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आजादी के 75वें साल में देश: हमसे दो साल बाद आजाद हुआ चीन कई मामलों में आगे, जानें कहां तक पहुंचे हमारे पड़ोसी मुल्क
Sun, 15 Aug 2021 02:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 15 Aug 2021 02:49 PM IST
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भारत, चीन और पाकिस्तान की तुलना।
- फोटो :
Amar ujala
विस्तार
आबादी के लिहाज से चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश भारत है। दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी भी हैं। भारत और पाकिस्तान 1947 में आजाद हुए, जबकि चीन 1949 में स्वतंत्र हुआ। तब से यहां कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है। एक समय था, जब भारत और चीन की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में खास अंतर नहीं था। बात 1980 की करें तो भारत की जीडीपी 186 अरब डॉलर थी और चीन की 191 अरब डॉलर। अब दोनों देशों की जीडीपी में करीब सात गुना का अंतर आ चुका है। सिर्फ जीडीपी ही नहीं, बल्कि और भी कई मायनों में चीन हमसे कहीं ज्यादा आगे निकल गया है। उसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि चीन ने अपनी आबादी का इस्तेमाल किया, जबकि भारत में बेरोजगारी हमेशा समस्या बनी रही। पांच बिंदुओं में जानते हैं कि आजादी के 75वें साल में भारत और उसके पड़ोसी देश आज कहां खड़े हैं...1. आबादी: अब ज्यादा अंतर नहीं
भारत और चीन की आबादी में अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया है। वेबसाइट वर्ल्डओमीटर के मुताबिक, चीन की आबादी 144 करोड़ है और भारत की 139 करोड़। दोनों देशों में पुरुष-महिला आबादी में भी थोड़ा अंतर है। सबसे बड़ा अंतर शिक्षित और अशिक्षित आबादी में हैं। भारत की करीब 34 फीसदी आबादी अशिक्षित है, जबकि चीन में यह आंकड़ा महज ढाई फीसदी है।
जनसंख्या के हिसाब से दोनों देश भले ही आसपास नजर आते हैं, लेकिन जनसंख्या घनत्व में भारत चीन से काफी आगे निकल चुका है। दरअसल, चीन का क्षेत्रफल 96 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि भारत का इलाका 33 लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम है।
दूसरे पड़ोसी देशों की बात करें, तो पाकिस्तान की आबादी करीब 22.08 करोड़, बांग्लादेश की 16.46 करोड़, म्यांमार की 5.44 करोड़, नेपाल की 2.91 करोड़ और श्रीलंका की 2.14 करोड़ है। जनसंख्या घनत्व के मामले में बांग्लादेश टॉप पर है।
जनसंख्या के हिसाब से दोनों देश भले ही आसपास नजर आते हैं, लेकिन जनसंख्या घनत्व में भारत चीन से काफी आगे निकल चुका है। दरअसल, चीन का क्षेत्रफल 96 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि भारत का इलाका 33 लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम है।
दूसरे पड़ोसी देशों की बात करें, तो पाकिस्तान की आबादी करीब 22.08 करोड़, बांग्लादेश की 16.46 करोड़, म्यांमार की 5.44 करोड़, नेपाल की 2.91 करोड़ और श्रीलंका की 2.14 करोड़ है। जनसंख्या घनत्व के मामले में बांग्लादेश टॉप पर है।
2. अर्थव्यवस्था: चीन की जीडीपी हमसे 7 गुना ज्यादा
अब बात करते हैं पड़ोसी मुल्कों की अर्थव्यवस्था की। आंकड़ों पर गौर करें तो 2020 में चीन की जीडीपी 14,722 बिलियन यूएस डॉलर रही, जबकि भारत की जीडीपी 2708 बिलियन यूएस डॉलर दर्ज की गई। न सिर्फ जीडीपी, बल्कि पर कैपिटा इनकम में भी चीन हमसे पांच गुना आगे है। चीन के लोगों की पर कैपिटा इनकम 10.483 यूएस डॉलर से ज्यादा है और भारत में हर व्यक्ति की सालाना कमाई 1964 यूएस डॉलर ही है। अन्य पड़ोसी देशों की जीडीपी की बात करें तो पाकिस्तान में आंकड़ा 220 बिलियन यूएस डॉलर, बांग्लादेश में 329 बिलियन यूएस डॉलर, म्यांमार में 81 बिलियन यूएस डॉलर और श्रीलंका में 80 बिलियन यूएस डॉलर के करीब है।
इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। पिछले दो साल में भारत और उसके पड़ोसी देशों की आर्थिक तुलना होती रही है। सबसे ज्यादा चर्चा में भारत, चीन और बांग्लादेश ही रहे। इसमें चीन पहले, भारत दूसरे और बांग्लादेश तीसरे पायदान पर रह। इसके बाद कोरोना ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया, जिसके बाद ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर अजब स्थिति उस वक्त बनी, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से ज्यादा रहने का अनुमान जताया।
पिछले साल अक्टूबर में आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,877 डॉलर (नॉमिनल टर्म्स) रहने का अनुमान जताया। वहीं, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,888 डॉलर रहने की बात कही। इसके अलावा चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10,839 डॉलर रहने का अनुमान जताया गया।
इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। पिछले दो साल में भारत और उसके पड़ोसी देशों की आर्थिक तुलना होती रही है। सबसे ज्यादा चर्चा में भारत, चीन और बांग्लादेश ही रहे। इसमें चीन पहले, भारत दूसरे और बांग्लादेश तीसरे पायदान पर रह। इसके बाद कोरोना ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया, जिसके बाद ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर अजब स्थिति उस वक्त बनी, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से ज्यादा रहने का अनुमान जताया।
पिछले साल अक्टूबर में आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,877 डॉलर (नॉमिनल टर्म्स) रहने का अनुमान जताया। वहीं, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,888 डॉलर रहने की बात कही। इसके अलावा चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10,839 डॉलर रहने का अनुमान जताया गया।
3. डिफेंस: अमेरिका के बाद चीन दूसरे नंबर पर
चीन ने 5 मार्च 2021 को अमेरिका और भारत सहित कई देशों से तनाव के बीच अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की। उसने बजट में करीब 6.8 फीसदी का इजाफा किया। चीन का साल 2021 का रक्षा बजट अब 209 अरब डॉलर हो गया, जबकि दुनिया में सबसे बड़ा रक्षा बजट अमेरिका का है। 2019 में इसका रक्षा बजट 732 बिलियन डॉलर था। अमेरिका सेना पर अपनी जीडीपी का 3.4 फीसदी हिस्सा खर्च करता है। 71.1 बिलियन डॉलर के रक्षा बजट के साथ भारत तीसरे नंबर पर है। इस मामले में पाकिस्तान टॉप-10 देशों में भी नहीं है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए पाकिस्तान का डिफेंस बजट 1.289 ट्रिलियन (1,28,900 करोड़ रुपये) था, जो पिछले साल की तुलना में 4.7 प्रतिशत ज्यादा था।
4. शिक्षा: भारत अपने पड़ोसियों के पीछे
विश्व में साक्षरता के महत्व को ध्यान में रखते हुए ही संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 17 नवंबर 1965 को 8 सितंबर का दिन विश्व साक्षरता दिवस के लिए निर्धारित किया था। 1966 में पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया और तब से हर साल इसे मनाए जाने की परंपरा है। संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक समुदाय को साक्षरता के प्रति जागरूक करने के लिए इसकी शुरुआत की थी। प्रत्येक वर्ष एक नए उद्देश्य के साथ विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
भारत ने भी सभी को शिक्षित करने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसका असर भी दिखा है। 2001 में जहां भारत की शिक्षा दर 64.83 थी, वो 2011 में 74.04 फीसदी हो गई। इसके बावजूद हमें प्रयास तेज करने होंगे, क्योंकि शिक्षा के मामले में हम चीन, श्रीलंका और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों से काफी पीछे हैं।
वहीं, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश शिक्षा के मामले में भारत से पीछे हैं। चीन में 2015 में साक्षरता दर 96.4 फीसदी, म्यांमार में 93.1 फीसदी और श्रीलंका में 92.6 फीसदी थी। इसके अलावा 2015 में नेपाल की साक्षरता दर 64.7 फीसदी, बांग्लादेश की 61.5 फीसदी और पाकिस्तान की साक्षरता दर 60 फीसदी थी।
