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रेलवे मास्टर प्लान बनाकर यातायात व्यवस्था सुधारे: सीएजी
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Aug 2018 09:53 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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रेलवे मास्टर प्लान बना कर स्टेशनों के लाइन क्षमता, ट्रैफिक पैटर्न, प्लेटफार्म की लंबाई, यार्ड को विकसित करें। स्टेशनों का पुनर्विकास, भवन निर्माण करने के पहले प्लेटफार्म की संख्या बढ़ाकर स्टेशनों का विस्तार करें।
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बड़े स्टेशनों पर सभी प्लेटफार्म की लंबाई इतनी बढ़ाई जाए ताकि उनपर 24 व इससे अधिक कोच वाली ट्रेन को समायोजित किया जा सके। यह बातें भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने अपनी सिफारिश में कही है।
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सीएजी ने बड़े स्टेशनों के आउटर पर ट्रेनों के रूके रहने और इससे होनी वाली देरी पर कहा है कि अवरोधों का रेलवे पता करे। यात्री की खास जरूरत समय पर ट्रेन चलना और गंतव्य तक पहुंचना है। इस समस्या केसमाधान के बाद ही स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर बल देने की आवश्यकता है।
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ईलाहाबाद, मुगलसाराय, कानपुर, मथुरा, दिल्ली के स्टेशन पर सुधार की आवश्यकता
सीएजी ने इलाहाबाद स्टेशन पर भी कई कमियों को इंगित किया है। सिफारिश में सीएजी ने कहा है कि बड़े स्तर पर मुख्य योजना इस स्टेशन के लिए तैयार करने की जरूरत है।
इलाहाबाद स्टेशन पर ट्रेनों के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए सूबेदारगंज स्टेशन को प्राथमिकता के साथ विकसित करने को कहा है। ताकि इलाहाबाद स्टेशन से संचालित होने वाली ट्रेनों को नये टर्मिनल पर शिफ्ट किया जा सके।
प्लेटफार्म नंबर 11 को विस्तार करने की भी सिफारिश की गई है। कानपुर, मथुरा स्टेशन पर भी ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक टर्मिनल के विकास का उपाय ढूंढने को कहा गया है।
सीएजी ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पाया कि 10 प्लेटफार्म में केवल पांच प्लेटफार्म ही ऐसे है जिससे 24 कोचों से अधिक की ट्रेनों का प्रबंधन करने की क्षमता है। जबकि इस स्टेशन से प्रतिदिन 328 ट्रेनों का प्रबंधन होता है।
सीएजी ने मुगलसराय स्टेशन पर बेहतर ट्रैफिक संचालन के लिए सभी प्लेटफार्मो को प्राथमिकता के आधार पर 24 कोच वाली ट्रेनों के संचालन योग्य बनाने के लिए कहा गया है। सीएजी ने पाया कि इस स्टेशन से प्रतिदिन 140 ट्रेन संचालित होती है। यहां कोई वाशिंग पीट नहीं है। आठ प्लेटफार्म में से चार प्लेटफार्म से ही 24 कोच वाली ट्रेन संचालित हो सकती है, जबकि 30 ट्रेन 24 कोच वाली यहां से संचालित होती है।
राजधानी में लाइन क्षमता के कारण बाधा
सीएजी ने पाया है कि नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली स्टेशनों पर स्टेशन लाइन क्षमता सबसे बड़ी बाधा है। नई दिल्ली स्टेशन के 16 प्लेटफामों में 13 प्लेटफार्म ही ऐसे है जिससे 24 कोच वाली ट्रेनों का संचालन संभव है। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का तो और बुरा हाल है। इस स्टेशन पर 16 प्लेटफार्मो में महज पांच स्टेशन से ही इतनी कोच की संख्या वाली ट्रेन संचालित हो सकती है। सीएजी ने कहा है कि शकुरबस्ती स्टेशन को विकसित होना था, लेकिन 16 वर्ष बाद भी निर्माणकार्य पूरा नहीं हो सका है।
नहीं हो सका काम पूरा
सीएजी ने कहा है कि समस्या को दूर करने केलिए दिल्ली में आनंद विहार स्टेशन, इलाहाबाद में छिवकी स्टेशन, पटना में राजेंद्रनगर टर्मिनल को विकसित करने की योजना बनी थी, लेकिन इन स्टेशनों के काम अभी तक पूरे नहीं हुए है।
इलाहाबाद स्टेशन पर ट्रेनों के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए सूबेदारगंज स्टेशन को प्राथमिकता के साथ विकसित करने को कहा है। ताकि इलाहाबाद स्टेशन से संचालित होने वाली ट्रेनों को नये टर्मिनल पर शिफ्ट किया जा सके।
प्लेटफार्म नंबर 11 को विस्तार करने की भी सिफारिश की गई है। कानपुर, मथुरा स्टेशन पर भी ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक टर्मिनल के विकास का उपाय ढूंढने को कहा गया है।
सीएजी ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पाया कि 10 प्लेटफार्म में केवल पांच प्लेटफार्म ही ऐसे है जिससे 24 कोचों से अधिक की ट्रेनों का प्रबंधन करने की क्षमता है। जबकि इस स्टेशन से प्रतिदिन 328 ट्रेनों का प्रबंधन होता है।
सीएजी ने मुगलसराय स्टेशन पर बेहतर ट्रैफिक संचालन के लिए सभी प्लेटफार्मो को प्राथमिकता के आधार पर 24 कोच वाली ट्रेनों के संचालन योग्य बनाने के लिए कहा गया है। सीएजी ने पाया कि इस स्टेशन से प्रतिदिन 140 ट्रेन संचालित होती है। यहां कोई वाशिंग पीट नहीं है। आठ प्लेटफार्म में से चार प्लेटफार्म से ही 24 कोच वाली ट्रेन संचालित हो सकती है, जबकि 30 ट्रेन 24 कोच वाली यहां से संचालित होती है।
राजधानी में लाइन क्षमता के कारण बाधा
सीएजी ने पाया है कि नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली स्टेशनों पर स्टेशन लाइन क्षमता सबसे बड़ी बाधा है। नई दिल्ली स्टेशन के 16 प्लेटफामों में 13 प्लेटफार्म ही ऐसे है जिससे 24 कोच वाली ट्रेनों का संचालन संभव है। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का तो और बुरा हाल है। इस स्टेशन पर 16 प्लेटफार्मो में महज पांच स्टेशन से ही इतनी कोच की संख्या वाली ट्रेन संचालित हो सकती है। सीएजी ने कहा है कि शकुरबस्ती स्टेशन को विकसित होना था, लेकिन 16 वर्ष बाद भी निर्माणकार्य पूरा नहीं हो सका है।
नहीं हो सका काम पूरा
सीएजी ने कहा है कि समस्या को दूर करने केलिए दिल्ली में आनंद विहार स्टेशन, इलाहाबाद में छिवकी स्टेशन, पटना में राजेंद्रनगर टर्मिनल को विकसित करने की योजना बनी थी, लेकिन इन स्टेशनों के काम अभी तक पूरे नहीं हुए है।