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भारत-अमेरिका के बीच जल्द दूर होगा व्यापार गतिरोध, कुछ दिनों में एलान संभव

Mon, 07 Oct 2019 09:02 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 07 Oct 2019 09:02 AM IST
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India and America are close to trade deal as two sides agreeing to allow more goods to be shipped
पीएम मोदी और ट्रंप - फोटो : Social media

भारत और अमेरिका के बाच एक व्यापार समझौता होने वाला है। दोनों देश अपने बीच जारी मतभेदों को कम करने और एक-दूसरे के यहां अधिक उत्पाद भेजने पर सहमत हो गए हैं। इसके अलावा विवादास्पद उत्पादों पर लगे आयात शुल्क को घटाया जाएगा जिसमें हार्ले डेविडसन भी शामिल है। 

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माना जा रहा है कि इस व्यापार समझौते की घोषणा अगले हफ्ते होगी। इस समझौते का खाका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई दूसरी मुलाकात के दौरान खींचा गया। सूत्रों का कहना है कि इसकी घोषणा वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर कर सकते हैं क्योंकि अमेरिका में चुनावी तैयारियां होनी शुरू हो चुकी हैं।
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सूत्रों का कहना है कि व्यापार समझौता लगभग तय है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार रिश्तों में तब खटास आ गई थी जब भारत सरकार से हार्ट स्टेंट और नी इंप्लांट पर आने वाले खर्च को भारत सरकार ने नियंत्रण की सूची में ले आई थी जिसके कारण यह अपने पूर्व निर्धारित दाम से कम हो गया था। 
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भविष्य में, चिकित्सा उपकरण जिन्हें मूल्य नियंत्रण में लाया जाता है या जिनके व्यापार मार्जिन कम हो जाते हैं उन्हें कार्व आउट का फायदा नहीं मिलेगा। बदले में अमेरिका से अपेक्षा की जा रही है कि वह कुछ भारतीय निर्यातों को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (अमेरिकी व्यापारिक वरीयता कार्यक्रम) के तहत अमेरिकी उत्पादों के बराबर की छूट देगा। इसे अमेरिकी प्रशासन ने इसी साल भारत से वापस ले लिया था क्योंकि उसने कई अमेरिकी उत्पादों जिसमें सेब, बादाम और अखरोट पर लगने वाले टैक्स (कर) को बढ़ा दिया था। 

नए समझौते के तहत भारत के कुछ कृषि उत्पाद जैसे भी आम और अनार को अमेरिकी बाजार में आसानी से पहुंच मिल जाएगी। वहीं भारत अल्फा अल्फा हे के आयात पर अमेरिकी चिंताओं को संबोधित करेगा। भारत ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वह अमेरिका की कई विषयों पर जारी चितांओं को दूर करने के लिए तैयार है।

गोयल और लाइटहाइजर के बीच पिछले तीन महीने से हो रही विस्तृत बातचीत की वजह से दोनों देश एक दूसरे की चिंताओं, रेड लाइनों को बेहतर तरीके से जान पाए हैं। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, 'अमेरिका कई मुद्दों पर हमारे साथ खड़ा रहा है। जिसमें आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता शामिल है।'

5 जून को अमेरिका ने भारत से छीना था विशेष तरजीह वाले देश का दर्जा

इस साल जून में अमेरिका ने भारत को विशेष तरजीह वाले देशों की सूची से बाहर कर दिया था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उन्हें भारत से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। उनका कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है।

ट्रंप ने अपने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा था, 'मैंने ये निर्धारित किया है कि भारत से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। तो भारत का लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा 5 जून को हटाना उचित होगा।' ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों की उस दलील को भी नजरअंदाज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि इससे अमेरिकी कारोबार को हर साल 300 मिलियन डॉलर टैरिफ का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

अमेरिकी व्यापारिक वरीयता कार्यक्रम (जीएसपी) क्या है ?

 अभी तक भारत जीएसपी (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस) के तहत सबसे बड़ा लाभार्थी देश माना जाता था, लेकिन ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई नई दिल्ली के साथ उसके व्यापार संबंधी मुद्दों पर सख्त रवैये को दिखा रही है। जीएसपी को विभिन्न देशों से आने वाले हजारों उत्पादों को शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।

बीते साल जिन उत्पादों की शुल्क मुक्त आयात की रियायत रद्द की गई थी, उनमें भारत के 50 उत्पाद शामिल थे। बता दें कि साल 2017 में जीएसपी के तहत भारत ने अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर से अधिक का कर-मुक्त निर्यात किया था। अमेरिका के कानून के अनुसार ये बदलाव अधिसूचना जारी होने के दो महीने बाद से लागू हो जाएगा। 

ट्रंप ने 4 मार्च को कहा था कि अमेरिका भारत का नाम उन देशों की सूची से बाहर कर देगा जो सामान्य कर-मुक्त प्रावधानों (जीएसपी) कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं। 60 दिनों का ये नोटिस पीरियड 3 मई को खत्म हुआ है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि भारत अब वैधानिक पात्रता मानदंडों का पालन नहीं कर रहा है। बीते साल अमेरिका ने अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी।

कब शुरू हुआ था जीएसपी प्रोग्राम

जीएसपी प्रोग्राम साल 1970 को शुरू हुआ था, तभी से भारत इसका लाभ उठा रहा है। भारत इसका सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। इस फैसले का भारत पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। यह कार्यक्रम अमेरिका का सबसे बड़ा और अमेरिकी व्यापारिक वरीयता कार्यक्रम (अमेरिकी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस) है। इसकी सूची में शामिल देशों के हजारों उत्पादों को अमेरिका में कर-मुक्त छूट की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था।
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