फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Increasing water crisis in India, Drought and exploitation of ground water source is prime reason

बूंद-बूंद को तरसने लगा भारत, गर्मी के तपन के साथ और बढ़ेगी प्यास

Wed, 30 May 2018 05:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 30 May 2018 05:12 PM IST
विज्ञापन
Increasing water crisis in India, Drought and exploitation of ground water source is prime reason
WATER-CRISIS
दुनिया तेजी से विकास कर रही है और इसी के साथ कई ऐसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं जो मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण के साथ ही पिछले कुछ दशकों में तापमान और जल संकट बेहद बड़ी समस्या बनकर सामने आए हैं। दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां गर्मी और जल संकट की वजह से लोग पलायन कर चुके हैं। लेकिन दुनिया ही क्यों, हमारे देश भारत में भी ऐसे क्षेत्र और राज्य हैं, जहां सूखा और पानी की कमी के चलते मौत सा सन्नाटा पसरा हुआ है। बुंदेलखंड और उड़ीसा में ऐसे कई क्षेत्र हैं। हाल के वर्षों में जल संकट कई और राज्यों में फैला है। देश की राजधानी दिल्ली सहित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश ऐसे प्रमुख सूबे हैं, जहां तेजी से पानी की समस्या सिर उठा रही है।
विज्ञापन


पानी की कीमत क्या होती है, यह आपको भयंकर सूखे की मार झेल चुके महाराष्ट्र के लातूर जिले के बाशिंदों से पता चल सकता है। दो साल पहले इस जिले में पानी की ऐसी किल्लत हुई थी जिसका अंजाम खून-खराबे तक पहुंच गया था। जिन लोगों के पास पानी था, वो खुद को भगवान से कम नहीं मान रहे थे। किल्लत दूर करने के लिए भारतीय रेल से पानी के टैंकर मंगाए गए थे। रोजाना दस टैंकर वाली ट्रेन से इलाके की प्यास बुझाने का इंतजाम किया गया था। लातूर जिला समुद्र तल से 666 मीटर की ऊंचाई पर बसा होने के कारण हमेशा पानी की किल्लत झेलता है। इस किल्लत की सबसे बड़ी वजह कम बारिश और मांजरा डैम का गिरता जल-स्तर है।
विज्ञापन


इन सबके बीच कुछ राज्य तो ऐसे हैं कि जहां की महिलाएं बूंद-बूंद पानी के लिए 12 से 25 किलोमीटर तक की दूरी तय कर रही हैं। देश के पूर्व से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूरा भारत पानी के लिए तरस रहा है। दिल्ली के कई क्षेत्रों में दो दिनों में एक बार टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है लेकिन यह नाकाफी है। द्वारका जैसे हाईफाई इलाके से लेकर, संगम विहार, मदनगीर, बसंत कुंज, सीमापुरी, बुराड़ी, छतरपुर के गांव तक पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।    
विज्ञापन
विज्ञापन


असल में, पानी का यह संकट और बढ़ेगा। देश के 91 जलाशयों में अब महज 20 फीसदी पानी बचा है और उनमें से 77 में जलस्तर 40 फीसदी या कम बचा है। यह आंकड़े केंद्रीय जल आयोग ने जारी किए हैं। इन जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है और यह बात केंद्रीय जल आयोग के पिछले तीन महीने के आंकड़ों से साबित होती है। 10 मई को 77 जलाशयों में जलस्तर इसकी सामान्य क्षमता (फुल रिजर्वॉयर लेवल यानी एफआरएल) के 40 या उससे कम तक पहुंच गया है। सात दिन पहले ऐसे जलाशयों की संख्या 73 थी। दो महीने पहले 40 फीसदी वाले जलाशयों की संख्या 60 फीसदी थी अब देश के 85 फीसदी जलाशय इस वर्ग में आ गए हैं।

देश के 18 राज्यों में मौजूद जलाशयों में पिछले तीन महीनों में लगातार पानी के स्तर में कमी आ रही है। हिमाचल, उत्तराखंड, तमिलनाडु और तेलंगाना में इसका सबसे अधिक असर है और आंकड़े बात रहे हैं कि पूर्व की तरफ बहने वाली नदियों और बेसिन के लिहाज से तापी, सिंधु, कृष्णा और कावेरी नदियों के जलाशयों पर सबसे बुरा असर दिख रहा है।

