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भारत-इस्राइल संबंध: अंतरिक्ष संबंधों को बढ़ाने पर दोनों देशों की नजर, इसरो ने भी कही यह बात

Wed, 23 Feb 2022 10:15 PM IST
मेघा चौधरी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरु Published by: मेघा चौधरी Updated Wed, 23 Feb 2022 10:15 PM IST
सार

भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने इसरो मुख्यालय में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग में सचिव एस सोमनाथ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने अपने अंतरिक्ष संबंधों को बढ़ाने को लेकर चर्चा की।

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India and Israel: both the countries to expand its space corporation
इसरो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा घोषित नए सुधारों को ध्यान में रखते हुए भारत और इस्राइल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अतिरिक्त सहयोग के लिए मंथन किया। इस संबंध में भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने इसरो प्रमुख एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस. सोमनाथ के साथ मुलाकात की। 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां मौजूदा चल रहे कार्यक्रमों के अतिरिक्त आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के नए क्षेत्र तलाश करेंगी। इसके लिए इसरो और इस्राइल स्पेस एजेंसी (आईएसए) लगातार संपर्क में हैं।
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दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने भविष्य में साथ काम करते हुए वर्ष 2022 में भारत की आजादी की 75वीं सालगिरह और भारत-इस्राइल के कूटनीतिक संबंधों के 30 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत के प्रक्षेपण स्थल से इस्राइली उपग्रह को प्रक्षेपित के लिए संभावित अवसरों पर भी चर्चा की। पिछले साल, इसरो और आईएसए ने चल रही गतिविधियों में शामिल छोटे उपग्रहों में विद्युत संचालक शक्ति तंत्र और जियो-लियो समेत अन्य कार्यक्त्रस्मों की भी समीक्षा की थी। 
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वहीं, बताया जा रहा है कि अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भारत की नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति विदेशी कंपनियों को सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप अपना बुनियादी ढांचा स्थापित करने की अनुमति दे सकती है। इसरो के अंतरिक्ष अवसर संबंधित क्षमता निर्माण कार्यक्रम कार्यालय (सीबीपीओ) के निदेशक एन सुधीर कुमार ने कहा कि अगर कोई केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप अपना खुद का बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए यहां आना चाहता है, तो हम इसे लेकर उत्साहित हैं।


उन्होंने यह बात विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित भारत-सिंगापुर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए विभिन्न नीतियां परामर्श के चरण में हैं, जिनमें दूर संवेदी डेटा का उपयोग, अंतरिक्ष संचार, मानव अंतरिक्ष नीति, उद्योग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल हैं। अंतरिक्ष परिवहन नीति उद्योग को अपने प्रक्षेपक, लॉन्च पैड, प्रक्षेपण प्रणाली के साथ-साथ उपग्रह भी रखने की अनुमति देगी।

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