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सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में अगस्त में आया सुधार : मासिक सर्वेक्षण
Fri, 04 Sep 2020 07:09 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 04 Sep 2020 07:09 AM IST
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना वायरस महामारी के कारण सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में जारी गिरावट अगस्त में कुछ थमी, लेकिन यह अभी भी संकुचन की अवस्था में बनी हुई है। एक मासिक सर्वेक्षण ने गुरुवार को बताया कि महामारी के चलते प्रतिबंधों ने ग्राहकों की मांग और कारोबार के संचालन पर प्रतिकूल असर डाला है।
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मौसमी रूप से समायोजित ‘भारत सेवा कारोबार गतिविधि सूचकांक’ अगस्त में बढ़कर 41.8 पर पहुंच गया। यह सूचकांक जुलाई में 34.2 था। यह मार्च में कोरोना वायरस महामारी के फैलाव के बाद सबसे अधिक है। हालांकि, भारत में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में अगस्त के दौरान लगातार छठे महीने संकुचन देखने को मिला। आईएचएस मार्किट इंडिया के सर्विस पर्चेसिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) के मुताबिक, 50 से अधिक अंक का अर्थ है कि गतिविधियों में बढ़ोतरी हो रही है, जबकि 50 से कम अंक कमी या संकुचन को दर्शाता है।
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आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री श्रीया पटेल ने कहा कि अगस्त के आंकड़े भारतीय सेवा क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण स्थितियों को दर्शाते हैं। घरेलू और विदेशी बाजारों में लॉकडाउन के प्रतिबंधों का इन गतिविधियों पर भारी असर पड़ा है। सर्वेक्षण के मुताबिक कंपनियों ने कम व्यावसायिक गतिविधियों के कारण लगातार छठे महीने छंटनी की सूचना दी है।
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रोजगार सृजन में आ रही मुश्किल
आईएचएस मार्किट ने कहा, अप्रैल-मई में कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई थी और उद्योगों का बकाया भी रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गया। इसके असर से नए कारोबार शुरू करने और नौकरियां देने में मुश्किलें आ रही हैं। प्रोजेक्ट पूरे करना भी मुश्किल हो रहा और उत्पादन की लागत भी लगातार बढ़ रही है। सर्वे के अनुसार, सेवा और विनिर्माण क्षेत्र का संयुक्त ईएमआई अगस्त में 46 अंक रहा, जो जुलाई में 37.2 था। निजी क्षेत्र के कारोबार में भी लगातार छठे महीने गिरावट रही है।
मनरेगा की सुस्त रफ्तार ने बढ़ाई बेरोजगारी दर : सीएमआईई
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई)ने बताया कि अगस्त में बेरोजगारी दर जुलाई के मुकाबले बढ़ गई है। मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में काम कम होने और खरीफ की बुवाई समाप्त होने की वजह से ग्रामीण बेरोजगार में इजाफे का असर पूरे देश पर पड़ा है। जुलाई में रोजगार सृजन की दर 37.6 फीसदी थी, जो अगस्त में 37.5 फीसदी हो गई।
इससे बेरोजगारी दर बढ़कर 8.4 फीसदी पहुंच गई। जुलाई में यह 7.4 फीसदी थी। लॉकडाउन के बाद अप्रैल-मई में बेरोजगारी दर 23.5 फ़ीसदी थी। इस दौरान जुलाई के मुकाबले दो लाख रोजगार कम जबकि पिछले साल के मुकाबले इसमें 1.07 करोड़ गिरावट आई थी।