बढ़ता पानी संकट

पानी पर केंद्र की सरकारों सहित राज्य सरकारों ने संसदीय समिति बनाई है और इस समिति ने कहा है कि देश के 16 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में हालात तेजी से गंभीर हो रहे हैं। उसने चेताया है कि जरूरत से ज्यादा दोहन के चलते देश के विभिन्न राज्यों में जल्दी ही पानी का गहरा संकट पैदा हो जाएगा।  इससे पानी की क्वालिटी भी खराब होगी। केंद्र सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भूमिगत का जल दोहन सबसे ज्यादा सिंचाई के लिए किया जा रहा है इसका फीसदी 91 वें हैं। जबकि बाकी का इस्तेमाल घरेलू और उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए होता है। बता दें कि शोध में पता चला है जल का सबसे ज्यादा दोहन पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में हो रहा है। 

राजस्थान

बता दें कि राजस्थान पिछले कुछ दिनों से गहरे पानी संकट से जुझ रहा है। इसके 12 कस्बों में 332 और 379 गांव-ढाणियों में 195 टैंकर्स के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में जल परिवहन के लिए 24 करोड़ और शहरी क्षेत्र में पानी के टैंकरों के लिए 22 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। फिरभी पानी का संकट से निजात मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। 
राजस्थान के जलदाय विभाग ने जल संकट से निपटने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

विभाग खराब पड़े हैडपंप और अन्य संसाधनों को सुधारने से लेकर ग्रामीण इलाकों को राहत मिल सके। पश्चिमी राजस्थान, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, कोटा और उदयपुर में पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने जगह जगह जीप और लेबर उपलब्ध कराए हैं लेकिन समस्या निपटना मुश्किल लग रहा है। राजस्थान में पानी संकट नया नहीं है। हर साल वहां पानी संकट गहराता जा रहा है। महिलाएं पानी बचाने के लिए मीलों चलकर जाती हैं फिर वह दो तीन दिन के लिए पानी एकत्रित कर पाती हैं। पानी बचाने के लिए राजस्थान में थार के रेगिस्तान के करीब रहने वाली जनजाती अपने झूठे बर्तनों को मांजने के लिए रेत तक का उपयोग करती है। 

 

20 साल से छत्तीसगढ़ के कुछ जिले पानी के संकट से गुजर रहे हैं।

छत्तीसगढ़

पिछले 20 साल से छत्तीसगढ़ के कुछ जिले पानी के संकट से गुजर रहे हैं। बलरामपुर जिले के गांव के लोगों का कहना है कि हम पिछले 20 सालों से पानी की समस्या से परेशान है और पूरी तरह से नदी पर निर्भर हैं लेकिन जैसे -जैसे गर्मी बढ़ती जाती है वैसे वैसे नदी सूख जाती है और कस्बे के लोग बूंद बूंद पानी को तरसने लग जाते हैं। वहीं इन गांवों की महिलाएं पानी की तलाश में 5 से 10 किलोमीटर तक जाती हैं। राज्य की राजधानी रायपुर से महज 70 किलोमीटर दूर राजनांदगांव पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। यहां दो बोरवेल भी थे लेकिन बढ़ी गर्मी के साथ पानी सूख गया है। गांव वालों का कहना है कि सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि बोर वेल सूखने के बाद हमारी दिक्कत बढ़ती जा रही है। यह राजनांदगांव ही नहीं छत्तीसगढ़ के गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, सुरगुजा और बलरामपुर इसमें प्रमुख हैं।  

मध्यप्रदेश

बढ़ी गर्मी के बाद मध्यप्रदेश बुरी तरह से प्रभावित है। वैसे बढ़ी गर्मियों में पानी की किल्लत यहां के लिए कोई नई बात नहीं है। पिछले चार-पांच सालों से यहां के कई शहरों के निवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। एमपी सरकार ने लोगों को जागरूक करने और पानी बचाने की सलाह देते हुए कहा है कि सूबे के 164 जलाशयों में से 65 महत्वपूर्ण बांध लगभग सूख चुके हैं। जबकि बचे हुए जलाशयों के अलावा 39 टैंक्स में महज 10 फीसदी या फिर उससे भी कम पानी बचा है।   

जबकि सरकार ने बढ़ता पानी का संकट देखने के बाद गोवा सरकार ने अपने नागरिकों से कहा है कि हमारे पास अभी दो महीनों का ही पानी बचा है। गोवा के जलसंसाधन मंत्री विनोद पालेकर ने कहा कि छह जलाशयों में पानी का स्तर ठीक है और यहां आने वाले दो महीनों तक पानी की किल्लत नहीं होने वाली है। उसके बाद मॉनसून आ जाने की भी बात कही है। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed