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Third Pole: आर्कटिक सर्कल द्वारा हिमालयी क्षेत्र के लिए पहल का नेतृत्व करने से भारत नाराज, कही यह बड़ी बात

Sun, 30 Oct 2022 04:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 30 Oct 2022 04:07 PM IST
सार

हिंदुकुश-हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बाद बर्फ का सबसे बड़ा संचयी क्षेत्र है। ऐसे में उसे तीसरा ध्रुव माना जाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि  जलवायु परिवर्तन के कारण बदल रही स्थितियां इस क्षेत्र में रहने वाले दो अरब से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
 

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India angry at Arctic Circle leading initiative for Himalayan region
उच्च हिमालयी क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तरी ध्रुव के आसपास के देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन आर्कटिक सर्कल ने हिमालयी क्षेत्र के लिए एक पहल की शुरुआत की है। इस पहल में संयुक्त अरब अमीरात भी उसका साथ दे रहा है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में आइसलैंड के रिक्जेविक में आयोजित आर्कटिक सर्कल असेंबली में 'द थर्ड पोल प्रोसेस' पर एक अलग सत्र में चर्चा की गई थी। इसमें जलवायु परिवर्तन और क्षेत्र पर इसके प्रभाव से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हिंदुकुश-हिमालयी आसपास के देशों के प्रतिनिधित्व के साथ एक हिमालयी परिषद शुरू करने के लिए कहा गया था। वहीं, भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी। भारत का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के लिए किसी भी पहल का नेतृत्व हिमालयी देशों द्वारा किया जाना चाहिए।   

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भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैठक में मौजूद भारतीय राजनयिकों ने तीसरे ध्रुव की प्रक्रिया के बारे में कड़ा विरोध जताया था। भारतीय राजनयिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के लिए किसी भी पहल की नेतृत्व आर्कटिक सर्कल को नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए किसी भी पहल का नेतृत्व हिमालयी देशों द्वारा किया जाना चाहिए।  
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गौरतलब है कि हिंदुकुश-हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बाद बर्फ का सबसे बड़ा संचयी क्षेत्र है। ऐसे में उसे तीसरा ध्रुव माना जाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि  जलवायु परिवर्तन के कारण बदल रही स्थितियां इस क्षेत्र में रहने वाले दो अरब से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
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इस खतरे को देखते हुए आर्कटिक सर्कल, यूएई के साथ, तीसरे ध्रुव क्षेत्र में सहयोग के आर्कटिक मॉडल को पेश करने की योजना बना रहा है। इसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, नेपाल और भूटान जैसे देश शामिल हैं। आर्कटिक सर्कल और संयुक्त अरब अमीरात के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रालय ने इस योजना को लेकर एक बयान भी जारी किया था। उसने कहा था कि आर्कटिक मॉडल को 2023 के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात में COP28 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण योगदान बनने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।  

बयान में यह भी कहा गया है कि इस मॉ़ल के लिए वर्षों से आर्कटिक सहयोग में शामिल पक्ष लेख और साक्षात्कार के माध्यम से अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके साथ ही तीसरे ध्रुव क्षेत्र और आर्कटिक से विशेषज्ञ और नीति निर्माता संबंधित क्षेत्रों से वर्तमान जानकारी साझा करके संवाद में योगदान देंगे।  


गौरतलब है कि आर्कटिक परिषद की स्थापना 1996 में हुई थी। यह आठ देशों कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, रूस और अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाला एक अंतर-सरकारी मंच है। गैर-आर्कटिक राष्ट्र जैसे फ्रांस, चीन, भारत, जर्मनी परिषद के पर्यवेक्षकों में से हैं।

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