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'जासूसों' के पकड़े जाने पर बिगड़ा पाकिस्तान, भारत ने कहा, अधिकारियों के लिए परेशानी खड़ी न करें
Mon, 15 Jun 2020 09:38 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 15 Jun 2020 09:38 AM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
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भारत द्वारा दो सप्ताह पहले नई दिल्ली में पाकिस्तान के दो अधिकारियों को जासूसी के आरोप में पकड़े जाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास बढ़ गई है। खासकर इस्लामाबाद में काम कर रहे भारतीय राजनयिकों और दूसरे स्टाफ के लिए हालात काफी मुश्किल और खतरनाक होने की आशंका है।
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हालांकि, भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह वहां काम कर रहे भारतीयों के लिए कोई परेशानी खड़ी न करें। बताया गया है कि भारतीय उच्यायोग ठीक प्रकार से अपने कार्यों को नहीं कर पा रहा है, क्योंकि भारतीय अधिकारियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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भारत ने शुक्रवार को एक मौखिक नोट भेजकर पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष रोष दर्ज कराया। भारत सरकार ने पाकिस्तान को अवगत कराया है कि उसकी एजेंसियों के इस कृत्य ने 'राजनयिक संबंधों पर विएना कन्वेंशन', 1961 का उल्लंघन किया है। इसके अलावा यह 'बाइलेटरल 1992 कोड ऑफ कंडक्ट' का उल्लंघन भी है जो दोनों देशों ने राजनयिकों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए हस्ताक्षर किए थे।
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मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि भारतीय उच्चायोग और उसके स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें विएना कन्वेंशन के मुताबिक काम जारी रखने की इजाजत दी जाए। कोरोना वायरस महामारी की वजह से पहले ही काम रुका हुआ है।
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बताया गया कि भारतीय अधिकारियों के लिए बिना पीछा किए गए बाहर निकलना मुश्किल हो चुका है। 31 मई को नई दिल्ली में पाकिस्तानी अधिकारियों को पकड़ा गया था। उसके बाद से भारतीय अधिकारियों पर गहन निगरानी शुरू कर दी गई। भारत के प्रभारी गौरव अहलूवालिया को भी डराया गया है और उन पर नजर रखी गई है।
पाकिस्तान भारतीय अधिकारियों को उन्हीं आरोपों में बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है, जिस आरोप में भारत ने उसके अधिकारियों को नई दिल्ली से निष्कासित किया था। आखिरी बार भारत ने साल 2016 में पाकिस्तानी अधिकारियों को जासूसी के आरोप में नई दिल्ली से निष्कासित किया था, इसके बाद इस्लामाबाद ने तीन दिन बाद भारतीय अधिकारियों के साथ भी ऐसा किया था। हालांकि, इस बार दो सप्ताह बाद भी पाकिस्तान ऐसा करने में सफल नहीं हो पाया है।