INDIA alliance: बात बिगड़ी तो लोकसभा चुनाव में हो सकती है I.N.D.I.A गठबंधन की फ्रेंडली फाइट! बन रहे ऐसे हालात
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विस्तार
अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक ही चलता रहा तो विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA में सीटों का बंटवारा जल्द हो जाएगा। लेकिन जिस तरह के सियासी समीकरण बन रहे हैं, उससे टिकट बंटवारे पर आम सहमति पेचीदा भी होती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक गठबंधन में हालात कुछ इस तरह के हो रहे हैं कि कुछ राज्यों में परिस्थितियां 'फ्रेंडली फाइट' की भी बनती जा रही हैं। यानी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टियों का तो गठबंधन होगा, लेकिन कुछ राज्यों में संभवतया ये पार्टियां एक दूसरे के आमने-सामने भी आ सकती हैं। हालांकि विपक्षी दलों के बड़े नेता अभी ऐसे हालात में बीच का रास्ता तलाश कर जल्द से जल्द सीटों के बंटवारे पर आम सहमति बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
विपक्षी दलों के गठबंधन समूह I.N.D.I.A में सबसे ज्यादा मशक्कत टिकट बंटवारे को लेकर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ राज्यों में तो टिकट बंटवारे का रास्ता बहुत आसान बना हुआ है, जबकि कई राज्यों में यह बड़ी समस्या भी बनता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिन राज्यों में बगैर किसी मशक्कत के सीट बंटवारे की राह आसान नजर आ रही है, उसमें तमिलनाडु, झारखंड, पुडुचेरी समेत बिहार और महाराष्ट्र प्रमुखता से शामिल हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और झारखंड राज्यों में लोकसभा की 54 सीटें आती हैं, इसमें 39 सीटें तो सिर्फ तमिलनाडु से ही हैं। यहां पर डीएमके, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों समेत कई छोटे दल पिछले लोकसभा चुनाव में भी सियासी मैदान में एक साथ थे और विधानसभा के चुनाव में भी एक साथ थे। राजनीतिक विश्लेषक एन. सुदर्शन कहते हैं कि इसलिए इस राज्य में गठबंधन को सीट बंटवारे में बहुत ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। महाराष्ट्र और बिहार में भी गठबंधन की ही सरकारें आसानी से चली हैं। इसलिए इन राज्यों में भी दिक्कत नजर नहीं आ रही है।
सियासी जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु की तरह ही पुडुचेरी और झारखंड में भी गठबंधन में शामिल दलों का पहले से ही सामंजस्य बना हुआ है। पुडुचेरी में जहां डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन है, वहीं झारखंड में जेएमएम और राजद समेत कांग्रेस मिलकर सियासी मैदान में चुनाव लड़ते आए हैं। इसलिए यहां पर भी गठबंधन के सियासी दलों में टिकट बंटवारे को लेकर बहुत मशक्कत करने की जरूरत नजर नहीं आ रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिन राज्यों में गठबंधन में शामिल सियासी दल पहले से ही आपस में मिलकर चुनाव लड़ते आए हैं, उन राज्यों में परिस्थितियां अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा बेहतर और आसान नजर आ रही हैं। लेकिन कई राज्य ऐसे हैं, जिसमें गठबंधन में शामिल दल आपस में कांटे की टक्कर से सियासी लड़ाई लड़ते आए हैं। उन राज्यों में गठबंधन को सबसे ज्यादा टिकट बंटवारे पर मशक्कत करने की जरूरत लग रही है।
सूत्रों की मानें तो गठबंधन में टिकट बंटवारे पर उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और केरल में नए समीकरणों के लिहाज से बहुत कुछ समायोजन करने और फिर उसी आधार पर टिकट बंटवारे की योजना बन रही है। सूत्रों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से टिकट बंटवारे पर टकराहट की स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें आती हैं। इसमें फिलहाल प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ही है। लेकिन INDIA गठबंधन में सपा, कांग्रेस, आरएलडी, अपना दल (कृष्णा पटेल) और पश्चिम में दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक यहां पर सीटों को लेकर पेंच इसलिए फंसा है, क्योंकि समाजवादी पार्टी 20 से ज्यादा सीटें विपक्षी दलों को नहीं देना चाहती है। जबकि कांग्रेसी आरएलडी और अपना दल समेत चंद्रशेखर आजाद की पार्टी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। इसमें 25 सीटें कांग्रेस और 12 सीटें राष्ट्रीय लोक दल की ओर से मांग हो रही है।
इसी तरह टिकटों का सियासी पेंच दिल्ली, पंजाब पश्चिम बंगाल और केरल में भी फंसता हुआ नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल में 42, पंजाब में 14 और केरल में 20 लोकसभा सीटें हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अभिजय बनर्जी कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और लेफ्ट के बीच में सीधी प्रतिस्पर्धा रही है। जबकि यहां के कुछ इलाकों में कांग्रेस का भी अपना मजबूत प्रभाव बना हुआ है। क्योंकि यहां पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, इसलिए वह सीटों के लिहाज से भी अपनी मजबूत दावेदारी कर रही हैं। पंजाब में और दिल्ली में कांग्रेस विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में भी है और इन दोनों राज्यों में प्रमुख सियासी दल भी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में जिस तरीके से पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दो नंबर पर रही थी, इसलिए वह यहां पर सीटों में अपनी मजबूत दावेदारी कर रही है। पंजाब में लगातार आम आदमी पार्टी की ओर से आवाज उठ रही है कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर सियासी मैदान में किस्मत नहीं आजमाना चाहती। इसी तरह केरल में कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच में टिकटों की टकराहट नजर आ रही है।
हालांकि गठबंधन से जुड़े सूत्रों का मानना है कि जल्द ही कुछ समय में सीटों के बंटवारे का पूरा फॉर्मूला निकालकर टिकट की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। सूत्रों का मानना है कि कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर टिकटों के बंटवारे में आपसी सामंजस्य बनता हुआ बिल्कुल नहीं दिख रहा है, इसमें पंजाब, दिल्ली और केरल समेत उत्तर प्रदेश शामिल हैं। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अगर इन राज्यों में आपसी सामंजस्य पर सीटों का बंटवारा नहीं होता है, तो आने वाले लोकसभा के चुनाव में 'फ्रेंडली फाइट' भी हो सकती है। यानी कि जो दल एक राज्य में INDIA गठबंधन के बैनर से चुनाव लड़ेंगे, वहीं दूसरे राज्य में आमने-सामने भी चुनावी मैदान में हो सकते हैं। हालांकि विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल एक प्रमुख नेता बताते हैं कि इस तरीके की परिस्थितियां फिलहाल नहीं आने वाली हैं। उनका कहना है कि उनके गठबंधन में शामिल नेता इन सभी सियासी मुद्दों का हल निकाल कर जल्द ही चुनावी मैदान में प्रत्याशियों की घोषणा करने वाले हैं।