्दा उठा था। उसी संदर्भ के तहत 2020 में 47 बीओपी की मंजूरी मिली थी। उसके लिए काम शुरू हो चुका है। चूंकि वहां निर्माण करना आसान नहीं है, इसलिए कार्य की रफ्तार कुछ धीमी है। अरुणाचल प्रदेश से लगते चीन के बॉर्डर पर अभी तक छह सात बटालियन तैनात रही हैं। अतिरिक्त जवान मिलने के बाद इन बटालियनों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी। केंद्र सरकार के इस फैसले से बल की मौजूदा संख्या 88000 से बढ़कर 98000 हो जाएगी। बल की संख्या में एकाएक 11 फीसदी का इजाफा होगा। इससे पहले बल को 2011 में 13 बटालियन मिली थीं। 2007 में आईटीबीपी की 29 बटालियन थीं। इसके अलावा चार स्पेशल बटालियन थीं। अब नई बटालियनों को मिलाकर यह संख्या 63 हो जाएगी। अगर इसमें चार स्पेशल बटालियन को मिला दें तो वह आंकड़ा 67 पर पहुंचेगा।
आईटीबीपी में खुलेगी पदोन्नति की खिड़की
नई बटालियनों के सृजन से तकरीबन सभी रैंकों में पदोन्नति की राह खुल जाएगी। खासतौर पर नीचे के रैंक यानी इंस्पेक्टर स्तर तक ज्यादा पदोन्नति होंगी। दिसंबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगलुरु में आईटीबीपी को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था, भारत की एक इंच जमीन भी कोई नहीं ले सकता। आईटीबीपी जवान भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात हैं। शाह ने बेंगलुरु के देवनहल्ली में आईटीबीपी की नई बिल्डिंग का उद्घाटन करते हुए कहा, भारत व चीन बॉर्डर पर किसी तरह की कोई चिंता करने की बात नहीं है, क्योंकि वहां आईटीबीपी के जवान सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। उनके बयान से कुछ समय पहले ही तवांग सेक्टर में भारत और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। शाह ने कहा, देश के लोग जवानों का शुक्रिया करते हैं। देश की जनता ने आईटीबीपी के जवानों की वीरता और शौर्य के कारण ही उन्हें 'हिमवीर' का उपनाम दिया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने चीन से सटे पांच राज्यों के 2,966 गांवों का सर्वांगीण विकास करने के लिए एक योजना को मंजूरी दी थी। इससे पहले 2020 में आईटीबीपी की 47 सीमा चौकी और 12 कैंप स्थापित करने को मंजूरी दी गई थी। अब सात नई बटालियन के सृजन को मंजूरी मिली है।