फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Important reforms to achieve aim of doubling the income of farmers

क्या दो साल में दोगुनी हो जाएगी किसानों की आय? इन क्षेत्रों में बड़े सुधार की जरूरत

Sun, 30 Aug 2020 10:40 PM IST
गौरव पाण्डेय अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 30 Aug 2020 10:40 PM IST
सार

केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय बढ़ाकर दोगुनी की जाए। इसके लिए किसानों को वैकल्पिक खेती अपनाने, भंडारण क्षमता बढ़ाने, कृषि उत्पादों को शहरी केंद्रों तक पहुंचाने की रणनीति पर चलने पर जोर दिया जा रहा है। इसी योजना को ध्यान में रखते हुए कृषि उत्पादों को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। लेकिन क्या ये उपाय किसानों की आय दोगुना तक बढ़ाने के लिए पर्याप्त होंगे? किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए क्या किया जाना चाहिए? 

विज्ञापन
Important reforms to achieve aim of doubling the income of farmers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

किसान शक्ति संघ शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा बहुत लुभावना है, लेकिन इसकी असलियत तब सामने आ जाती है जब सरकार किसानों के उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। मूल्य तय करने में A2+FL (वास्तविक खर्च+परिवार का श्रम) का तरीका अपनाया जाता है जिसमें कृषि भूमि का किराया शामिल नहीं किया जाता। अगर सरकार कृषि लागत मूल्य आयोग की सिफारिशों के मुताबिक उपज का मूल्य C2+50% तरीके से करे तो ही किसानी लाभदायक सौदा साबित होगी। 

विज्ञापन


केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है, लेकिन बाजार की सच्चाई यह है कि गेंहू को कई बार इससे भी कम कीमत पर बेचा जा रहा है। किसान खरीद केंद्रों से बाहर किसानों को यह मूल्य नहीं मिलता। सरकार को यह नियम बाध्यकारी करना चाहिए कि कृषि उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे कहीं भी नहीं बेचा जा सकता। इससे किसान अनाज मंडी के दलालों के चंगुल से बच सकेंगे। 
विज्ञापन



राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेता शिव कुमार शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है, जबकि इसकी न्यूनतम लागत 2800 रुपये के लगभग आ रही है। यानी प्रति कुंतल के हिसाब से किसान को देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हजार रुपये प्रति कुंतल तक का नुकसान हो रहा है। अगर सरकार वास्तविक लागतों के आधार पर मूल्य निर्धारित करती तो यह मूल्य 4200 रुपये के आसपास होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी प्रकार धान की फसल के लिए वर्ष 2019-20 में न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य धान के लिए 1815 रुपये और ए ग्रेड के धान के लिए 1835 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया था। जबकि इसकी लागत 3372 रुपये तक आई थी। इस प्रकार हर कुंतल पर किसानों को डेढ़ हजार रुपये तक का नुकसान हुआ था। 

इस वर्ष कोरोना के कारण श्रमिकों की उपलब्धता बेहद कम हो गई थी। जो श्रमिक बचे, उन्होंने ज्यादा मजदूरी ली है। कई जगहों पर धान लगाने के लिए तीन से चार हजार रुपये तक का ठेका देना पड़ा है। जबकि समर्थन मूल्य तय करते समय इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाएगा और इसकी कीमत किसानों को ही चुकानी पड़ेगी। 

केंद्र सरकार ने कई कृषि उपकरणों पर जीएसटी दरें लागू कर दी हैं जिनसे कृषि उपकरणों की लागत बढ़ गई है। इसी प्रकार बिजली दरों, रसायनों और खादों पर मूल्य बढ़ गया है। इसका नुकसान यह हुआ है कि कृषि लागत बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही कृषि घाटा भी बढ़ता जा रहा है। 


क्या हो सकता है उपाय
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उसकी लागत को कम करना सबसे प्रमुख माना जाता है। इसके लिए किसानों को कम मूल्य पर बिजली उपलब्ध कराना, डीजल-पेट्रोल कीमतें कम करना, किसी भी कृषि उत्पाद को कहीं भी बेचने पर एक न्यूनतम मूल्य निश्चित करना आवश्यक है। किसान अपने मनचाहे समय पर उत्पाद बेच सकें, इसके लिए भंडारण केंद्रों और लॉजिस्टिक्स की सुविधा को मजबूत करना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed