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पद और शक्तियों का दुरुपयोग करने के मामले में फंसे हाईकोर्ट के दो जज, जांच पूरी

Tue, 06 Feb 2018 11:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 06 Feb 2018 11:30 AM IST
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in-house committee wrap up the inquiry against two sitting highcourt judges of orissa

पूर्व जीफ जस्टिस टीएस ठाकुर के नेतृत्व में उड़ीसा हाईकोर्ट के दो वर्मतान जजों पर अपनी शक्ति और पद के गलत इस्तेमाल के आरोप की जांच पूरी कर ली गई है। इस जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने पिछले हफ्ते अपनी सुनवाई पूरी कर ली है और इस महीने के अंत तक इसकी रिपोर्ट चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को दे दी जाएगी। इस समिति में हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार भी शामिल हैं। 

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उड़ीसा के जिन जजों पर जांच चल रही है उनके नाम जस्टिस इंद्रजीत मोहंती और एसके साहू हैं। उनके खिलाफ इन-हाउस जांच का आदेश तब सीजेआई रहे टीएस ठाकुर ने सिंतबर 2016 में दिया था, जब आरटीआई कार्यकर्ता जयंता कुमार दास ने उनकी शिकायत की थी। इस जांच की आखिरी सुनवाई दिल्ली के हरियाणा भवन में 2 फरवरी को हुई थी। जहां दोनों जज अपनी सफाई के लिए पहुंचे थे।
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जस्टिस मोहंती पर आरोप है कि उन्होंने जज के लिए बनाई गई आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए कटक में एक होटल खरीदा, पांच फ्लोर की बिल्डिंग बनाने का आदेश दिया जबकि वहां पर तीन फ्लोर बनाने की ही इजाजत थी और महिलाओं की नियुक्ति के खिलाफ आदेश जारी किए। वहीं साहू पर आरोप है कि उन्होंने एडिशनल जज के पद पर रहते हुए अपने आधिकारिक आवास का नवीकरण करने के लिए जनता के पैसों का दुरुपयोग किया।
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आरटीआई कार्यकर्ता जयंता ने पुरी की जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपने बयान दर्ज करवाए। उन्हें पुरी की एक कोर्ट ने 6 साल की सजा दी है। उनपर आरोप है कि उन्होंने नकली ऑनलाइन ईमेल आईडी और प्रोफाइल बनाई और उन्हे पोर्न साइट पर पोस्ट कर दिया। यदि जांच में दोनों जज आरोपी पाए जाते हैं तो सीजेआई उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इन दोनों को इस्तीफा देने के लिए कह सकती है। ऐसा ना करने की स्थिति में सीजेआई राष्ट्रपति से उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया को शुरू करने के लिए भी कह सकती है।

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