{"_id":"6899619917bba372de0f78be","slug":"india-bloc-march-from-parliament-to-election-commission-delhi-police-no-permission-has-been-sought-2025-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"'INDIA' vs ECI: 'अभी तक कोई अनुमति नहीं मांगी गई', संसद से चुनाव आयोग तक विपक्षी गठबंधन के मार्च पर पुलिस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'INDIA' vs ECI: 'अभी तक कोई अनुमति नहीं मांगी गई', संसद से चुनाव आयोग तक विपक्षी गठबंधन के मार्च पर पुलिस
Mon, 11 Aug 2025 08:50 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 11 Aug 2025 08:50 AM IST
सार
विपक्ष का कहना है कि भाजपा के साथ मिलकर चुनाव आयोग वोटों की चोरी कर रहा है। उसका यह भी कहना है कि बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मतदाताओं के हित के बजाय अहित कर रहा है। एसआईआर के चलते राज्य से लाखों की संख्या में मतदाताओं के मताधिकार छीने गए हैं।
विज्ञापन
एसआईआर के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
- फोटो : ANI
विस्तार
चुनाव में धोखाधड़ी के आरोपों पर विपक्ष के चुनाव आयोग तक मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि किसी ने भी विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मांगी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य दलों के सदन नेताओं के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन इंडिया के सांसद सुबह 11.30 बजे संसद भवन से चुनाव आयोग (ईसी) तक मार्च शुरू करेंगे। विरोध मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
विज्ञापन
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि किसी ने भी विरोध मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी है। रास्ते में कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग कार्यालय और आसपास की सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षा वाहन और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए गए हैं।
विज्ञापन
विपक्ष का कहना है कि भाजपा के साथ मिलकर चुनाव आयोग वोटों की चोरी कर रहा है। उसका यह भी कहना है कि बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मतदाताओं के हित के बजाय अहित कर रहा है। एसआईआर के चलते राज्य से लाखों की संख्या में मतदाताओं के मताधिकार छीने गए हैं। विपक्ष इसमें मामले में सदन में लगातार चर्चा की मांग के साथ इसे वापस लेने की मांग कर रहा है। कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए चुनाव आयोग पर हेराफेरी का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कर्नाटक की एक लोकसभा सीट के तहत एक विधानसभा सीट के तथ्यों के जरिए कई दावे किए थे और भाजपा-निर्वाचन आयोग की मिलीभगत का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
राहुल के आरोप, चुनाव आयोग का जवाब
इससे पहले दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया था कि भारत के चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना तीसरा कार्यकाल मिला। राहुल गांधी ने कहा, 'चुनाव आयोग हमें महादेवपुर (कर्नाटक विधानसभा क्षेत्र) में आंकड़े नहीं दे रहा है। अगर हम अन्य लोकसभा सीटों पर भी ऐसा करें, तो हमारे लोकतंत्र की सच्चाई सामने आ जाएगी।' इस पर चुनाव आयोग ने पलटवार किया था। चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा था कि अगर कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता अपने विश्लेषण पर विश्वास करते हैं और मानते हैं कि चुनाव आयोग पर उनके आरोप सही हैं, तो उन्हें शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इसलिए उनके पास दो विकल्प हैं- या तो शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करें या चुनाव आयोग पर बेतुके आरोप लगाने के लिए देश से माफी मांगें।
'किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटेगा'
- इससे पहले शनिवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान को लेकर हो रहे विरोध के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था। इसमें मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर करने के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।
- बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में चुनाव आयोग पर आरोप लगाया गया था कि एसआईआर के दौरान राज्य की मतदाता सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।
- आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि एक अगस्त 2025 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम हटाने की प्रक्रिया नियमों के तहत की जाएगी। साथ ही मतदाता को नाम हटाने के प्रस्ताव और उसके कारण के बारे में सबसे पहले बताया जाएगा। हर मतदाता को सुनवाई का उचित मौका, प्रासंगिक दस्तावेज देने का अवसर और तर्क संगत आदेश दिया जाएगा।