Independence day 2024: पेट्रोल से दूध तक, आलू से सोना तक, जानें 77 साल में कितना बदला भारत
Independence day 2024: देश आज अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के बाद भारत ने विकास का लंबा सफर तय किया है। बंटवारे के बाद कई युद्ध, आतंकी हमले, सूखा, आपातकाल से लेकर कोरोना महामारी तक, कई तरह की कठिनाईयों का भारत ने सामना किया, लेकिन आज भी देश मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
15 अगस्त को देश को आजाद हुए 77 साल पूरे हो गए हैं। इन वर्षों में भारत ने पूरी दुनिया में खूब नाम कमाया। कई उपलब्धियां भारत के नाम दर्ज हुईं। विकास के मामले में भी भारत काफी आगे बढ़ गया। आज दुनिया में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था भारत की है। आजादी के साथ अंग्रेज हमारा बंटवारा भी कर गए। इसके बाद कई युद्ध, आतंकी हमले, सूखा, आपातकाल से लेकर कोरोना महामारी तक, कई तरह की कठिनाइयों का देश ने सामना किया, लेकिन आज भी भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में हम आज आपको बताएंगे कि इन 77 साल ने आपकी जिंदगी में क्या-क्या बदलाव किए? आपके खाने की थाली में क्या बदला? आपके दफ्तर में क्या बदलाव हुआ? मनोरंजन के तरीके में क्या परिवर्तन आया? आइए जानते हैं...
पहले जानते हैं भारत की अर्थव्यवस्था कहां तक पहुंची?
1947 में जब भारत आजाद हुआ था, तब देश की जीडीपी 2.7 लाख करोड़ रुपये थी और ये दुनिया की जीडीपी के तीन फीसदी से भी कम थी। वहीं आज, 2024 में देश की जीडीपी का मौजूदा मूल्य लगभग 272.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत की साक्षरता दर 1947 में लगभग 12 प्रतिशत थी आज 74 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अगर 1960 से 2021 तक के जीडीपी ग्रोथ पर नजर डालें तो 1966 से पहले औसतन चार फीसदी की रफ्तार से जीडीपी बढ़ती थी। 2015 के बाद से अब लगातार छह फीसदी से ज्यादा जीडीपी की ग्रोथ रेट रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी 6.5 से 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
ऐसे अर्थव्यवस्था में होता रहा बदलाव
-
1947 से 1980 तक देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ नौ फीसदी से लेकर -5 फीसदी तक रही। यानी कई बार इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिले।
-
1981 से 1991 के बीच एक बार तो ग्रोथ रेट शून्य से भी नीचे पहुंच गई। अधिकतम ग्रोथ नौ फीसदी तक दर्ज हुई।
-
1992 से 2019 तक अर्थव्यवस्था का विकास दर चार से आठ फीसदी तक बनी रही। इस दौर में भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर हुई और मजबूत भी।
-
वर्ष 2023-24 में मौजूदा कीमतों पर देश की जीडीपी ₹295.35 लाख करोड़ होने का अनुमान है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हम कहां तक पहुंचे?
-
1950-51 में भारत ने 1.27 अरब डॉलर का आयात किया और 1.26 अरब डॉलर का निर्यात किया।
-
1975-76 में 6.08 अरब डॉलर का आयात और 4.66 अरब डॉलर का निर्यात किया।
-
1990-91 में 24 अरब डॉलर का आयात किया और 18 अरब डॉलर का निर्यात किया।
-
2002-03 में 50 अरब डॉलर का आयात और 44 अरब डॉलर का निर्यात किया।
-
वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत के कुल 776.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात और 854.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आयात का अनुमान जताया गया है।
महंगाई में आया जमीन-आसमान का अंतर
आजादी से लेकर अब तक जहां, एक ओर देश ने खूब विकास किया वहीं महंगाई भी चरम सीमा पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजों से लेकर सोना, पेट्रोल-डीजल और सोना तक सब कुछ महंगा हो गया। आइए जानते हैं रोजमर्रा की चीजों में कितना बदलाव हुआ?
|
वस्तु/पदार्थ |
1947 में कितना दाम था? |
अब क्या कीमत है? |
|
सोना (10 ग्राम) |
88.62 रुपये (10 ग्राम) |
72,430 |
|
पेट्रोल (एक लीटर) |
27 पैसे |
103.44 रुपये |
|
चावल (प्रति किलो) |
12 पैसे |
40.16 रुपये |
|
चीनी (प्रति किलो) |
40 पैसे |
44.78 रुपये |
|
आलू (प्रति किलो) |
25 पैसे |
37.12 रुपये |
|
दूध (एक लीटर) |
12 पैसे |
59.12 रुपये |
गरीबों की संख्या भी कम हो गई
आजादी के वक्त देश की 70 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी। आजादी के बाद इसमें काफी बदलाव हुआ। 1977 तक ये संख्या घटकर 63%, 1991 तक 50% जनसंख्या गरीब थी। 2011 के आंकड़ों के अनुसार देश में फिलहाल 22.5 प्रतिशत लोग गरीबी में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत में 15 वर्षों (2005-06 से 2019-21) की अवधि के भीतर 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। रिपोर्ट बताती है देश में 2005-2006 से 2019-2021 के दौरान 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। 2005-2006 में जहां गरीबों की आबादी 55.1 प्रतिशत थी वह 2019-2021 में घटकर 16.4 प्रतिशत हो गई।