ईरान युद्ध का असर: बोतलबंद पानी पीना महंगा, 11 फीसदी तक बढ़ी कीमत; प्लास्टिक लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव
ईरान युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों का असर अब भारत के बोतलबंद पानी बाजार पर दिख रहा है। प्लास्टिक बोतलों की लागत बढ़ने से कीमतों में 8-11% तक इजाफा हुआ है। बिसलेरी समेत बड़ी कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। 70% भूजल दूषित होने के कारण बोतलबंद पानी की मांग पहले से ही ज्यादा है, ऐसे में बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं।
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ईरान युद्ध के चलते देश में बोतलबंद पानी की कीमत में 11 फीसदी की वृद्धि हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों के दाम बढ़ गए हैं। 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में स्वच्छ जल एक विशेषाधिकार है, क्योंकि शोधकर्ताओं का कहना है कि 70 फीसदी भूजल दूषित है। बिसलेरी, कोका-कोला, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पेप्सी और टाटा सभी पांच अरब डॉलर के बाजार में हिस्सेदारी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से पॉलिमर की लागत बढ़ रही है, जो उद्योग की प्लास्टिक की बोतलों के लिए एक प्रमुख सामग्री है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
बोतलबंद पानी के बाजार के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी ने कीमतों में 11 फीसदी वृद्धि की है। एक लीटर पानी की 12 बोतलों के एक बॉक्स की कीमत अब 240 रुपये होगी, जबकि पहले यह 216 रुपये थी। बिसलेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज ने कहा, पैकेजिंग सामग्री की लागत में भारी वृद्धि के कारण पैकेटबंद पेयजल की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। पिछले पखवाड़े में पैकेजिंग सामग्री की लागत में 70 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।
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साथ ही, मौजूदा स्थिति किसी के नियंत्रण से बाहर है। पार्ले एग्रो ने भी अपने बैली बोतलबंद पानी ब्रांड की कीमत में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है। क्लियर प्रीमियम वाटर के सीईओ नयन शाह ने कहा कि इन युद्ध की घटनाओं के कारण कंपनी ने बोतलबंद पानी की खुदरा कीमतों में 8 से 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
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बोतलों के निर्माण सामग्री की लागत 50 फीसदी बढ़ी
तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से प्लास्टिक की बोतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत 50 फीसदी बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। ढक्कनों की कीमत दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है। नालीदार बक्से, लेबल और चिपकने वाली टेप भी महंगी हो गई हैं। इस मूल्य वृद्धि से सरकार की ओर से सितंबर में किए गए कर सुधारों का लाभ उलट गया है, जब बोतलबंद पानी पर टैक्स 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया था। इससे कई कंपनियों को दाम घटाने के लिए प्रोत्साहन मिला था।
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