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आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करेंगे भारत और इस्राइल
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 16 Nov 2016 04:37 AM IST
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भारत और इस्राइल ने आतंकवाद को दोनों देशों का संयुक्त दुश्मन करार देते हुए इस चुनौती से मिलकर मुकाबला करने की घोषणा की है। इस्राइल के राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की।
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इस दौरान पीएम मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसके खिलाफ जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत का पड़ोसी देश आतंकवाद को संरक्षण देने के साथ ही इसका पोषण भी कर रहा है। दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में जल संसाधन प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में समझौते पर सहमति बनी।
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वार्ता के बाद संयुक्त बयान में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इस्राइल दोनों देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। भारत के पड़ोस में आतंकवाद पनप रहा है। दुनिया को चाहिए कि वह आतंकवाद के पनाहगारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
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इस्राइल को भारत का सदियों पुराना मित्र देश बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश बीते कुछ सालों में रक्षा, कृषि, व्यापार सहित कई अन्य क्षेत्रों में और करीब आए हैं। पीएम ने इस दौरान संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता के लिए इस्राइल से मिले समर्थन के लिए रिवलिन को धन्यवाद दिया।
रिवलिन ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और आगे ले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में साथ बढ़ते हुए अच्छा परिणाम हासिल कर रहे हैं। रिवलिन ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की और कहा कि भारत की तरह इस्राइल भी आतंकवाद से पीड़ित देश है।
मेक इन इंडिया, मेक विद इंडिया के साथ
रिवलिन ने भारत और इस्राइल के बीच रक्षा समझौते के बढ़ते दायरे का जिक्र करते हुए कहा कि उनका देश इस संबंध में ‘मेक इन इंडिया, मेक विद इंडिया’ के पक्ष में है। इस्राइल हथियारों और आधुनिक सैन्य साजो-सामान का भारत का प्रमुख सप्लायर रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच ज्यादातर सौदे पर्दे के पीछे ही रहे हैं।
मोदी अगले साल जाएंगे इस्राइल
ऐसी संभावना है कि पीएम मोदी भारत और इस्राइल के बीच राजनयिक रिश्तों के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर 2017 के उत्तरार्द्ध में तेल अवीव जाएंगे। दोनों देशों के बीच 1992 में राजनयिक रिश्ते कायम हुए थे। वैसे भारत ने 1950 में ही इस्राइल को मान्यता दे दी थी।
मोदी अगले साल जाएंगे इस्राइल
ऐसी संभावना है कि पीएम मोदी भारत और इस्राइल के बीच राजनयिक रिश्तों के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर 2017 के उत्तरार्द्ध में तेल अवीव जाएंगे। दोनों देशों के बीच 1992 में राजनयिक रिश्ते कायम हुए थे। वैसे भारत ने 1950 में ही इस्राइल को मान्यता दे दी थी।
दोनों देशों के रिश्तों पर एक नजर
- भारत इस्राइल का भरोसेमंद सहयोगी है। दोनों राष्ट्रों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1992 में हुई और तब से रिश्ते तेजी से आगे बढ़े हैं।
- यूएनएससी में समर्थन : इस्राइल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
- व्यापार एवं साझेदारी : रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा कृषि, डेयरी, ऊर्जा, उच्च श्रेणी की प्रौद्योगिकी, सिंचाई की बेहतर तकनीकों एवं अन्य क्षेत्रों में इस्राइल भारत के साथ साझेदारी कर रहा है।
- रक्षा क्षेत्र में सहयोग : भारत इस्राइल से सैन्य साजो-सामान खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है। 1990 के मध्य से भारत और इस्राइल के बीच सैन्य संबंध सबसे अहम रहे हैं। बीते एक दशक के दौरान दोनों देशों
के बीच करीब 670 अरब रुपये का कारोबार हुआ है।
- भारत सालाना करीब 67 से 100 अरब रुपये के सैन्य सामान इस्राइल से आयात कर रहा है।
- इस्राइल मिसाइल, एंटी मिसाइल सिस्टम, यूएवी टोह लेने वाली तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और गोला-बारूद बड़ी मात्रा में भारत को मुहैया कराता है।
- मई 2009 और मार्च 2010 में इस्राइल ने भारत को 73.7 अरब रुपये में इल्यूशिन द्वितीय-76 से लैस फाल्कन एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) उपलब्ध कराया।
- सितंबर, 2014 में भारत ने इस्राइल से बराक-वन एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने की घोषणा की थी, यह सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में एक है।
भारत का इस्राइल से व्यापार -
वित्त वर्ष आयात निर्यात
2015-16 2,095.33 2,821.15
2014-15 2,328.04 3,289.85
2013-14 2,311.58 3,746.94
(मिलियन अमेरिकन डॉलर में)
- यूएनएससी में समर्थन : इस्राइल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
- व्यापार एवं साझेदारी : रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा कृषि, डेयरी, ऊर्जा, उच्च श्रेणी की प्रौद्योगिकी, सिंचाई की बेहतर तकनीकों एवं अन्य क्षेत्रों में इस्राइल भारत के साथ साझेदारी कर रहा है।
- रक्षा क्षेत्र में सहयोग : भारत इस्राइल से सैन्य साजो-सामान खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है। 1990 के मध्य से भारत और इस्राइल के बीच सैन्य संबंध सबसे अहम रहे हैं। बीते एक दशक के दौरान दोनों देशों
के बीच करीब 670 अरब रुपये का कारोबार हुआ है।
- भारत सालाना करीब 67 से 100 अरब रुपये के सैन्य सामान इस्राइल से आयात कर रहा है।
- इस्राइल मिसाइल, एंटी मिसाइल सिस्टम, यूएवी टोह लेने वाली तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और गोला-बारूद बड़ी मात्रा में भारत को मुहैया कराता है।
- मई 2009 और मार्च 2010 में इस्राइल ने भारत को 73.7 अरब रुपये में इल्यूशिन द्वितीय-76 से लैस फाल्कन एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) उपलब्ध कराया।
- सितंबर, 2014 में भारत ने इस्राइल से बराक-वन एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने की घोषणा की थी, यह सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में एक है।
भारत का इस्राइल से व्यापार -
वित्त वर्ष आयात निर्यात
2015-16 2,095.33 2,821.15
2014-15 2,328.04 3,289.85
2013-14 2,311.58 3,746.94
(मिलियन अमेरिकन डॉलर में)