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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: विदेशी वित्त पोषित मेगा परियोजनाओं में न्यायिक हस्तक्षेप राष्ट्रहित में नहीं

Tue, 01 Feb 2022 08:10 AM IST
सुरेंद्र जोशी राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 01 Feb 2022 08:10 AM IST
सार

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की। 
 

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Important observation of Supreme Court: Judicial intervention in foreign funded mega projects is not in national interest
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुलेट ट्रेन मामले को लेकर दिए फैसले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि विदेशी वित्त पोषित मेगा परियोजनाओं में न्यायिक हस्तक्षेप के कारण देरी व्यापक जनहित में नहीं है। यह राष्ट्रहित में नहीं हो सकती है।

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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के संबंध में एक डिपो के निर्माण और विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी मोंटेकार्लो लिमिटेड की बोली पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने यह कहते हुए कि यह परियोजना 'राष्ट्रीय महत्व' की है, हाईकोर्ट के अगस्त 2021 के फैसले को रद्द कर दिया। 
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पीठ ने अपने फैसले में कहा है, 'अदालतों द्वारा इस तरह का हस्तक्षेप और इस तरह की परियोजनाओं में देरी, जो विकसित देश द्वारा विकासशील देश के लिए द्विपक्षीय समझौते पर विदेशी वित्त पोषित हैं, भविष्य के निवेश या वित्त पोषण को प्रभावित कर सकती है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की किसी मेगा परियोजना, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, में देरी व्यापक जनहित और राष्ट्र हित में नहीं हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमेशा यह सलाह दी जाती रही है कि इस तरह की विदेशी वित्त पोषित मेगा परियोजना में देरी का व्यापक प्रभाव हो सकता है और कई बार परियोजनाओं में देरी के कारण वित्तीय बोझ पड़ता है। इसलिए निविदा प्रक्रिया या अनुबंध के पूरा होने तक न्यूनतम हस्तक्षेप या कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

पीठ ने कहा कि एक विकासशील देश के लिए इतनी ऊंची लागत वाली परियोजना को आगे बढ़ाना मुश्किल है जब तक कि विकसित देश फंड देने के लिए तैयार न हो। खासकर तब जब विकसित देश न्यूनतम रियायती ब्याज दर पर बड़ी राशि देने के लिए तैयार हो। 

एनएचएसआरसीएल ने मोंटेकार्लो की बोली को अस्वीकार कर दिया था और एससीसीवीआरएस- जेवी को ठेका दिया था। मोंटेकार्लो ने तब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोंटेकार्लो ने अपनी याचिका में कहा था कि बोली को खारिज करते समय कोई कारण नहीं बताया गया था।


बुलेट ट्रेन परियोजना जापान के साथ साझेदारी में 2017 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। यह परियोजना 2022 तक 1.10 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरा होने की उम्मीद थी। यह बताया गया है कि परियोजना के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में लगभग 1400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। लगभग 6000 भू स्वामियों को मुआवजा देना होगा। 2019 में गुजरात हाईकोर्ट ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली किसानों और जमीन मालिकों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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