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पाक आतंकी अजमल कसाब और अफजल गुरु समेत इस सदी में चार को दी गई फांसी

Wed, 08 Jan 2020 04:40 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 08 Jan 2020 04:40 AM IST
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In this century in India Dhananjay Chatterjee Ajmal Kasab Afzal Guru Yakub Memon were hanged
अजमल कसाब, याकूब मेमन (फाइल फोटो)

आजाद भारत में अब तक 13 लोगों को फांसी दी गई है। वर्ष 2000 के बाद चार अपराधियों को फांसी पर लटकाया गया। इनमें धनंजय चटर्जी, पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब, संसद हमले का गुनहगार अफजल गुरु और मुंबई धमाकों का दोषी याकूब मेमन शामिल हैं।

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धनंजय चटर्जी, 14 अगस्त 2004

कानूनी सजा के रूप में 21वीं सदी में पहली फांसी धनंजय चटर्जी को दी गई। उसे 14 साल की छात्रा से दुष्कर्म कर उसकी हत्या का दोषी करार दिया गया था। कोलकाता के एक अपार्टमेंट में सुरक्षा गार्ड धनंजय ने परीक्षा देकर घर लौटी छात्रा से दरिंदगी की थी। निचली अदालत ने उसे दोषी माना और मौत की सजा सुनाई। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला बरकरार रखा। 39 साल की उम्र में धनंजय को अलीपुर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई।

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अफजल गुरु, 9 फरवरी 2013

अफजल गुरु को 2001 में हुए संसद हमले के जुर्म में दोषी ठहराया गया था। बारामुला के अफजल ने 1994 में दिल्ली यूनिवर्विटी से ग्रेजुएशन किया और एक फार्मा कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर बना। संसद पर हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद की मदद की।

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18 दिसंबर 2002 को विशेष पोटा अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने 2003 और सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में सजा यथावत रखी। तीन फरवरी 2013 को राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज की। नौ फरवरी को उसे तिहाड़ जेल में फांसी देकर दफनाया गया।

अजमल कसाब, 21 नवंबर 2012

लश्कर-ए-ताइबा का आतंकी अजमल आमिर कसाब 2008 के मुंबई हमले में शामिल था। पाकिस्तान के फरीदकोट का कसाब 2007 में जमात-उद- दावा से जुड़ा। मुजफ्फराबाद में ट्रेनिंग के बाद वह समुद्र के रास्ते आतंकियों व भारी मात्रा में हथियारों के साथ मुंबई आया।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हमला किया और अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस मामले में सिर्फ उसे जिंदा गिरफ्तार किया गया था। निचली कोर्ट ने 6 मई 2010 को उसे फांसी की सजा सुनाई। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील और पास दया याचिका खारिज होने पर पुणे की यरवदा जेल में उसे फांसी दी गई।

याकूब मेमन, 30 जुलाई 2015

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब मेमन ने 1993 मुंबई धमाकों के लिए दाऊद इब्राहिम की वित्तीय मदद की, 15 आतंकियों की पाकिस्तान में ट्रेनिंग और हथियारों की खरीद के लिए पैसा मुहैया करवाया। उसे 5 अगस्त 1994 को दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। टाडा अदालत ने 27 जुलाई 2007 को उसे मौत की सजा सुनाई। 



मेमन ने कई याचिकाएं और दया याचिका दी। फांसी के दिन 29 जुलाई, 2015 को सजा रुकवाने के लिए देर रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। हालांकि घंटों सुनवाई के बाद याचिका खारिज हो गई और 30 जुलाई को सुबह 6:30 बजे याकूब को उसके जन्मदिवस के दिन नागपुर जेल में फांसी दी गई।

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