देश में बच्चे लंबाई और वजन में गिरावट से जूझ रहे, यहां सबसे ज्यादा अविकसित बच्चे- सर्वे
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भारत में बाल-पोषण के मामलों में गिरावट आ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी एनएफएचएस के ताजा आंकड़ें बताते हैं कि देश में बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। नई सर्वे रिपोर्ट की मानें तो उम्र की तुलना में कद में गिरावट वाले सबसे ज्यादा बच्चे भारत में हैं। नए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में उन राज्यों में अल्पपोषण के आंकड़ें बढ़ रहे हैं, जहां पहले ये ग्राफ सकारात्मक स्थिति में रहता था।
संपन्न राज्यों में अल्प पोषण के आंकड़े बढ़ना चौंकाने वाला
इस सर्वे के अगले चरण के नतीजों में भी यही हाल रहता है तो 20 साल में पहली बार बाल स्टंटिंग की पहली बढ़ोतरी देखी जाएगी। ज्यादातर राज्यों में स्टेंटेड, वैस्टेड और अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ी है। चौंकाने वाली बात यह है कि केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे संपन्न राज्यों में अल्पपोषण के आंकड़े बढ़े हैं।
हालांकि पिछले दशक में यहां स्टंटिंग के आंकड़ों को कम कर लिया गया था। इसके सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में हैं। एनएफएचएस भारत में स्वास्थ्य डाटा संकलित करने का प्रमुख स्रोत है, इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति और बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के आकलन के लिए किया जाता है।
छह लाख घरों में किया सर्वे
इस सर्वे में देश के छह लाख घरों को शामिल किया गया है। हालांकि सरकारी अधिकारी कहते हैं कि स्टंटिंग के मामलों में बढ़ोतरी का मतलब सरकार की स्वास्थ्य या पोषण नीतियों में किसी कमी से नहीं है। रिपोर्ट की माने तो सबसे ज्यादा अविकसित बच्चे भारत में हैं।
अल्पपोषण मापने के तीन मुख्य सूचक
- स्टंटिंग (उम्र की तुलना में कद में कमी)
- वैस्टिंग (कद के सापेक्ष कम वजन)
- अंडरवेट (उम्र के सापेक्ष कम वजन)
भारत के 22 राज्यों में से 18 राज्यों में पांच साल के कम उम्र के एक चौथाई से ज्यादा बच्चे स्टेंटेड हैं। मेघालय में 46.5 फीसदी, बिहार में 42.9 फीसदी, गुजरात में 39 फीसदी, कर्नाटक में 35.5 फीसदी, गोवा में करीब 26 फीसदी और केरल में 23 फीसदी बच्चे उम्र के सापेक्ष कद में छोटे हैं।