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बड़े बाजार से बढ़ाएंगे किसानों की आय, देश और दुनियाभर में बेच सकेंगे उत्पाद

Sat, 16 May 2020 05:51 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 16 May 2020 05:51 AM IST
सार

  • जोखिम रहित खेती, भंडारण और गुणवत्ता बनेगी आधार
  • 85 फीसदी खेती छोटे और मझोले किसानों के पास
  • 18 लाख टन अनाज भंडारण के अभाव में खराब होता है हर साल

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Increase farmers income from big market, will be able to sell products across the country and the world
किसान(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मुहैया कराने और किसानों की आय बढ़ाने का रोडमैप पेश किया। उनका जोर कृषि क्षेत्र में सुधार, उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर रहा। किसानों के लिए भारतीय बाजारों का दायरा बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार तक उनकी पहुंच बनाने और उत्पादों की ब्रांडिंग का ढांचा भी तैयार किया।

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किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या अनाज की कटाई के बाद उसकी बिक्री और भंडारण को लेकर है। वित्तमंत्री ने कहा है कि इसके लिए पर्याप्त कानूनी ढांचा बनाएंगे जिससे कृषि उपज की गुणवत्ता सुधारने के साथ बेहतर मूल्य दिला सकें। इसके अलावा किसानों तक पारदर्शी तरीके से प्रसंस्करण, एग्रीगेटर्स, बड़े खुदरा विक्रेताओं की और निर्यातकों की पहुंच सुनिश्चित कराएंगे।
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इस काम में एग्री स्टार्टअप से तकनीक और कंपनियां मददगार होंगी। इससे उन्हें आकर्षक मूल्य पर उपज बेचने का विकल्प मिलेगा। अभी तक किसानों को एपीएमसी से संबंधित केंद्रों पर ही उपज बेचने की अनुमति थी लेकिन अब वे सभी राज्यों में अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे उनके पास बेहतर दाम पर राज्य चुनने का विकल्प होगा और ई-ट्रेडिंग के जरिये भी खरीदारों तक पहुंच बना सकेंगे।

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आत्मनिर्भरता की नई जमीन तैयार

आज की घोषणाओं से किसानों, बागवानों, मत्स्यपालकों, दुग्ध उत्पादकों, मधुमक्खी पालकों सहित खाद्य प्रसंस्करण और हर्बल व कार्बनिक खेती कर रहे लोगों की समस्याओं का समाधान होगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव के साथ-साथ कृषि आधारभूत ढांचे और भंडारण क्षमता में मजबूती लाने के संकल्प से आत्मनिर्भर भारत के लिए नई जमीन तैयारी होगी। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को धन्यवाद देता हूं। -राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

मजबूत करेंगे भंडारण का ढांचा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अनाज उत्पादन से ज्यादा बड़ी समस्या उसके भंडारण और आपूर्ति की है। इसी कारण हर साल लाखों टन अनाज खराब हो जाता है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में शेष अनाज को इतनी खराब स्थिति में संग्रहीत किया जाता है कि कटाई के बाद अनाज का 10 फीसदी नुकसान होता है, जिसमें से 6 फीसदी (करीब 18 लाख टन) भंडारण के अभाव में खराब होता है।

इससे न सिर्फ वितरण हुए अनाज की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि किसानों को भी पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पाता। सरकार ने कृषि ढांचे में सुधार के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है, जिसमें भंडारण और आपूर्ति की व्यवस्था को प्रमुखता से लिया गया है।
 

सब्सिडी से बेहतर होगी फल-सब्जियों की आपूर्ति

वित्तमंत्री ने ऑपरेशन ग्रीन के तहत सभी फल और सब्जियों को सब्सिडी युक्त आपूर्ति की व्यवस्था का एलान किया है। इसका मतलब है कि अधिक उत्पादन वाले इलाकों से कम उत्पादन वाली जगहों पर इनकी आपूर्ति, भंडारण और परिवहन के खर्च पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।

अभी तक यह योजना टमाटर, आलू-प्याज जैसी सब्जियों पर ही लागू थी लेकिन इसका दायरा बढ़ाए जाने से पूरे देश में इन उत्पादों की बेहतर पहुंच आसान होगी। दरअसल, अभी तक आपूर्ति व भंडारण पर आने वाले खर्च के दबाव में ये उत्पाद उन्हीं जगहों तक सीमित रह जाते थे, जहां इनका ज्यादा उत्पादन होता है। इससे एक तो इनके खराब होने की आशंका रहती थी, दूसरे उत्पादकों को वाजिब दाम भी नहीं मिल पाता था।

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