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Maharashtra: टूटकर भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना क्यों मान रही कि वह एक साल बाद 'जीत' गई!

Mon, 03 Jul 2023 07:01 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 03 Jul 2023 07:01 PM IST
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सार
Maharashtra: राजनीतिक विश्लेषक दयानंद भिड़े कहते हैं कि ठीक एक साल बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से उसी तरीके की सियासी उठापटक से भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले एकनाथ शिंदे रविवार की घटना के साथ सियासी तौर पर कमजोर तो हुए ही हैं। क्योंकि भाजपा की सरकार राज्य में बनी रहे इसके लिए एकनाथ शिंदे भाजपा की एक तरह से मजबूरी थे...
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In this political crisis of Maharashtra, why Shiv Sena is seeing big victory
Maharashtra Crisis - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

महाराष्ट्र में रविवार को हुए सियासी उठापटक को शिवसेना अपनी एक 'बड़ी जीत' के तौर पर देख रही है। हालांकि शिवसेना की यह 'जीत' सत्ता में तुरंत वापसी की किसी उम्मीद को लेकर नहीं है, लेकिन शिवसेना अपनी पार्टी से टूट कर गए बागी नेता एकनाथ शिंदे की भाजपा में पड़ रही कमजोर पकड़ को अपनी जीत के तौर पर देख रही है। एनसीपी के नेता अजित पवार के भाजपा वाली सरकार में शामिल होने पर शिवसेना के नेता और पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात को लेकर अब समूचे महाराष्ट्र में अभियान चलाकर माहौल भी बना रहे हैं कि एकनाथ शिंदे के लिए अब सरकार बनाए रखने की मजबूरी नहीं है। इस सियासत पर बाकायदा शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने जल्द ही अजित पवार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कहकर नया सियासी तूल दे दिया है।

यह भी पढ़ें: Maharashtra: अजित पवार के दांव से शरद पवार को विदर्भ में भी लग सकती है चोट, 62 सीटों पर पड़ेगा भारी

अजित पवार के आने से एकनाथ शिंदे नहीं होंगे अब मजबूरी

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के विधायकों को अपने साथ जोड़ कर एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर पिछले साल सरकार बनाई थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस सियासी हलचल से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को राजनीतिक तौर पर बहुत बड़ा नुकसान हुआ था। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दयानंद भिड़े कहते हैं कि ठीक एक साल बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से उसी तरीके की सियासी उठापटक फिर से रविवार को हुई। इस सियासी उठापटक में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाए रखने वाले एकनाथ शिंदे रविवार की घटना के साथ सियासी तौर पर कमजोर तो हुए ही हैं। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि भाजपा की सरकार राज्य में बनी रहे इसके लिए एकनाथ शिंदे भाजपा की एक तरह से मजबूरी थे। लेकिन अब अजित पवार के आने से यह परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। यही वजह है कि शिवसेना एकनाथ शिंदे के कमजोर होने को अपनी ताकत के तौर पर देख रही है।

अजित पवार के नए सीएम बनाए जाने का यह है संदेश

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में अब चर्चा इस बात की सबसे ज्यादा हो रही है कि एकनाथ शिंदे को बदलकर अजित पवार को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र में शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने भी इस ओर इशारा किया है। राजनीतिक विश्लेषक जितेंद्र कदम कहते हैं कि अजित पवार के महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के सियासी मायने तो कई निकाले ही जा रहे हैं। वह कहते हैं कि अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अजित पवार की क्या बात हुई है यह तो दोनों पार्टियों से जुड़े हुए लोग ही जानते होंगे। लेकिन शिवसेना अजित पवार को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किए जाने के मुद्दे को बहुत मजबूती के साथ रख रही है। जितेंद्र कदम का तर्क है कि शिवसेना के विधायकों के साथ जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को पूरी तरह कमजोर कर दिया, तो बदले समीकरणों मे उद्धव ठाकरे की शिवसेना एकनाथ शिंदे को सियासी तौर पर पूरी तरह से विफल साबित करने की तैयारी कर रही है। वह कहते हैं कि उद्धव बाला साहब ठाकरे की शिवसेना को यह मौका भी अजित पवार के आने के साथ ही लगा है। यही वजह है कि जो उद्धव ठाकरे से लेकर संजय राउत तक सभी बड़े नेता अब इस बात को पूरे महाराष्ट्र में पार्टी फोरम के माध्यम से कह रहे हैं कि राज्य के अगले मुख्यमंत्री अजित पवार होंगे।

सियासी मैदान में चुनावी मुद्दा बनाएगी शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना से जुड़े नेताओं का कहना है कि जिस तरीके से अजित पवार ने महाराष्ट्र की सरकार में पर्याप्त संख्या बल के बाद भी समर्थन दिया है वह सामान्य बात नहीं है। शिवसेना के नेता संजय राउत कहते हैं कि महाराष्ट्र में जल्द ही मुख्यमंत्री भी बदला जाएगा। उनका इशारा साफ है कि एकनाथ शिंदे की कुर्सी फिलहाल खतरे में नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह कहते हैं कि इस पूरे सियासी उथल-पुथल में शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे जहां पहले थे वहीं पर आज भी है। बस फर्क इतना है कि अजित पवार के आने के साथ ही एकनाथ शिंदे की महाराष्ट्र सरकार में अब इतनी मजबूत पकड़ नहीं मानी जा रही है, इसलिए शिवसेना यह मानकर चल रही है कि जिसने उनको धोखा दिया अब वह सीएम की कुर्सी से हटेंगे। प्रदीप सिंह कहते हैं कि अगर इस तरीके का कोई भी सियासी घटनाक्रम निकट भविष्य में महाराष्ट्र में होता है, तो शिवसेना इसको अपने चुनावी एजेंडे को सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर सियासी मैदान में उतरेगी।

एकनाथ शिंदे के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने बनाई बड़ी योजना

शिवसेना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस तरीके से उनके मुखपत्र सामना में महाराष्ट्र की सियासत को लेकर लगातार सूचनाएं दी जा रही थीं, वह सच हो रही हैं। सामना में ही इस तरह की सूचना के माध्यम से जनता को बताया जा रहा है कि किस तरीके से मुख्यमंत्री का बदलाव महाराष्ट्र में होने वाला है। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि समूचे महाराष्ट्र में योजनाबद्ध तरीके से इस बात को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा कि उनकी पार्टी को तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे सत्ता के मद में चूर होकर मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन अब उनका राजयोग खत्म हो रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि सोमवार को हुई बैठक में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने तय किया है कि समूचे महाराष्ट्र में इस बात को लोगों तक पहुंचाया जाएगा कि सत्ता के लिए ही उनकी पार्टी को तोड़ा गया। और अब जिस तरह एकनाथ शिंदे शिवसेना को तोड़कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे थे, अजित पवार के आने के साथ ही वह उसी सत्ता की सीढ़ी से वापस नीचे भी पहुंच रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह कहते हैं कि महाराष्ट्र में जिस तरीके की सियासत हो रही है, उससे आने वाले दिनों में सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा फिलहाल लगा पाना बड़ा मुश्किल है। लेकिन वह मानते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में अभी कुछ बड़ा उलटफेर हो सकता है।

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