भारत ने भी सभी को शिक्षित करने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसका असर भी दिखा है। 2001 में जहां भारत की शिक्षा दर 64.83 थी, वो 2011 में 74.04 फीसदी हो गई। इसके बावजूद हमें प्रयास तेज करने होंगे, क्योंकि शिक्षा के मामले में हम चीन, श्रीलंका और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों से काफी पीछे हैं।
वहीं, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश शिक्षा के मामले में भारत से पीछे हैं। चीन में 2015 में साक्षरता दर 96.4 फीसदी, म्यांमार में 93.1 फीसदी और श्रीलंका में 92.6 फीसदी थी। इसके अलावा 2015 में नेपाल की साक्षरता दर 64.7 फीसदी, बांग्लादेश की 61.5 फीसदी और पाकिस्तान की साक्षरता दर 60 फीसदी थी।
5. स्वास्थ्य: यहां हमारी हालत कुछ ठीक नहीं
2019 के वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सूचकांक के अनुसार, 195 देशों में भारत 57वें स्थान पर है। सूचकांक से यह भी पता चलता है कि अधिकतर देश किसी भी बड़े संक्रामक रोग से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं। इस सूची में केवल 13 देश है, जो शीर्ष पर रहे हैं। इनमें अमेरिका पहले स्थान पर है। बता दें कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सूचकांक विश्व स्तर पर महामारी और महामारी के खतरों का पहला व्यापक मूल्यांकन है। ये सूचकांक स्वास्थ्य की आपात स्थितियों को रोकने और उनका निराकरण करने के लिए प्रत्येक देश की क्षमता का आकलन करता है। इसका निष्कर्ष 140 सवालों के जवाब पर आधारित होता है।
- वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक: डब्ल्यूईएफ ने 2019 में कहा था कि भारत का स्वास्थ्य जीवन प्रत्याशा (healthy life expectancy) के मामले में सूचकांक काफी निराशाजनक है। इसमें भारत 109वें स्थान पर है। इस इंडेक्स के लिए 141 देशों का सर्वे किया गया था। इससे पता लगता है कि भारत जीवन प्रत्याशा के मामले में दुनिया के देशों से बहुत पीछे है।
- ‘लैंसेट’ में एक अध्ययन के मुताबिक: 2018 में मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक उनकी पहुंच के मामले में भारत को विश्व के 195 देशों में 145वें पायदान पर बताया गया था। अध्ययन का चौंकाने वाला पक्ष ये है कि भारत 195 देशों की सूची में अपने पड़ोसी देश चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से भी पीछे था।
- ‘ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज’ के मुताबिक: 2018 में ही ‘ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज’ के रिसर्च में पाया गया कि स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और गुणवत्ता मामले में वर्ष 1990 के बाद से भारत की स्थिति में सुधार हुए हैं। 2016 में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और गुणवत्ता के मामले में भारत को 41.2 अंक मिले थे, जबकि साल 1990 में सिर्फ 24.7 अंक मिले थे। भारत के पड़ोसी देशों में भूटान को 85वां, पाकिस्तान को 105वां, नेपाल को 111वां, तथा बांग्लादेश को 113वां स्थान प्राप्त हुआ था।
6. व्यापार: चीन की तुलना में कहां खड़ा है भारत?
अगर व्यापार की बात करें तो 2005 में चीन का व्यापार 8 अरब डॉलर था और 2018 में यह 52 अरब डॉलर पर पहुंच गया। ब्रुकिंग्स इंडिया के मुताबिक, दुनिया में सबसे कम आर्थिक गतिविधियां दक्षिण एशिया में होती हैं। वैश्विक व्यापार में इस क्षेत्र की भागीदारी 5 फीसदी से भी कम है। चीन ने 2008 में आए वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान थोड़ी गिरावट का सामना किया, लेकिन अपने व्यापार में लगातार वृद्धि की। 2014 में चीन का व्यापार 60.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत ने इसका लगभग एक तिहाई यानी 24.70 अरब डॉलर का ही कारोबार किया। वहीं, दक्षिण एशिया के साथ चीन का व्यापार वॉल्यूम लगातार बढ़ा है। पाकिस्तान को छोड़ दें, तो यह अंतर लगभग आधा हो जाता है। इसके लिए भी 2006 में अमल लाया गया चीन-पाकिस्तान मुक्त व्यापार समझौते जिम्मेदार है, जिसने दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी वृद्धि की।