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रिपोर्ट में दावा- भारत में हैं सबसे ज्यादा गुलाम, आईबी ने कहा- देश की छवि खराब करने की साजिश
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Wed, 04 Oct 2017 01:33 PM IST
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गुलाम
- फोटो : social media
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विश्वभर में सबसे ज्यादा गुलाम और दास भारत मे हैं। अमेरिकी सरकार से फंडेड आईएलओ 2017 की इस रिपोर्ट पर भारत की इंटेलीजेंस ब्यूरो ने कड़ा विरोध जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में 40 मिलियन गुलाम हैं जिसमें एशिया-पैसिफिक में 25 मिलियन है। जिनमें सबसे अधिक भारत में हैं।
भारत में सबसे अधिक गुलाम और दास कहे जाने पर इंटेलीजेंस ब्यूरो ने विरोध जताते हुए कहा है कि यह भारत को बदनाम करने की साजिश है। ब्यूरो ने इस बाबत पीएमओ, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, विदेश मंत्रालय और लेबर मिनिस्ट्री को एक गुप्त पत्र भी लिखा है।
पढ़ें: UN में एनजीओ का दावा, भारत में हाल में बने कानूनों से वैध हो गई है बाल मजदूरी
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दासता पर यह रिपोर्ट इंटरनेशल लेबर ऑरगेनाइजेशन,यूएनए और ऑस्ट्रेलिया आधारित डब्ल्यूएफएफ ने जारी की है। इंटेलीजेंस ब्यूरो ने कहा है कि इस रिपोर्ट से भारत में हो रहे सतत विकास के लक्ष्य 8.7 पर सीधा असर पड़ेगा और इससे भारत की छवि और निर्यात को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है। यह मानव तस्करी, श्रम उन्मूलन कार्य को प्रभावित करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 14-18 मिलियन गुलाम है, जो विश्वभर के किसी भी देश में सबसे अधिक है। जबकि 2016 के सर्वे में एशिया पैसिफिक में 30 मिलियन और अकेले भारत में 18 मिलियन गुलाम बताए गए थे जबकि विश्वभर में गुलामों की गिनती 46 मिलियन की गई थी।
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भारत में सबसे अधिक गुलाम और दास कहे जाने पर इंटेलीजेंस ब्यूरो ने विरोध जताते हुए कहा है कि यह भारत को बदनाम करने की साजिश है। ब्यूरो ने इस बाबत पीएमओ, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, विदेश मंत्रालय और लेबर मिनिस्ट्री को एक गुप्त पत्र भी लिखा है।
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दासता पर यह रिपोर्ट इंटरनेशल लेबर ऑरगेनाइजेशन,यूएनए और ऑस्ट्रेलिया आधारित डब्ल्यूएफएफ ने जारी की है। इंटेलीजेंस ब्यूरो ने कहा है कि इस रिपोर्ट से भारत में हो रहे सतत विकास के लक्ष्य 8.7 पर सीधा असर पड़ेगा और इससे भारत की छवि और निर्यात को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है। यह मानव तस्करी, श्रम उन्मूलन कार्य को प्रभावित करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 14-18 मिलियन गुलाम है, जो विश्वभर के किसी भी देश में सबसे अधिक है। जबकि 2016 के सर्वे में एशिया पैसिफिक में 30 मिलियन और अकेले भारत में 18 मिलियन गुलाम बताए गए थे जबकि विश्वभर में गुलामों की गिनती 46 मिलियन की गई थी।